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यूपी बोर्ड ने ली दोहरी फीस, छात्रों को 44 करोड़ की चपत!

Mon, 20 Apr 2015 12:29 PM IST
शैलेश अरोड़ा/अमर उजाला, लखनऊ
शैलेश अरोड़ा/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 20 Apr 2015 12:29 PM IST
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UP Board school take the fee twice.

निजी स्कूल कॉलेजों की फीस के नाम पर मनमानी वसूली की शिकायतें तो आम हैं, लेकिन अब यूपी बोर्ड से जुड़े स्कूलों में भी यही मनमानी सामने आ रही है। राजकीय और अनुदानित कॉलेजों में छात्रों से तीन महीने की फीस दोबारा वसूली जा रही है।

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ऐसा शासन के उस आदेश के तहत हो रहा है जिसमें अप्रैल 2015 से लेकर मार्च 2016 तक की फीस लिए जाने को कहा गया है, जबकि छात्रों से पिछले सत्र में ही इस साल जून तक की फीस वसूली जा चुकी है। इससे नौवीं और दसवीं के हर छात्र को 83 रुपये तो 11वीं व 12वीं के छात्रों को 98 रुपये की चपत लगेगी।
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पूरे प्रदेश की बात करें तो छात्रों की जेब से करीब 44 करोड़ रुपये दोबारा फीस वसूली से निकाल लिए जाएंगे। यह समस्या सत्र में बदलाव की व्यवस्था के कारण आई है। पहले सत्र जुलाई से जून तक होता था लेकिन इस साल से सत्र अप्रैल से मार्च हो गया।
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यह बदलाव तो कर दिया गया लेकिन जो पुरानी फीस वसूली गई थी, उसके समायोजन के बारे में सोचा ही नहीं गया। 9वीं से 12वीं तक के छात्रों से शासनादेश के तहत फीस वसूलना शुरू कर दिया गया है। गौरतलब है कि कक्षा आठवीं तक राजकीय और अनुदानित स्कूलों में फ्री पढ़ाई की व्यवस्था है।

इस तरह छात्रों को लगेगी चपत

UP Board school take the fee twice.

-इस साल कक्षा 9वीं व 10वीं में मिलाकर करीब 26,59,000 छात्र होंगे। इन्हें तीन महीने की अतिरिक्त फीस के रूप में 22,06,80,400 रुपये चुकाने होंगे।

कक्षा 11वीं व 12वीं में करीब 22,23,000 छात्र होंगे। इनसे 21,78,34,400 रुपये अतिरिक्त वसूले जाएंगे
कुल ली जाने वाली अतिरिक्त फीस- लगभग 43,85,14,800 रुपये।

(राजकीय व अनुदानित कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों व उनसे ली गई अतिरिक्त फीस का आंकड़ा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के अनुसार)

लखनऊ में 71 लाख रुपये ज्यादा होगी फीस वसूली
प्रिंसिपल बोले-नई व्यवस्था तो लागू कर दी लेकिन नहीं ली हमारी राय

सत्र की व्यवस्था बदलने के बाद फीस वसूली की व्यवस्था में बदलाव नहीं किए जाने पर स्कूलों के प्रिंसिपल भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले सत्र में फीस वसूले जाने के बावजूद तीन महीने की फीस की अतिरिक्त वसूली नाजायज है।
शासन को चाहिए कि नए प्रवेश में तत्काल फीस के समायोजन की व्यवस्था हो। जो छात्र बारहवीं पास कर चुके, उन्हें तीन महीने की फीस वापस की जानी चाहिए।

राजधानी लखनऊ की बात करें तो शासकीय व अनुदानित कॉलेजों में कक्षा 9वीं से 12वीं के बीच लगभग 39,500 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इनसे ली जाने वाली तीन माह की अतिरिक्त फीस करीब 71 लाख रुपये है।

प्रिंसिपलों के पास फीस वसूलने के अलावा कोई चारा नहीं

UP Board school take the fee twice.

प्रिंसिपलों का कहना है कि शासनादेश जारी होने से उनके पास फीस वसूलने के अलावा कोई चारा नहीं है। नई व्यवस्था लागू करने से पहले इन बिंदुओं पर विचार कर लिया जाना चाहिए था। जब एक बार किसी छात्र से समय विशेष की फीस ले ली गई तो दोबारा फीस वसूलने का कोई औचित्य नहीं बनता।

सूबे में यूपी बोर्ड से संचालित स्कूल व कॉलेजों की संख्या लगभग 22 हजार है। इनमें से करीब 16 हजार स्ववित्तपोषित और 6 हजार शासकीय और अनुदानित हैं। कक्षा 9वीं से 12वीं में पढ़ने वाले छात्रों की कुल संख्या लगभग एक करोड़, 29 लाख है।

माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री व प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्रा के अनुसार, इस छात्र संख्या में करीब 38 फीसदी छात्र शासकीय और अनुदानित शिक्षण संस्थानों में पढ़ते हैं।

इन छात्रों से ली जाने वाली फीस में कुछ मद मासिक और कुछ वार्षिक हैं। लेकिन फीस कम होने के चलते अधिकतर कॉलेज प्रवेश के समय ही पूरी फीस लेते हैं, जबकि कुछ छमाही। दोनों ही स्थितियों में कॉलेजों ने छात्रों से पूरे 12 माह की फीस जमा कराई जबकि उनका सत्र मात्र नौ महीने का ही रहा।

शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री भी असमर्थ

UP Board school take the fee twice.

इस पर उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री व प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्रा का कहना है कि राजकीय और अनुदानित कॉलेज शासन के निर्देशानुसार ही फीस ले सकते हैं। इसलिए व्यवस्था में कमी देखते हुए भी हम खुद छात्रों को राहत देने में असमर्थ हैं।

हमारी शासन से मांग है कि छात्रों से ली गई अतिरिक्त फीस उनको लौटाई जाए या नई कक्षा में प्रवेश के समय इसे समायोजित करने की व्यवस्था हो। कुल छात्र संख्या के करीब 38 फीसदी छात्र शासकीय और अनुदानित कॉलेजों में हैं।

वहीं, अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. जेपी मिश्रा का कहना है कि शासन ने बिना प्रधानाचार्यों से सलाह लिए खुद ही नई व्यवस्था लागू कर दी। इसी वजह से छात्रों को दो बार फीस का भुगतान करना पड़ रहा है। यदि सत्र में बदलाव की व्यवस्था योजनाबद्ध तरीके से होती तो ऐसी समस्या नहीं आती। यह छात्रों पर अतिरिक्त भार है।

जानिए किस मद में कितनी ली गई फीस

UP Board school take the fee twice.

शुल्क विवरण--अवधि--कक्षा 9 व 10--कक्षा 11 व 12
विकास--मासिक--10 रुपये--15 रुपये
क्रीड़ा--मासिक--5 रुपये--5 रुपये
विज्ञान--मासिक--5 रुपये--5 रुपये

स्काउटिंग--मासिक--2 रुपये--2 रुपये
रेडक्रॉस--मासिक--1 रुपये--1 रुपये
पंखा--वार्षिक--20 रुपये--20 रुपये
निर्धन शुल्क--वार्षिक--10 रुपये--10 रुपये
जलपान--वार्षिक--10 रुपये--10 रुपये

वाचनालय--वार्षिक--12 रुपये--12 रुपये
श्रव्य-दृश्य--वार्षिक--2 रुपये--2 रुपये
कला--वार्षिक--2 रुपये-- -

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. अवध नरेश शर्मा का कहना है कि इस बारे में प्रिंसिपल को बुलाकर बात करेंगे, अगर बच्चों से तीन महीने की फीस दो बार ले ली गई है तो इसके समायोजन के लिए समाधान निकाला जाएगा। बहरहाल शासन का निर्देश है कि अब अप्रैल से मार्च की फीस वसूली जाए। इसका पालन किया जाएगा।

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