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UP : 'मॉडिफाइड साइलेंसर और हूटर से होने वाले शोर पर रोक लगाएं अफसर', हाईकोर्ट ने दिया आदेश
Tue, 14 Apr 2026 09:33 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Tue, 14 Apr 2026 09:33 PM IST
सार
ध्वनि प्रदूषण मामले में सख्त हाईकोर्ट ने अफसरों को निर्देश दिए हैं। वहीं, कोर्ट ने यह भी पूछा कि पिछले पांच वर्षों में मॉडिफाइड साइलेंसरों व हूटर आदि के निर्माण व बिक्री को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।
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- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
ध्वनि प्रदूषण के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को पूरे प्रदेश में प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने खासतौर पर वाहनों में लगाए जा रहे मॉडिफाइड साइलेंसर और हूटर से होने वाले शोर पर रोक लगाने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने वर्ष 2021 में दर्ज स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर दिया।
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कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पुलिस महानिदेशक व परिवहन आयुक्त को हाजिर होने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इनसे यह भी पूछा था कि पिछले पांच वर्षों में मॉडिफाइड साइलेंसरों व हूटर आदि के निर्माण व बिक्री को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।
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इसके तहत इन दोनों आला अधिकारियों समेत यूपी पीसीबी के सदस्य सचिव सुनवाई के समय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए और मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी दी। इससे कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ और ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए अधिक प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा हम आंकड़े नहीं जानना चाहते हैं, अदालत सिर्फ मामले में प्रभावी कार्यप्रणाली चाहती है।
खंडपीठ ने परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, परिवहन आयुक्त, अतिरिक्त महानिदेशक यातायात, शहरी विकास विभाग के विशेष सचिव और यूपीपीसीबी के सदस्य सचिव को 20 मई को अगली सुनवाई में फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पहले ही इस मामले में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की समिति गठित करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि समिति का गठन कर दिया गया है।