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UP: एआई से जीएसटी चोरी पर वार, यूपी में फर्जी कारोबार और फर्मों की धर-पकड़ कर रहा ‘बाइफा’; जानें टूल की खासियत

Sat, 04 Apr 2026 08:50 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 04 Apr 2026 08:50 AM IST
सार

जीएसटी विभाग फर्जी फर्मों और टैक्स चोरी पकड़ने के लिए एआई और डेटा एनालिटिक्स आधारित सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहा है। यह संदिग्ध लेनदेन और नकली बिलिंग को चिन्हित करता है। सख्ती के बावजूद जालसाज ई-वे बिल के जरिए धोखाधड़ी कर रहे हैं, जिससे राजस्व को नुकसान हो रहा है।

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UP: AI Strikes Against GST Evasion; 'BYFA' Cracks Down on Bogus Businesses and Firms in UP—Learn About the Too
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया (AI)

विस्तार

उत्तर प्रदेश में फर्जी फर्में बनाकर टैक्स चोरी करने वालों को पकड़ने के लिए राज्य का जीएसटी विभाग अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का सहारा ले रहा है। इसमें मुख्य रूप से बाईफा (बिजनेस इंटेलीजेंस एंड फ्राड एनालिटिक्स) सॉफ्टवेयर की भूमिका सबसे अहम है।

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बाइफा विभाग का सबसे शक्तिशाली डिजिटल हथियार है जो भारी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध गतिविधियों को ''रेड फ्लैग'' यानी चिह्नित कर देता है। यह टूल ट्रैक करता है कि क्या बिल केवल कागजों पर एक ही ग्रुप की कंपनियों के बीच घूम रहे हैं।

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राज्य कर विभाग में जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाइफा विभाग का सबसे शक्तिशाली डिजिटल हथियार है। यह सॉफ्टवेयर भारी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध गतिविधियों को ''रेड फ्लैग'' यानी चिह्नित कर देता है। यह टूल ट्रैक करता है कि क्या बिल केवल कागजों पर एक ही ग्रुप की कंपनियों के बीच घूम रहे हैं।

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यह सिस्टम तुरंत अधिकारियों को अलर्ट भेज देता

यदि एक ही मोबाइल नंबर या पैन से कई फर्में रजिस्टर्ड हैं, तो यह सिस्टम तुरंत अधिकारियों को अलर्ट भेज देता है। यूपी का जीएसटी सिस्टम अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी के टोल प्लाजा से रीयल-टाइम डेटा के साथ एकीकृत है। अगर किसी व्यापारी ने ई-वे बिल तो बनाया है, लेकिन वह ट्रक किसी टोल प्लाजा से नहीं गुजरा, तो सिस्टम समझ जाता है कि केवल ''कागजी सप्लाई'' हुई है।

उन्होंने बताया कि विभाग एआई का उपयोग करके करदाताओं के व्यवहार का विश्लेषण कर रहा है। यदि किसी नई फर्म का टर्नओवर बिना किसी ठोस आधार के अचानक करोड़ों में पहुंच जाता है, तो एआई टूल्स इसे संदिग्ध मानकर जांच के लिए भेज देते हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और असल में जमा किए गए टैक्स के बीच के अंतर को ये टूल्स पलक झपकते ही पकड़ लेते हैं।

 

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फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ये भी कवायद

धोखाधड़ी रोकने के लिए अब पंजीकरण के समय 100% भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। सत्यापन करने वाले अधिकारी को मौके पर जाकर संबंधित व्यक्ति के साथ सेल्फी लेनी पड़ती है और उसे सिस्टम पर अपलोड करना होता है, ताकि कोई फर्जी पते पर कंपनी न बना सके।

पोर्टल में सरकार ने अधिकारियों सुविधा दे रखी है कि कौन सी गाड़ी प्रांत बाहर से यूपी आ रही है और प्रांत से बाहर जा रही है। गाड़ी में क्या हैं। ये भी जानकारी मिल जाती है। इसीलिए वाहनों को डेटा बेस के आधार पर पकड़ा जा रहा है।

फिर भी हो रही टैक्स चोरी

तमाम कवायद के बावजूद धड़ल्ले से जीएसटी चोरी हो रही है। इस संबंध में विभाग के एसआईबी हेड ने बताया कि पहले फार्म-38 जारी होता था। प्रांत बाहर से यूपी में माल लाने के लिए फार्म 38 भरना पड़ता था। उसमें पूरी जानकारी दी जाती थी कि माल बाहर की किस फर्म को भेजा जा रहा है। इस पर एडवांस टैक्स जमा कराया जाता था।

अब इसी फार्म 38 ने ई वे बिल का रूप ले लिया है। उन्होंने बताया कि पंजीकरण पूरी तरब आनलाइन हो गया है। बिना किसी सत्यापन के फर्म का पंजीकरण हो जाता है। पंजीकरण के एक महीने के बाद रिटर्न दाखिल किया जाता है।

जालसाज इसी महीने में हजारों फर्जी ई वे बिल काट देते हैं और करोड़ों की टैक्स चोरी कर गायब हो जाते हैं। बाद में जांच में फर्म किसी मजदूर के नाम पर निकलती है। उन्होंने कहा कि इस पर रोक के लिए इनवर्ड के बिना आउटवर्ड को रोक दिया जाए। यानी बिना खरीद के ही माल बेचने पर रोक लग जाए।

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