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UP Chunav : खत्म होगा प्रशासक राज, नए नेतृत्व को चुनौतियों का ताज, सभी महापौरों को एक दिन शपथ दिलाने की तैयारी

Sun, 14 May 2023 06:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 14 May 2023 06:04 AM IST
सार

जल्द ही निकायों में जहां प्रशासक राज खत्म होगा, वहीं, नव निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सिर पर चुनौतियों का ताज भी सजेगा।

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UP: Administrator's rule will end, challenges to the new leadership
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में नगर निकाय चुनाव का परिणाम आने के बाद अब नगर निकायों में प्रशासक राज के खत्म होने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। जल्द ही निकायों में जहां प्रशासक राज खत्म होगा, वहीं, नव निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सिर पर चुनौतियों का ताज भी सजेगा। वहीं, नगर विकास विभाग अब नवनिर्वाचित महापौर और अध्यक्षों को शपथ दिलाने की तैयारी में जुट गए हैं। विभाग की कोशिश है कि सभी 17 निगमों में महापौर को एक ही दिन शपथ ग्रहण कराया जाए। वहीं, एक माह के अंदर नगर निगम में मिनी सदन और पालिका परिषद व पंचायत बोर्ड की बैठक बुला ली जाए। इसके तहत ही शनिवार को अवकाश होने के बाद भी नगर विकास विभाग खुला था और अधिकारी तैयारियों में जुटे थे ।

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बता दें कि प्रदेश में इस बार 17 नगर निगम में महापौर, 199 नगर पालिका परिषद और 544 नगर पंचायतों में अध्यक्ष के साथ ही 13924 वार्डों के लिए चुनाव हुआ था । अब चूंकि चुनाव का परिणाम आ चुका है, इसलिए नगर विकास विभाग चाहता है कि सभी निकायों का कार्यकाल पांच साल बाद एक ही माह में पूरा हो जाए। इसके लिए सबसे अधिक जरूरी है कि नगर निगमों में सदन और पालिका परिषद व नगर पंचायतों में बोर्ड की बैठक एक माह में करा ली जाए। शासन इसीलिए इसे अनिवार्य करने पर मंथन कर रहा है। शासन चाहता है कि चुनाव परिणाम आने के एक सप्ताह के अंदर शपथ ग्रहण और एक माह के अंदर सदन व बोर्ड की पहली बैठकें हो जाए।
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उधर यह भी माना जा रहा है कि नव निर्वाचित महापौर और अध्यक्षों के सामने कई तरह की चुनौतियां भी होंगी, जिसपर उन्हें खरा उतरना होगा। खास तौर से उन निकायों के अध्यक्षों के सामने बड़ी चुनौती होगी, जिन निकायों का नया गठन हुआ है और पहली बार वहां चुनाव हुए हैं। ऐसे निकायों में शामिल ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को कराने और उसके लिए बजट की व्यवस्था कराना एक बड़ी चुनौती होगी।
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महापौर और अध्यक्षों के सामने होंगी ये प्रमुख चुनौतियां

  • निकायों में शामिल नए क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास कराना
  • सफाई व्यवस्था में सुधार करने के साथ कूड़ा निस्तारण व्यवस्था को प्रभावी बनाना
  • शहरी सुविधा देने के लिए बजट की व्यवस्था और योजनाओं को जमीन पर उतारना
  • नव गठित व विस्तारित निकायों में सीवरेज, सड़क, पार्क विकास की सुविधाएं देना
  • स्मार्ट सिटी से वाले शहरों में विकास कार्यों की धीमी गति को तेज कर समय से पुरा कराना
  • स्वच्छता सर्वेक्षण में निकायों के प्रदर्शन में सुधार करना और उनकी रैकिंग में सुधार करना
  • विभिन्न योजनाओं के तहत कराए जा रहे अधूरे कार्यों को पूरा कराना
  • निकायों में रिक्त पदों पर भर्ती और कर्मचारियों की लंबित मांगों का निस्तारण कराना
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