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यूपी: आईपीएस बनने की अधूरी हसरत के साथ 30 पीपीएस रिटायर, 26 कतार में, पीसीएस की तुलना में सौतेला व्यवहार

Mon, 23 Sep 2024 06:14 AM IST
रोहित मिश्र अशोक मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ
अशोक मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 23 Sep 2024 06:14 AM IST
सार

UP PPS officer: आईपीएस बनने की हसरत लिए 30 पीपीएस अधिकारी रिटायर होने जा रहे हैं। पीसीएस की तुलना में इनके साथ सौतेले व्यवहार की बात सामने आई है। 

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UP: 30 PPS retired with unfulfilled desire to become IPS, 26 in queue, step-motherly treatment compared to PCS
पीपीएस अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वर्ष 1996 बैच के पीसीएस अधिकारी 8 साल पहले आईएएस बन चुके हैं, लेकिन उनके समकक्ष 24 पीपीएस अभी आईपीएस बनने की कतार में लगे हैं। हालिया कुछ वर्षों में 30 पीपीएस अफसर आईपीएस बने बिना रिटायर हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में 26 पीपीएस का आईपीएस बनने का सपना पूरा नहीं होगा। पदोन्नति में उनके साथ होने वाला सौतेला व्यवहार इसकी वजह है।

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पीपीएस के साथ होने वाले इस व्यवहार की बानगी है कि वर्ष 1996 बैच के कुछ अफसरों को आईपीएस काडर में प्रोन्नत करने का प्रस्ताव संघ लोक सेवा आयोग भेजे लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन आज तक विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक होने की नौबत नहीं आई है। इससे पीपीएस अधिकारियों को तनख्वाह में भी नुकसान सहना पड़ रहा है। बता दें कि सालों से पीपीएस अधिकारी अपनी सेवाओं को दुरुस्त करने की फरियाद लगा रहे हैं, लेकिन इसे लगातार अनसुना किया गया। ऐसा नहीं कि इसमें बदलाव का प्रयास नहीं किया गया, पीपीएस काडर रिव्यू को दुरुस्त करने के लिए आईपीएस रेणुका मिश्रा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। हालांकि इसकी संस्तुतियों को आज तक लागू नहीं किया गया। नतीजतन पीपीएस अधिकारी वर्षों से डीजीपी से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाने को मजबूर हैं।
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33 फीसद पद भरे जाते हैं
बता दें कि प्रदेश में आईपीएस काडर के 33 फीसदी पद पीपीएस को प्रदोन्नति देकर भरे जाते हैं। जिन पीपीएस अफसरों की उम्र 56 वर्ष से अधिक हो जाती है, उनके नाम का प्रस्ताव नहीं भेजा जाता है। आईपीएस अफसरों का काडर रिव्यू तो समय पर हो जाता है, लेकिन पीपीएस में लगातार विलंब हो रहा है। वर्ष 2019 में प्रस्तावित काडर रिव्यू तीन वर्ष के विलंब के बाद वर्ष 2022 में हुआ था। नियमत: वर्ष 2024 में फिर काडर रिव्यू होना चाहिए, हालांकि इसके आसार नहीं दिख रहे हैं।
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ये हो चुके हैं रिटायर (1991 से 1997 बैच तक)
देवेंद्र नाथ, अशोक कुमार राय, प्रद्युम्न सिंह, विजयपाल सिंह, अजय प्रताप सिंह, रवींद्र कुमार सिंह, ओमप्रकाश पांडेय, जियालाल यादव, रामभवन, हरदयाल सिंह, वीरेंद्र कुमार यादव, हबीबुल हसन, लल्लन प्रसाद, मनोज कुमार, सुखवीर सिंह, राजपाल, अरुण कुमार, अखिलेश्वर पांडेय, राममूरत यादव, अमर सिंह, मंशाराम गौतम, सतीश चंद्र, रामयश सिंह, रामनयन, संसार सिंह, सुखराम भारती, सुरेंद्र प्रसाद द्विवेदी, राममोहन सिंह, अजय कुमार सिंह, महेंद्र प्रताप चौहान।

आईपीएस बने बगैर हो जाएंगे रिटायर
डॉ. मनोज कुमार, धर्मेंद्र सचान, शंभूशरण यादव, पुत्तू राम, सतीश चंद्र, त्रिभुवन राम त्रिपाठी, अरविंद कुमार पांडेय, दिगंबर कुशवाहा, मोहम्मद इरफान अंसारी, अजय प्रताप, नैपाल सिंह, प्रेमचंद्र, सुभाष चंद्र गंगवार, बलरामचारी दुबे, अखिलेश नारायन सिंह, अशोक कुमार वर्मा, अशोक कुमार, डॉ. संजय कुमार, महेंद्र कुमार, राजेश कुमार सोनकर, अजय कुमार सिंह, अशोक कुमार सिंह, रमेश कुमार भारतीय, सत्यपाल सिंह, शिष्य पाल, रफीक अहमद।


इस तरह समझें पदों का गणित 
- 1364 पीपीएस अफसरों के पद हैं स्वीकृत
- 1013 पीपीएस अफसर वर्तमान में हैं कार्यरत
- 334 पीपीएस के पद चल रहे हैं रिक्त
- 26 पीपीएस आईपीएस बने बगैर हो जाएंगे रिटायर

नहीं बुलाई गई बैठक
पीपीएस काडर के साथ न्याय नहीं हो रहा है। मेरी पदोन्नति का आदेश होने के बावजूद बैठक नहीं बुलाई गई। जिसके बाद 31 जनवरी, 2024 को सेवानिवृत्त हो गया। इसी तरह तमाम अफसर अपनी वर्षों की सेवा के बावजूद आईपीएस अफसर नहीं बन पा रहे हैं।- सुखराम भारतीय, (1995 बैच के सेवानिवृत्त पीपीएस अधिकारी एवं पीपीएस एसोसिएशन के पूर्व सदस्य)

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