यूपी: साइबर ठगी की रकम रोकने में लापरवाही दिखा रहे 14 बैंक, संयुक्त समीक्षा रिपोर्ट में हुआ खुलासा
सीएफएमसी में बैंक प्रतिनिधि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिकायत मिलते ही वे संदिग्ध खाते की जांच करते हैं। ठगी की रकम पर तत्काल रोक या 'लियन' लगाना उनकी जिम्मेदारी है। रकम दूसरे खाते में जाने से पहले उसे फ्रीज करना भी उनका कार्य है।
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उत्तर प्रदेश के साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (सीएफएमसी) की व्यवस्था बैंकों की लापरवाही से प्रभावित हो रही है। प्रदेश के बैंकों की संयुक्त समीक्षा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 14 बैंकों ने सीएफएमसी में तैनात अपने प्रतिनिधियों को कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) का एक्सेस नहीं दिया है।
इसके साथ ही, छह बैंकों ने प्रतिनिधियों को लैपटॉप तक उपलब्ध नहीं कराया है। इस कारण साइबर ठगी के मामलों में खातों की तत्काल जांच और रकम रोकने की कार्रवाई प्रभावित हो रही है। साइबर क्राइम महानिदेशक ने 5 अगस्त 2026 को बैंकों को सीबीएस एक्सेस और जरूरी आईटी संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, आईडीबीआई बैंक, यस बैंक, बंधन बैंक और उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक ने सीबीएस एक्सेस नहीं दिया।
वहीं, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, आईडीबीआई बैंक और बंधन बैंक ने लैपटॉप नहीं दिए। उत्तर प्रदेश में सीएफएमसी और 1930 हेल्पलाइन के नए केंद्र की शुरुआत 1 जून 2026 को हुई थी। ठग कुछ ही मिनटों में रकम कई खातों में घुमा देते हैं, इसलिए तत्काल बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच अहम है।
बैंक प्रतिनिधि की भूमिका: सीएफएमसी में बैंक प्रतिनिधि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिकायत मिलते ही वे संदिग्ध खाते की जांच करते हैं। ठगी की रकम पर तत्काल रोक या 'लियन' लगाना उनकी जिम्मेदारी है। रकम दूसरे खाते में जाने से पहले उसे फ्रीज करना भी उनका कार्य है। वे संदिग्ध लेनदेन की वास्तविक समय में जांच करते हैं और पुलिस तथा बैंक के बीच तत्काल समन्वय स्थापित करते हैं।
सीएफएमसी का उद्देश्य
- सीएफएमसी का मुख्य उद्देश्य शिकायत मिलते ही ठगी की रकम पर तत्काल रोक लगाना है। यह पुलिस, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करता है।
- इसका लक्ष्य ठगी की रकम पर 'लियन' लगाकर उसे फ्रीज करना है। देश में जून 2026 तक नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली के जरिये 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बचाई जा चुकी है।
- अप्रैल 2026 से पीड़ितों को रकम जल्द लौटाने के लिए मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल भी शुरू किया गया है।