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खनन विभाग को 200 करोड़ का चूना लगाने वाले दो गिरफ्तार
Thu, 24 Sep 2020 10:24 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 24 Sep 2020 10:24 PM IST
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मौरंग खनन
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साइबर क्राइम थाना की टीम ने फर्जी ई-रवन्ना बनाकर खनन विभाग को 200 करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले अयोध्या नगर कोतवाली के अकब बजाजा निवासी शिवांशु रस्तोगी और प्रयागराज के घूरपुर मनकवार के जीवनलाल सिंह उर्फ बबलू सिंह को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया। साइबर क्राइम के एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि खनन विभाग के खनन अधिकारी सुभाष रंजन ने साइबर थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी। छानबीन में खुलासा हुआ कि शातिर खनन विभाग से मिलते-जुलते नाम की वेबसाइट बनाकर ई-रवन्ना तैयार करते थे। इस मामले में अखिलेश प्रताप सिंह और सचिन सिंह को पहले गिरफ़्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि सुधांशु और जीवनलाल सिंह ठगी के इस बड़े नेटवर्क का एक हिस्सा मात्र हैं। सुधांशु फर्जी ई-रवन्ना के क्यूआर कोड स्कैन करने का काम करता था जबकि जीवनलाल सिंह के बैंक खाते में रुपयों का आदान-प्रदान होता था। उसके खाते की पड़ताल की गई तो कुछ ही दिन में 25 लाख रुपये जमा होने की जानकारी मिली। फिलहाल, उसका खाता सीज करा दिया गया है। एसपी के मुताबिक, फर्जी वेबसाइट बनाकर ई-रवन्ना जारी करने वाले गिरोह की जड़ें काफी गहरी हैं। इसमें खनन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हैं। अभी साइबर क्राइम थाना की टीम फर्जी वेबसाइट बनाने वाले के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है। जल्द इस फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड समेत कई बड़े लोगों की गिरफ्तारी की जाएगी। एसपी ने बताया कि इस मामले में हजरतगंज स्थित खनिज भवन में तैनात खनन अधिकारी सुभाष रंजन ने साइबर क्राइम थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी। पकड़े गए लोगों के पास से फर्जी वेबसाइट लॉगइन करने के लिए इस्तेमाल मोबाइल फोन और एक बैंक की पासबुक बरामद हुई है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में निरीक्षक अजीत कुमार यादव, आरक्षी धनीश यादव, शिवम यादव और विवेक सिंह शामिल थे।
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एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि सुधांशु और जीवनलाल सिंह ठगी के इस बड़े नेटवर्क का एक हिस्सा मात्र हैं। सुधांशु फर्जी ई-रवन्ना के क्यूआर कोड स्कैन करने का काम करता था जबकि जीवनलाल सिंह के बैंक खाते में रुपयों का आदान-प्रदान होता था। उसके खाते की पड़ताल की गई तो कुछ ही दिन में 25 लाख रुपये जमा होने की जानकारी मिली। फिलहाल, उसका खाता सीज करा दिया गया है। एसपी के मुताबिक, फर्जी वेबसाइट बनाकर ई-रवन्ना जारी करने वाले गिरोह की जड़ें काफी गहरी हैं। इसमें खनन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हैं। अभी साइबर क्राइम थाना की टीम फर्जी वेबसाइट बनाने वाले के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है। जल्द इस फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड समेत कई बड़े लोगों की गिरफ्तारी की जाएगी। एसपी ने बताया कि इस मामले में हजरतगंज स्थित खनिज भवन में तैनात खनन अधिकारी सुभाष रंजन ने साइबर क्राइम थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी। पकड़े गए लोगों के पास से फर्जी वेबसाइट लॉगइन करने के लिए इस्तेमाल मोबाइल फोन और एक बैंक की पासबुक बरामद हुई है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में निरीक्षक अजीत कुमार यादव, आरक्षी धनीश यादव, शिवम यादव और विवेक सिंह शामिल थे।
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फर्जी ई-रवन्ना से रोज हजारों ट्रक ला रहे बालू, मौरंग और गिट्टी
खनन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फर्जी ई-रवन्ना बनाकर रोज विभिन्न रूट पर हजारों ट्रकों से अवैध तरीके से बालू, मौरंग व गिट्टी की निकासी की जा रही है। इससे सरकार को 200 करोड़ रुपये राजस्व की हानि हो चुकी है।
प्रयागराज रूट से सामने आया था फर्जी रवन्ना का खेल
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फर्जी रवन्ना का खेल पूरे प्रदेश में चल रहा है लेकिन इसका खुलासा प्रयागराज रूट पर हुआ। खनन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पूर्व में पकड़े गए अभिषेक प्रताप सिंह और सचिन सिंह ट्रक मालिक हैं। इन लोगों के पास से फर्जी रवन्ना मिला था। खनन विभाग की टीम ने रवन्ना की जांच की तो दोनों ने क्यूआर कोड दिखाया। कोड स्कैन करने पर रवन्ना का नंबर सही पाया गया लेकिन उसमें चालक और वाहन नंबर गलत थे। छानबीन की गई तो पता चला कि रवन्ना फर्जी है। इसके बाद खनन विभाग की तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई।
प्रयागराज रूट से सामने आया था फर्जी रवन्ना का खेल
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फर्जी रवन्ना का खेल पूरे प्रदेश में चल रहा है लेकिन इसका खुलासा प्रयागराज रूट पर हुआ। खनन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पूर्व में पकड़े गए अभिषेक प्रताप सिंह और सचिन सिंह ट्रक मालिक हैं। इन लोगों के पास से फर्जी रवन्ना मिला था। खनन विभाग की टीम ने रवन्ना की जांच की तो दोनों ने क्यूआर कोड दिखाया। कोड स्कैन करने पर रवन्ना का नंबर सही पाया गया लेकिन उसमें चालक और वाहन नंबर गलत थे। छानबीन की गई तो पता चला कि रवन्ना फर्जी है। इसके बाद खनन विभाग की तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई।