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देश की सुरक्षा व राजस्व में सेंध लगाने वाले दो गिरफ्तार, चला रहे थे अवैध टेलीफोन एक्सचेंज
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लखनऊ। विकासनगर इलाके में अवैध रूप से टेलीफोन एक्सचेंज चलाकर देश की सुरक्षा और राजस्व में सेंध लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश एटीएस व कमिश्नरेट पुलिस ने किया है। इस गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से पुलिस ने भारी मात्रा में अवैध एक्सचेंज चलाने के उपकरण व सिम बरामद किए हैं। दोनों आरोपी खाड़ी देशों व अन्य विदेशी कॉल को लोकल में बदलकर लाखों रुपये हड़प चुके हैं। पुलिस इस गिरोह के सरगना की तलाश में जुटी है।
एटीएस के एडीजी नवीन अरोरा के मुताबिक, विकासनगर इलाके में अवैध रुप से टेलीफोन एक्सचेंज संचालित होने की पुष्टि होने के बाद कमिश्नरेट पुलिस से संपर्क कर संयुक्त रुप से ऑपरेशन चलाया गया। विकासनगर इलाके से दो आरोपियों मदेयगंज राम बगिया निवासी मो. जाबिर उर्फ जैद और अलीनगर खदरा, मदेयगंज का अब्दुल शहनवाज उर्फ समीर शामिल को पकड़ा गया है। प्रभारी निरीक्षक विकासनगर तेज बहादुर सिंह के मुताबिक, आरोपियों के पास से टीम ने विदेशी मुद्रा 22 रियाल, तीन सिम बॉक्स, तीन राउटर सिम के साथ 186 सिमकार्ड, छह मोबाइल, एक टैबलेट, एक इन्वर्टर बैटरी के साथ, दो बाइक, 5145 रुपये नकदी, एटीएम, पैनकार्ड, डीएल व पहचान पत्र मिला है।
मुुंबई में बैठा सरगना करता है टीम को मॉनिटर
एटीएस अधिकारी के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने पूछताछ में कुबूल किया कि उनके कुछ साथी मुंबई में हैं जो उनको टीम व्यूअर के जरिये तकनीकी सहयोग देते हैं। उनके द्वारा संचालित अवैध टेलीफोन एक्सचेंज की जांच डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन की टीम ने की। टीम के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय कॉल को सिम बॉक्स व राउटर के जरिये लोकल कॉल में रूट कराते हैं। आरोपियों ने बताया कि सिम बॉक्स को अपनी मर्जी के आईपी पर कनफिगर कर देश-विदेश से की जाने वाली कॉल को इंटरनेशनल टेलीकॉम गेटवे को बाईपास किया जाता है। फिर अंजान सर्वर के जरिये वीओआईपी कॉल को रुट कराकर लोकल में बदला जाता है। फिर इसी कॉल को संबंधित ग्राहक को ट्रांसफर कर देते हैं। इस प्रक्रिया में कॉल करने के लिए एक एप का प्रयोग किया जाता है जिससे इंटरनेशनल टेलीकॉम गेटवे बाईपास हो जाने से कॉल करने वाले का नंबर व पहचान नहीं हो पाती है। पकड़े गए आरोपियों ने कुबूल किया कि उनका सरगना मुंबई में है। वही उनको सारी तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराता है। एटीएस की टीम उसके बारे में जानकारी जुटा रही है।
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कई वीआईपी को दी गई थी धमकी
एटीएस अधिकारी के मुताबिक, इसी तरह के वीओआईपी कॉल के जरिए कुछ वीआईपी को धमकी दी गई थी। इसका इनपुट हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने दिया था। बताया गया कि कुछ वीआईपी को कॉल कर धमकी दी गई। जब इन धमकियों के कॉल करने वालों के बारे में जानकारी मिली तो लखनऊ में उनकी लोकेशन मिली। इसी आधार पर डीजीपी उत्तर प्रदेश ने एटीएस को जांच सौंपी थी।
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एटीएस के एडीजी नवीन अरोरा के मुताबिक, विकासनगर इलाके में अवैध रुप से टेलीफोन एक्सचेंज संचालित होने की पुष्टि होने के बाद कमिश्नरेट पुलिस से संपर्क कर संयुक्त रुप से ऑपरेशन चलाया गया। विकासनगर इलाके से दो आरोपियों मदेयगंज राम बगिया निवासी मो. जाबिर उर्फ जैद और अलीनगर खदरा, मदेयगंज का अब्दुल शहनवाज उर्फ समीर शामिल को पकड़ा गया है। प्रभारी निरीक्षक विकासनगर तेज बहादुर सिंह के मुताबिक, आरोपियों के पास से टीम ने विदेशी मुद्रा 22 रियाल, तीन सिम बॉक्स, तीन राउटर सिम के साथ 186 सिमकार्ड, छह मोबाइल, एक टैबलेट, एक इन्वर्टर बैटरी के साथ, दो बाइक, 5145 रुपये नकदी, एटीएम, पैनकार्ड, डीएल व पहचान पत्र मिला है।
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मुुंबई में बैठा सरगना करता है टीम को मॉनिटर
एटीएस अधिकारी के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने पूछताछ में कुबूल किया कि उनके कुछ साथी मुंबई में हैं जो उनको टीम व्यूअर के जरिये तकनीकी सहयोग देते हैं। उनके द्वारा संचालित अवैध टेलीफोन एक्सचेंज की जांच डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन की टीम ने की। टीम के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय कॉल को सिम बॉक्स व राउटर के जरिये लोकल कॉल में रूट कराते हैं। आरोपियों ने बताया कि सिम बॉक्स को अपनी मर्जी के आईपी पर कनफिगर कर देश-विदेश से की जाने वाली कॉल को इंटरनेशनल टेलीकॉम गेटवे को बाईपास किया जाता है। फिर अंजान सर्वर के जरिये वीओआईपी कॉल को रुट कराकर लोकल में बदला जाता है। फिर इसी कॉल को संबंधित ग्राहक को ट्रांसफर कर देते हैं। इस प्रक्रिया में कॉल करने के लिए एक एप का प्रयोग किया जाता है जिससे इंटरनेशनल टेलीकॉम गेटवे बाईपास हो जाने से कॉल करने वाले का नंबर व पहचान नहीं हो पाती है। पकड़े गए आरोपियों ने कुबूल किया कि उनका सरगना मुंबई में है। वही उनको सारी तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराता है। एटीएस की टीम उसके बारे में जानकारी जुटा रही है।
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कई वीआईपी को दी गई थी धमकी
एटीएस अधिकारी के मुताबिक, इसी तरह के वीओआईपी कॉल के जरिए कुछ वीआईपी को धमकी दी गई थी। इसका इनपुट हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने दिया था। बताया गया कि कुछ वीआईपी को कॉल कर धमकी दी गई। जब इन धमकियों के कॉल करने वालों के बारे में जानकारी मिली तो लखनऊ में उनकी लोकेशन मिली। इसी आधार पर डीजीपी उत्तर प्रदेश ने एटीएस को जांच सौंपी थी।