वीडियो फुटेज से सामने आया बनारस की घटना का असली सच?
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5 अक्टूबर को वाराणसी में जनता और पुलिस के बीच हुए संघर्ष की असली वजह वीडियो में सामने आई है। जानिए इससे क्या राज निकले। संतों की अन्याय प्रतिकार यात्रा के दौरान सोमवार को गोदौलिया पर हुए बवाल की जांच पुलिस ने शुरू कर दी है।
वीडियो फुटेज से पता चला है कि भीड़ में सबसे आगे लाल झंडी लेकर चल रहे करीब 50 युवकों ने माहौल बिगाड़ा। उन्होंने ही सबसे पहले पुलिस पर पथराव शुरू किया।
कांग्रेस नेताओं और संतों ने भी पुलिस और भीड़ को उकसाया। पथराव के बाद भगदड़ मच गई। इससे कुछ ही देर में भीड़ बेकाबू हो गई। लोगों ने अपने घरों में ईंट, दूकानों के सामने लगी पटिया के टुकड़े उखाड़कर पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।
पुलिस का कहना है कि लाल झंडी लेकर चलने वाले युवक हिंदू युवा वाहिनी के थे। गोदौलिया पर रहने वाले लोगों का साफ कहना है कि घटना के लिए वे कतई जिम्मेदार नहीं हैं।
जानिए क्या हुआ था घटना में
गोदौलिया चौराहे पर 22 सितंबर की रात संतों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार को अन्याय प्रतिकार यात्रा का आह्वान किया था। शाम करीब चार बजे यात्रा टाउनहाल से दशाश्वमेध के लिए निकली थी।
यात्रा में 50 से ज्यादा युवक लाल झंडी लेकर आगे चल रहे थे। पुलिस की जांच में आया है कि यात्रा के गोदौलिया चौराहे के करीब पहुंचते ही झंडी लेकर चल रहे लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। साथ ही, भीड़ में अफवाह फैला दी कि पुलिस लाठी लेकर उन्हें दौड़ा रही है। भगदड़ के बाद लोग जहां-तहां भागने लगे।
राहगीरों ने जान बचाने के लिए दूकानों और घरों में शरण ली। उपद्रवियों के भड़काने पर ही लोगों ने पुलिस पर पथराव और आगजनी की।
इंस्पेक्टर दशाश्वमेध अजय सिंह का कहना है कि भीड़ में आगे चल रहे हिंदू युवा वाहिनी के लोगों ने ही भीड़ को उकसाया और पथराव किया। कांग्रेस नेता और संत भी भीड़ को उकसाने में लगे थे। कुछ लोगों को चिह्नित कर लिया गया है। जांच के बाद औरों को भी चिह्नित किया जाएगा।