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Lucknow News: मुख्यमंत्री की प्राथमिकता की अनदेखी, सड़क सुरक्षा हाशिए पर, वाहनों की जांच को नहीं बचे अफसर

Mon, 01 Jun 2026 09:14 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 09:14 PM IST
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transport transfer
तीनों पीटीओ ट्रांसफर, वाहनों की चेकिंग के लिए नहीं बचे अफसर
तीनों पीटीओ ट्रांसफर, एआरटीओ के भरोसे चेकिंग अभियान
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अंतिम समय में हुए ट्रांसफरों पर उठने लगे सवाल

बाबुओं का सिंडिकेट रहा हावी, वर्षाें से डटे हैं


माई सिटी रिपोर्टर

लखनऊ। परिवहन विभाग में अंतिम समय में हुए स्थानांतरणों पर सवाल उठने लगे हैं। राजधानी में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पर, चेकिंग के लिए अफसर ही नहीं हैं। तीन यात्री कर अधिकारियों का ट्रांसफर हो गया है। इटावा से एक यात्री कर अधिकारी लखनऊ ट्रांसफर किए गए, लेकिन बाद में आदेश वापस ले लिया गया।
स्थिति यह है कि सड़क सुरक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में शामिल है। पर, लखनऊ में वाहनों की जांच के लिए अफसर ही नहीं बचे हैं। लखनऊ में तैनात तीन यात्री कर अधिकारियों पीटीओ आभा त्रिपाठी को आगरा, एसपी देव को हमीरपुर और अनीता वर्मा को चंदौली भेज दिया गया है। इटावा में तैनात विवेक सिंह को लखनऊ का पीटीओ बनाया गया था, लेकिन एक दिन बाद ही वह अपना ट्रांसफर रुकवाने में कामयाब रहे। लखनऊ में लगातार हादसे बढ़ रहे हैं। लेकिन सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग में संजीदगी देखने को नहीं मिल रही है। ऐसे में चेकिंग अभियान की पूरी जिम्मेदारी अब सिर्फ एआरटीओ प्रवर्तन आलोक यादव पर ही रहेगी। जबकि लखनऊ में वाहनों के अनुपात में पहले से ही पद कम हैं। यहां पर तीन एआरटीओ के पद हैं, लेकिन लंबे समय से सिर्फ एक ही पद भरा जा सका है। वहीं पीटीओ की सख्त जरूरत थी, लेकिन अब सारे पद खाली हो गए हैं।
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बाबुओं का सिंडिकेट हावी, पांच बाबू और बढ़े
ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ में वर्तमान में करीब 30 से अधिक बाबू पटल पर काम रहे हैं। नई ट्रांसफर पॉलिसी में पांच और बाबुओं को अन्य जगहों से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया गया है। लेकिन लखनऊ से सिर्फ एक महिला बाबू का ही ट्रांसफर हुआ है। बाबुओं का सिंडिकेट ऐसा है कि कई बाबू वर्षों से डटे हैं, लेकिन उनके आगे सिस्टम भी नतमस्तक है। 'सिस्टम' की चाबी इन्हीं बाबुओं के पास है, इसलिए सिस्टम झुका रहता है।
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यूनियन ने पूरा किया वादा, बाबू गदगद
ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ में गत वर्ष चुनाव हुआ था, जिसमें बाबुओं का ट्रांसफर नहीं होने देने का हवाला देकर कई पदाधिकारियों ने जीत हासिल की थी। ट्रांसफर सीजन में यूनियन पदाधिकारियों का वादा सही साबित हुआ। बाबुओं को ट्रांसफर से बचाने में यूनियन सफल सिद्ध हुई। सूत्रों ने बताया कि इसे लेकर यूनियन फूली नहीं समा रही है।


दो थे, एक और बढ़ गए एमवीआई
लखनऊ में दो मोटर वीकल इंस्पेक्टर एमवीआई विष्णु कुमार व प्रशांत कुमार पहले से तैनात हैं। ऐसे में मथुरा में तैनात एमवीआई प्रदीप यादव का भी उनके एक खास अधिकारी ने लखनऊ ट्रांसफर करवा लिया है। लिहाजा लखनऊ में तीन एमवीआई हो गए हैं। इसके पहले एमवीआई सुशील कुमार लखनऊ में थे, जो प्रमोट होकर बहराइच के एआरटीओ बन चुके हैं।
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