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Lucknow News: तुर्किये के कपड़ों पर स्वदेशी मुहर लगाकर बेच रहे व्यापारी
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लखनऊ। भारत पर हमले के लिए पाकिस्तान को ड्रोन मुहैया कराने वाले तुर्किये और चीन का कपड़ा कारोबार देश में काफी फल-फूल रहा है। इससे देश को कमजोर करने वाले तुर्किये और चीन को बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है। भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद जब देश में इन देशों के कपड़ों का बहिष्कार शुरू हुआ तो मुंबई में बैठे बड़े कपड़ा व्यापारी इन कपड़ों पर स्वदेश की मुहर लगाकर बेचना शुरू कर दिया है।
हजरतगंज, अमीनाबाद, आलमबाग, आशियाना, तेलीबाग, चौक और गोमतीनगर जैसे शहर के बड़े बाजारों में ये कपड़े खूब बिक रहे हैं। इससे लखनऊ के व्यापारी तुर्किये के कपड़ों से सालाना दो हजार करोड़ रुपये की मोटी कमाई कर रहे हैं। खास बात ये है ग्राहक को इस बात का पता ही नहीं चलता कि ये कपड़े तुर्किये और चीन के हैं।
ऐसे देते हैं ग्राहकों को झांसा
बड़े होलसेलर तुर्किये और चीन से भारी मात्रा में कपड़े मंगाते हैं। कपड़े आने पर ये होलसेलर विदेशी कपड़ों को देश की किसी ब्रांड की मुहर लगाकर रिटेलर को बेचते हैं। ऐसे में रिटेलर भी इस बात से अंजान रहता है और तुर्किये और चीन के कपड़ों को स्वदेशी समझकर खरीद लेता है। गुणवत्ता अच्छी होने के कारण ग्राहक इसे महंगे दामों में भी खरीदते हैं।
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तुर्किये के कपड़ों की कीमत
व्यापारी किशन चंद बम्बानी व अशोक मोतियानी ने बताया कि बाजार में तुर्किये के पैंट के सूटलेंथ की कीमत 1000 से 5000 रुपये प्रति मीटर तक है। कॉटन शर्ट 500 से 1000 रुपये प्रति मीटर तक है। पुरुषों के रेडीमेड शादी सूट 10,000 से 50,000 रुपये तक बाजार में बिकते हैं। कई बड़ी कंपनियां तुर्किये से धागा मंगाकर कपड़े बनाती हैं।
कैंसिल करा दिए ऑर्डर
आलमबाग के व्यापारी अशोक मंगलानी ने कहा कि तुर्किये ने दुश्मन देश पाकिस्तान के
आतंकवादियों की मदद की है। यही तुर्किये भारत में कपड़ा बेचता है जिससे उसका राजस्व बढ़ता है। मगर, अब तुर्किये
के कपड़े का बहिष्कार करते हुए होलसेलर को बोलकर ऑर्डर कैंसिल कर दिए हैं।
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हजरतगंज, अमीनाबाद, आलमबाग, आशियाना, तेलीबाग, चौक और गोमतीनगर जैसे शहर के बड़े बाजारों में ये कपड़े खूब बिक रहे हैं। इससे लखनऊ के व्यापारी तुर्किये के कपड़ों से सालाना दो हजार करोड़ रुपये की मोटी कमाई कर रहे हैं। खास बात ये है ग्राहक को इस बात का पता ही नहीं चलता कि ये कपड़े तुर्किये और चीन के हैं।
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ऐसे देते हैं ग्राहकों को झांसा
बड़े होलसेलर तुर्किये और चीन से भारी मात्रा में कपड़े मंगाते हैं। कपड़े आने पर ये होलसेलर विदेशी कपड़ों को देश की किसी ब्रांड की मुहर लगाकर रिटेलर को बेचते हैं। ऐसे में रिटेलर भी इस बात से अंजान रहता है और तुर्किये और चीन के कपड़ों को स्वदेशी समझकर खरीद लेता है। गुणवत्ता अच्छी होने के कारण ग्राहक इसे महंगे दामों में भी खरीदते हैं।
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तुर्किये के कपड़ों की कीमत
व्यापारी किशन चंद बम्बानी व अशोक मोतियानी ने बताया कि बाजार में तुर्किये के पैंट के सूटलेंथ की कीमत 1000 से 5000 रुपये प्रति मीटर तक है। कॉटन शर्ट 500 से 1000 रुपये प्रति मीटर तक है। पुरुषों के रेडीमेड शादी सूट 10,000 से 50,000 रुपये तक बाजार में बिकते हैं। कई बड़ी कंपनियां तुर्किये से धागा मंगाकर कपड़े बनाती हैं।
कैंसिल करा दिए ऑर्डर
आलमबाग के व्यापारी अशोक मंगलानी ने कहा कि तुर्किये ने दुश्मन देश पाकिस्तान के
आतंकवादियों की मदद की है। यही तुर्किये भारत में कपड़ा बेचता है जिससे उसका राजस्व बढ़ता है। मगर, अब तुर्किये
के कपड़े का बहिष्कार करते हुए होलसेलर को बोलकर ऑर्डर कैंसिल कर दिए हैं।