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Lucknow News: एसजीपीजीआई गेट से महिला मरीज को निजी अस्पताल ले गए दलाल, मौत
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लखनऊ। एसजीपीजीआई गेट से निजी अस्पताल ले जाई गई असाध्य रोग से पीड़ित महिला की इलाज के कुछ घंटे बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि दलाल ने कम खर्च में बेहतर इलाज का झांसा दिया था। माैत के बाद भी अस्पताल ने उसे वेंटिलेटर पर रखा और शव देने के लिए पुलिस में शिकायत न करने का दबाव बनाया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों ने अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है।
बिहार के मोतिहारी चंपारण निवासी मंगल राम की पत्नी रीता देवी (41) असाध्य रोग से पीड़ित थीं। उनका करीब दो साल से एसजीपीजीआई में इलाज चल रहा था। सोमवार को तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें एसजीपीजीआई इमरजेंसी लेकर पहुंचे। पति मंगल राम का आरोप है कि काफी देर इंतजार के बाद भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया। हालत बिगड़ती देख परिजन उन्हें लोहिया संस्थान ले जाने लगे।
इस दाैरान एसजीपीजीआई गेट के पास कुछ लोगों ने उन्हें बेहतर इलाज और कम खर्च का भरोसा दिया। उनके कहने पर रीता को सोमवार शाम करीब चार बजे नव बालाजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहां पहले पांच हजार रुपये जमा कराए गए। कुछ देर बाद हालत बिगड़ने पर अस्पताल की ओर से नौ हजार रुपये के तीन इंजेक्शन लगाने की बात कही गई। इसके बाद रीता को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। रात करीब 12:30 बजे रीता की मौत हो गई। पति का आरोप है कि मौत के बाद भी अस्पताल वालों ने शव को वेंटिलेटर पर रखा। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाकर अस्पताल में हंगामा किया।
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शव बिहार पहुंचाने का दिया भरोसा
मंगल राम का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने शव सौंपने के बदले पुलिस में शिकायत न करने और शव बिहार तक पहुंचाने की बात कही।
वर्जन
पुलिस के जरिये से पत्र मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में लापरवाही के आरोप सही मिले तो रिपोर्ट दर्ज कराने की संस्तुति की जाएगी। -डाॅ. एनबी सिंह, सीएमओ
तीमारदारों के आरोप बेबुनियाद हैं। परिजनों से पुलिस में शिकायत की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई थी। -नव बालाजी हॉस्पिटल, मैनेजर शैलेंद्र
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बिहार के मोतिहारी चंपारण निवासी मंगल राम की पत्नी रीता देवी (41) असाध्य रोग से पीड़ित थीं। उनका करीब दो साल से एसजीपीजीआई में इलाज चल रहा था। सोमवार को तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें एसजीपीजीआई इमरजेंसी लेकर पहुंचे। पति मंगल राम का आरोप है कि काफी देर इंतजार के बाद भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया। हालत बिगड़ती देख परिजन उन्हें लोहिया संस्थान ले जाने लगे।
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इस दाैरान एसजीपीजीआई गेट के पास कुछ लोगों ने उन्हें बेहतर इलाज और कम खर्च का भरोसा दिया। उनके कहने पर रीता को सोमवार शाम करीब चार बजे नव बालाजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहां पहले पांच हजार रुपये जमा कराए गए। कुछ देर बाद हालत बिगड़ने पर अस्पताल की ओर से नौ हजार रुपये के तीन इंजेक्शन लगाने की बात कही गई। इसके बाद रीता को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। रात करीब 12:30 बजे रीता की मौत हो गई। पति का आरोप है कि मौत के बाद भी अस्पताल वालों ने शव को वेंटिलेटर पर रखा। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाकर अस्पताल में हंगामा किया।
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शव बिहार पहुंचाने का दिया भरोसा
मंगल राम का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने शव सौंपने के बदले पुलिस में शिकायत न करने और शव बिहार तक पहुंचाने की बात कही।
वर्जन
पुलिस के जरिये से पत्र मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में लापरवाही के आरोप सही मिले तो रिपोर्ट दर्ज कराने की संस्तुति की जाएगी। -डाॅ. एनबी सिंह, सीएमओ
तीमारदारों के आरोप बेबुनियाद हैं। परिजनों से पुलिस में शिकायत की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई थी। -नव बालाजी हॉस्पिटल, मैनेजर शैलेंद्र