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सही समय पर जांच से दे सकते हैं कैंसर को मात : डॉ. निशा सिंह
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अपराजिता कार्यक्रम में शामिल चिकित्सक व महिलाएं।
लखनऊ। कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी अब आम होती जा रही है। इससे सबसे अधिक महिलाओं की जान जाती है। ऐसे में सही समय पर जांच करानी बहुत जरूरी होती है। बिना लक्षण दिखे भी कैंसर की जांच करते रहना चाहिए। समय पर जांच से ही सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर को मात दिया जा सकता है। ये बातें शनिवार को केजीएमयू के स्त्री कैंसर रोग विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. निशा सिंह ने कहीं। वह अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए जागरूक कर रही थीं। इस अवसर पर 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की मुफ्त एचपीवी जांच की गई।
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रूबी गुप्ता और डॉ. तारिणी ने भी कैंसर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। कहा कि माहवारी के अलावा असमय रक्तस्राव होना, पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहना या अत्यधिक सफेद पानी आना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इसलिए जरूरी हैं एचपीवी परीक्षण
यह सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार ह्यूमन पैपिलोमावायरस के उच्च जोखिम वाले प्रकारों का पता लगाता है। इससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर ऐसी बीमारी है, जिसका अगर शुरुआती स्टेज में पता चल जाए, तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। ऐसे में 30-65 वर्ष की महिलाओं को हर 5 साल में यह जांच करानी चाहिए।
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स्तन कैंसर का स्वपरीक्षण भी सिखाया
विशेषज्ञों ने स्तन कैंसर का स्वपरीक्षण भी सिखाया। बताया कि शीशे के सामने बिल्कुल सीधे खड़े होकर हाथों को बगल में लटकाएं और फिर हाथों को सिर के पीछे बांध लें। दोनों स्तनों के आकार, रंग और गोलाई में किसी भी प्रकार का बदलाव देखें, तो डॉक्टर से मिलें। इसी तरह अन्य परीक्षण विधियां की सिखाई गईं।
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असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रूबी गुप्ता और डॉ. तारिणी ने भी कैंसर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। कहा कि माहवारी के अलावा असमय रक्तस्राव होना, पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहना या अत्यधिक सफेद पानी आना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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इसलिए जरूरी हैं एचपीवी परीक्षण
यह सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार ह्यूमन पैपिलोमावायरस के उच्च जोखिम वाले प्रकारों का पता लगाता है। इससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर ऐसी बीमारी है, जिसका अगर शुरुआती स्टेज में पता चल जाए, तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। ऐसे में 30-65 वर्ष की महिलाओं को हर 5 साल में यह जांच करानी चाहिए।
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स्तन कैंसर का स्वपरीक्षण भी सिखाया
विशेषज्ञों ने स्तन कैंसर का स्वपरीक्षण भी सिखाया। बताया कि शीशे के सामने बिल्कुल सीधे खड़े होकर हाथों को बगल में लटकाएं और फिर हाथों को सिर के पीछे बांध लें। दोनों स्तनों के आकार, रंग और गोलाई में किसी भी प्रकार का बदलाव देखें, तो डॉक्टर से मिलें। इसी तरह अन्य परीक्षण विधियां की सिखाई गईं।

अपराजिता कार्यक्रम में शामिल चिकित्सक व महिलाएं।

अपराजिता कार्यक्रम में शामिल चिकित्सक व महिलाएं।

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