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वह नहीं रही पर याद रहेगा उसका जाबांज किस्सा
ज्ञान सक्सेना/अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Updated Wed, 15 Jan 2014 10:08 AM IST
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एक बेटी की बहादुरी ने पूरे देश में लखनऊ का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया है। आज उसकी बहादुरी के किस्से मृत्यु के बाद भी पूरी राजधानी में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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माल ब्लाक के गांव टिकरीकला बदईया में एक गरीब परिवार की दस साल की मौसमी ने अपनी सहेली को डूबने से बचाने की कोशिश में खुद की जान गंवा दी थी।
इस मासूम की वीरता को सलाम करते हुए मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए उसे चुना गया है। 27 जनवरी को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी वीरता की मिसाल बनी मौसमी के भाई को सम्मान प्रदान करेंगे।
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गांव के एक भूमिहीन मजदूर की बिटिया को देश के इस प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने की जानकारी के बाद से पूरे टिकरीकला गांव में खुशी का माहौल है।
हर छोटे-बड़े की जुबान पर बस एक मई 2013 की घटना सुनायी पड़ रही है। इस हादसे में अपनी बच्ची खोने वाले पिता राम स्वरूप कश्यप के चेहरे पर खुशी व गम के मिलेजुले भाव दिखे।
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उनका कहना था कि अगर बेटी के जिंदा रहते यह पुरस्कार मिलता तो खुशी दो गुना हो जाती। बेटी की यादों में खोते राम स्वरूप ने बताया कि एक मई 2013 का दिन भुलाए नहीं भूलता।
स्कूल की छुट्टी हो जाने के कारण मौसमी अपनी बहन और दो सहेलियों के साथ गोमती नदी के किनारे बकरी चराने गयी थी। इसमें 15 साल की केशकली, 11 साल की सुलेखा और15 साल की बहन सुभाषिनी शामिल थी।
इसी दौरान चारों बच्चियां गोमती में किनारे की तरफ नहाने लगी। नहाने के दौरान ही केशकली का पांव फिसल गया और वह गहरे पानी में पहुंच डूबते हुए मदद को चिल्लाने लगी।
अचानक हुए इस हादसे से मौजूद तीनों लड़कियां घबराते हुए रोने लगी। इसी दौरान सुलेखा और सुभाषिनी पानी में डूब रही केशकली को बचाने के लिए मदद की गुहार लगाते हुए गांव की तरफ भागी लेकिन हिम्मती मौसमी ने भागने की जगह नदी में डूब रही सहेली केशकली को बचाने की ठानी।
उसने एक लकड़ी का डंडा लेकर उसे केशकली की तरफ बढ़ाकर पकड़ने को कहा। केशकली डंडा पकड़ कर किनारे की तरफ आने भी लगी।
इसी बीच पानी के तेज बहाव के कारण बैलेस बिगड़ने से मौसमी भी एक झटके के साथ नदी में गिर गयी। थोड़ा बहुत तैरना जानने के बाद भी पानी गहरा होने के कारण वह न तो केशकली को बचा पायी और न ही खुद ही बची।
बाद में पुलिस ने मौसमी का शव तो दुर्घटना स्थल से ही बरामद किया जबकि केशकली का शव एक किलोमीटर दूर बरामद हुआ।
उम्र में अपनी से बड़ी केशकली को बचाने के जज्बे के साथ बहादुरी से बचाव की पूरी कोशिश के बाद प्राण गंवाने वाली मौसमी की वीरता को सलाम करते हुए राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया।
पुरस्कार लेने दिल्ली जाएंगे पिता व भाई
गरीब परिवार से जुड़ी मौसमी के पिता राम स्वरूप कश्यप भमिहीन होने के कारण मजदूरी कर परिवार का भरणपोषण करते हैं। परिवार में मां दुधाना के साथ दो भाई मनोज व विनोद और तीन बहन कमला, रीता व सुभाषिनी है।
बिटिया को वीरता पुरस्कार के लिए चुने जाने की जानकारी आठ जनवरी को बाल कल्याण परिषद नई दिल्ली की तरफ मिली।
तीन दिन पहले इसी संस्था के लखनऊ प्रतिनिधि की तरफ से 27 जनवरी को राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करने के लिए परिवार के दो सदस्यों को दिल्ली भेजे जाने का टिकट भी मिला है।
दिल्ली में परिवार के दोनों सदस्यों के रहने खाने इत्यादि की व्यवस्था परिषद की तरफ से की जाएगी। उन्होंने बताया कि पुरस्कार लेने के लिए वह खुद अपने छोटे बेटे विनोद के साथ बुधवार रात को दिल्ली के लिए रवाना होंगे।