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सुबूत नहीं दे सकी STF, आतंक के तीन आरोपी बरी

Fri, 07 Aug 2015 02:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 07 Aug 2015 02:26 AM IST
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Three accused of terrorism get clean chit.

अदालत ने हरकत उल जेहाद अल इस्लामी (हूजी) के तीन सदस्यों को गुरुवार को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया। एडीजे एसएएच रिजवी ने एसटीएफ की कहानी को नकारते हुए इन्हें बरी करने के आदेश दिए।

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पाक में ट्रेनिंग लेकर भारत में आतंकी घटनाएं करने आए मो. याकूब उर्फ शाकिर उर्फ लंबू, जलालुद्दीन उर्फ अमानुल्ला मंडल उर्फ बाबू उर्फ पिंटू तथा नौशाद उर्फ हाफिज को जून, 2007 में लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था।
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अदालत ने इन्हें बरी करते हुए कहा कि एसटीएफ ने गिरफ्तारी की जो कहानी बताई, वह संदेहास्पद है। अभियोजन ने जो सुबूत पेश किए, वो विश्वसनीय नहीं हैं। याकूब की गिरफ्तारी की तिथि, समय व स्थान तथा उसके पास से बरामद विस्फोटक, सब संदिग्ध प्रतीत होते हैं। लगता है कि गिरफ्तारी पहले किसी अन्यत्र स्थान से की गई।
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एसटीएफ ने यह केस दर्ज कराया था
एसटीएफ के उप निरीक्षक विनय गौतम के हुसैनगंज थाने में इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था- सूचना मिली थी कि हूजी विदेशी आतंकियों की भारत में घुसपैठ करवा रहा। भारतीय युवकों को पाक में ट्रेनिंग दिलाने के बाद भारत में विध्वंसक कार्यवाही करवा रहा है।

21 जून, 2007 को मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ ने याकूब को चारबाग से गिरफ्तार किया था। उससे 4.5 किलो आरडीएक्स, तीन टाइमर घड़ी, तीन डेटोनेटर, बड़ी टाइमर घड़ी, 9 वोल्ट की बैटरी बरामद की गई थी। याकूब की निशानदेही पर नौशाद तथा जलालुद्दीन को गिरफ्तार किया गया था।

कोर्ट ने यूं खारिज की एसटीएफ की कहानी

Three accused of terrorism get clean chit.

1. अदालत ने कहा- दरोगा विनय गौतम ने कहा- मुखबिर ने फोन पर सूचना दी। वहीं इसी टीम के दूसरे दरोगा धर्मेश कुमार शाही ने बताया कि वह एसटीएफ कार्यालय आया था।

2. याकूब की गिरफ्तारी दोपहर करीब ढाई बजे चारबाग के पास से हुई। जाहिर है वहां भीड़ रही होगी। फिर भी किसी आम आदमी को गवाह क्यों नहीं बनाया गया।

3. पुलिस कोर्ट में यह साफ नहीं कर पाई कि बरामद विस्फोटक कहां रखा और उसका डिस्पोजल कैसे किया।

4. विस्फोटक सील करने के लिए सील मोहर कहां से आई, इस पर एसटीएफ की टीम के सदस्यों ने अलग-अलग कहानी बताई। बताया मोबाइल पर सील नहीं लगी, जबकि लगी थी।

5. याकूब के पास विस्फोटक था, फिर भी एसटीएफ तत्काल उसके पास पहुंच गई। क्या उसे पता था कि विस्फोटक अलग-अलग कंपोनेंट में है। याकूब धमाके नहीं कर सकता।

6. एसटीएफ ने न तो याकूब का विस्फोटकों से भरा बैग पानी में डाला, न ही बम निरोधक दस्ते को बुलाया। सीधे उसका वजन कराने दुकान पर पहुंच गए।

7. याकूब की निशानदेही पर जो गिरफ्तारियां हुईं, उनके भी वक्त, स्थान पर अलग-अलग गवाहों के अलग बयान हैं।

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