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Lucknow News: इस बार कुंभ संक्रांति पर विजया एकादशी का दुर्लभ संयोग
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लखनऊ। सूर्यदेव आगामी 13 फरवरी को मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इसे ही कुंभ संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार मंगलकारी शुभ योग बन रहा है। इसी दिन विजया एकादशी भी मनाई जाएगी। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। सूर्य की उपासना से स्वास्थ्य उत्तम व मानसिक कष्ट दूर होते हैं। तिल का दान करने से शनि दोषों से भी राहत मिलती है।
ज्योतिषाचार्य पुनीत वार्ष्णेय के अनुसार, कुंभ संक्रांति के अवसर पर स्नान-दान करने का विषय महत्व है। कुंभ राशि में पहली 16 घड़ी (6 घंटा 24 मिनट) पुण्यकाल होता है। वृष, सिंह, वृश्चिक व कुंभ नाम की स्थिर राशि, विष्णुपद या विष्णु पदी कहलाती हैं। विष्णु पदी कुंभ संक्रांति में गाय के लिए जल और तृण (घास) का दान उत्तम माना गया है। कुंभ (वायु तत्व व स्थिर) राशि के स्वामी शनिदेव हैं। सूर्य और शनि के राशि में आपसी संबंध के कारण यह संक्रांति सेवा कार्य, समाज और न्याय से जुड़ी मानी जाती है। इस वर्ष 13 फरवरी दिन शुक्रवार को प्रातः 04:09 बजे पर सूर्य के कुंभ राशि में प्रवेश होने के कारण कुंभ संक्रांति मनाई जाएगी।
इसके अलावा इसी दिन 13 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण एकादशी को विजया एकादशी का भी व्रत है। एकादशी तिथि 12 फरवरी को 12:22 बजे से प्रारंभ होकर 13 फरवरी को 14:26 बजे तक रहेगी। इसका उल्लेख पद्मपुराण एवं स्कंदपुरणा में भी मिलता है। ऐसी मान्यता है कि इसी व्रत से श्रीराम ने लंका पर विजय से पूर्व अनुष्ठान किया था। इसी एकादशी व्रत का उपदेश भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को भी दिया था। ज्योतिषाचार्य पुनीत वार्ष्णेय के अनुसार, यह व्रत शत्रु व बाधा नाश, मुकदमे व संघर्ष में विजय, साधना में सफलता, जीवन की अड़चनों पर नियंत्रण के लिए विशेष माना गया है। इस व्रत के प्रभाव से दुख और दरिद्रता दूर होती है और समग्र कार्यों में विजय प्राप्त होती है।
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ज्योतिषाचार्य पुनीत वार्ष्णेय के अनुसार, कुंभ संक्रांति के अवसर पर स्नान-दान करने का विषय महत्व है। कुंभ राशि में पहली 16 घड़ी (6 घंटा 24 मिनट) पुण्यकाल होता है। वृष, सिंह, वृश्चिक व कुंभ नाम की स्थिर राशि, विष्णुपद या विष्णु पदी कहलाती हैं। विष्णु पदी कुंभ संक्रांति में गाय के लिए जल और तृण (घास) का दान उत्तम माना गया है। कुंभ (वायु तत्व व स्थिर) राशि के स्वामी शनिदेव हैं। सूर्य और शनि के राशि में आपसी संबंध के कारण यह संक्रांति सेवा कार्य, समाज और न्याय से जुड़ी मानी जाती है। इस वर्ष 13 फरवरी दिन शुक्रवार को प्रातः 04:09 बजे पर सूर्य के कुंभ राशि में प्रवेश होने के कारण कुंभ संक्रांति मनाई जाएगी।
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इसके अलावा इसी दिन 13 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण एकादशी को विजया एकादशी का भी व्रत है। एकादशी तिथि 12 फरवरी को 12:22 बजे से प्रारंभ होकर 13 फरवरी को 14:26 बजे तक रहेगी। इसका उल्लेख पद्मपुराण एवं स्कंदपुरणा में भी मिलता है। ऐसी मान्यता है कि इसी व्रत से श्रीराम ने लंका पर विजय से पूर्व अनुष्ठान किया था। इसी एकादशी व्रत का उपदेश भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को भी दिया था। ज्योतिषाचार्य पुनीत वार्ष्णेय के अनुसार, यह व्रत शत्रु व बाधा नाश, मुकदमे व संघर्ष में विजय, साधना में सफलता, जीवन की अड़चनों पर नियंत्रण के लिए विशेष माना गया है। इस व्रत के प्रभाव से दुख और दरिद्रता दूर होती है और समग्र कार्यों में विजय प्राप्त होती है।
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