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आडवाणी की रथयात्रा: जानें- उनकी गिरफ्तारी से कैसे बदल गया था पूरा माहौल, बता रहे हैं भाजपा सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह

Tue, 23 Nov 2021 04:06 PM IST
ishwar ashish महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 23 Nov 2021 04:06 PM IST
सार

आडवाणी की रथयात्रा के दौरान भारत माता की जय की तरह जय श्रीराम का उद्घोष नई पहचान बन गया था। लोग घंटों फूल-माला लिए सड़कों पर खड़े रहते थे।

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This is How Lal Krishan Advani's rath Yatra changed all political scenario.
लालकृष्ण आडवाणी - फोटो : PTI

विस्तार

उत्तर प्रदेश में सियासत की बात हो और राम मंदिर आंदोलन की चर्चा न हो, यह संभव नहीं है। दशकों तक राम मंदिर निर्माण के लिए चला आंदोलन आज भाजपा राज में मंदिर निर्माण को लेकर चर्चा में है। 2022 के विधानसभा चुनाव की सरगर्मी जब बढ़ गई है, अयोध्या और राम मंदिर फिर सियासत के केंद्र में है। यह पहला चुनाव होने जा रहा है, जिसके पहले सभी प्रमुख दलों के दिग्गज भाजपा की तरह चुनाव के पहले अयोध्या और राम मंदिर की परिक्रमा को मजबूर हैं।

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छह बार के सांसद और राम मंदिर आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने वाले भाजपा नेता ब्रजभूषण शरण सिंह बताते हैं कि 1990 में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा (जिसे बिहार में ही रोक दिया गया था) इस पूरे आंदोलन का 'टर्निंग प्वाइंट' थी। इस यात्रा ने न सिर्फ भाजपा को फर्श से अर्श तक पहुंचाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई बल्कि राम मंदिर के निर्माण का पथ भी प्रशस्त किया।
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ब्रजभूषण कहते हैं कि आडवाणी की रथ यात्रा ने बिहार में गिरफ्तारी से पहले और बाद में गोंडा से अयोध्या और लखनऊ तक जो राममय माहौल बनाया था, उसे याद कर आज भी जोश आ जाता है।  'भारत माता की जय' की तरह इस यात्रा ने 'जयश्री राम' के जयघोष को जन-जन के मन में बसा दिया। आज भी जयश्री राम का उद्घोष होते ही पब्लिक में करंट आ जाता है। वह कहते हैं कि यह करंट नहीं जाने वाला है। आडवाणी बिहार से रिहा होने के बाद दिल्ली चले गए थे। फिर 16 नवंबर 1990 को वह अयोध्या जाने के लिए वैशाली ट्रेन से गोंडा आए। यहां से वह सड़क मार्ग से पहले फैजाबाद और फिर खुले वाहन से अयोध्या पहुंचे थे।
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गोंडा से अयोध्या व अयोध्या से लखनऊ तक आडवाणी के वाहन के रथवान रहे ब्रजभूषण बता रहे हैं कि किस तरह इस यात्रा ने माहौल बनाया था? आडवाणी की रथ यात्रा के 21 वर्ष बाद 28 नवंबर, 2021 को गोंडा से बहराइच तक की अपनी यात्रा के दौरान ब्रजभूषण ने जगह-जगह उपस्थित लोगों के जय श्री राम के उद्घोष के साथ दिख रहे जोश की ओर इशारा करते हुए दावा किया कि वह माहौल अभी तक बना हुआ है, और आगे भी बना रहने वाला है। ब्रजभूषण से बातचीत के प्रमुख अंश.....

सवाल: आडवाणी की रथ यात्रा से किस तरह का माहौल बना था?
जवाब:
आडवाणी की रथ यात्रा 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से शुरू होकर 30 अक्तूबर को अयोध्या में कारसेवा के साथ खत्म होनी थी। मगर, बिहार पहुंचते-पहुंचते यात्रा को इतना जनसमर्थन मिला कि तत्कालीन सरकारें घबरा गईं। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने 23 अक्तूबर को ही आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन, 30 अक्तूबर को बड़ी संख्या में रामभक्त अयोध्या पहुंचे, जिन पर यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने गोली चलवा दी। कई राम भक्त शहीद हुए। दो नवंबर को रामभक्त फिर उमड़े तो फिर गोली चलवाई, जिससे फिर कई रामभक्त शहीद हुए। इससे पूरे देश के साथ-साथ अवध के जिलों में अपार जनाक्रोश था। आडवाणी बिहार में करीब 12 दिन तक जेल में रहने के बाद दिल्ली चले गए थे। इसके बाद रामलला के दर्शन के लिए 16 नवंबर को अयोध्या जाने के लिए वैशाली ट्रेन से गोंडा आए थे। वैशाली ट्रेन गोंडा पहुंची तो यहां रेलवे स्टेशन पर तिल रखने की जगह नहीं थी। आडवाणी को देखने के लिए लोग टूट पड़े थे। यहां से आडवाणी को अयोध्या के रास्ते लखनऊ वाया दिल्ली जाना था। आरएसएस के तत्कालीन विभाग प्रचारक राम लखन जी हुआ करते थे। उन्होंने आडवाणी को गोंडा से आगे ले जाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था की और वह गाड़ी मुझे ही चलाकर ले जाने की जिम्मेदारी दी। मैं, कंटेसा कार से आडवाणी को फैजाबाद फिर अयोध्या ले गया। वहां रामलला के दर्शन के बाद उन्हें लखनऊ ले गए। रास्ते में जगह-जगह लोग फूल माला लिए खड़े थे। वाहन पर पुष्पवर्षा हो रही थी। आडवाणी खुली गाड़ी में थे। उन्होंने कहीं भाषण तो नहीं दिया लेकिन हाथ हिलाते हुए निकले। लोगों में अभूतपूर्व जोश था। गाड़ी पर राम मंदिर आंदोलन को प्रेरित करने वाले कैसेट बज रहे थे।

इसलिए कामयाब हुआ रामजन्मभूमि आंदोलन

This is How Lal Krishan Advani's rath Yatra changed all political scenario.
बदलाव के साक्षी रहे भाजपा सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह। - फोटो : अमर उजाला

सवाल: उस आंदोलन के सफलता की मुख्य वजह क्या थी?
जवाब:
राम मंदिर आंदोलन की रचना आरएसएस की थी। विहिप, बजरंगदल, दुर्गा वाहिनी जैसे संगठनों ने इसे जमीन में उतारने का काम किया। संघ ने इस आंदोलन को उसी तरह आम लोगों से जोड़ने का काम किया जैसे भगवान राम ने अपने वनवास के दिनों में कोल, भील, किरात, निषाद, बानर, भालुओं को जोड़कर रावण जैसे पराक्रमी को हरा दिया था। संघ ने इसे जनजन का आंदोलन बनाया। आडवाणी की रथयात्रा ने जनजागरण का काम किया। बड़े-बड़े नेताओं की गिरफ्तारी व कारसेवकों पर गोलीबारी ने हिंदुओं को हिला दिया था। बाद में चार-चार भाजपा सरकारों की बर्खास्तगी ने लोगों को उद्वेलित किया। इस आंदोलन व आडवाणी की यात्रा ने जाति, धर्म, भाषा, प्रांत सभी तरह के भेद समाप्त कर दिए थे। महिला-पुरुष, बच्चे और बूढ़े सब एक जैसे उत्साह से लबरेज थे। गूंगे-बहरों तक को आंदोलन का हिस्सा बनते देखा गया। 'बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का’, ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे'.’ जय श्री राम' के नारों से माहौल गुंजायमान रहता था। हालात ये थे कि आडवाणी की यात्रा के बाद तीन दिन तक सोते समय भी कानों में जय श्रीराम गूंजता रहा। वह माहौल अभूतपूर्व था, जिसके नायक आडवाणी जी और सूत्रधार संघ था।

सवाल: क्या उन दिनों आप लोग कभी सोचते थे कि राम मंदिर बन पाएगा?
जवाब:
उन दिनों मैं बिल्कुल युवा था और अयोध्या ज्यादा रहना होता था। यह कठिन जरूर लगता था लेकिन असंभव कभी नहीं लगता था। स्वर्गीय अशोक सिंघल व महंत परमहंस दास जी के कानूनी तर्क-वितर्क सुनकर व दस्तावेज देखकर लगता था कि न्यायालय से राम मंदिर के पक्ष में ही फैसला आएगा। लेकिन, तुष्टिकरण वाली सरकारों के रहते इसमें देरी से लोग अधीर हो रहे थे। 'सबका साथ-सबका विकास 'वाली सरकार आई तो मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त होने में देर नहीं लगी। खास बात यह है कि राम मंदिर का निर्माण पूर्ण विधिसम्मत तरीके और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक हो रहा है। आज वह विश्वास सही साबित हुआ।

सवाल: कहा जाता है कि राम मंदिर आंदोलन को लेकर अयोध्या के संतों में भी मतभिन्नता थी?
जवाब:
हां, यह सही है। अयोध्या के कई प्रमुख भूमिका वाले संतों में मतभिन्नता थी। शुरुआत में बिखराव के हालात थे। लेकिन भिन्न-भिन्न मत वाले संतों में समन्वय की उल्लेखनीय भूमिका निभाई तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर स्वर्गीय महंत अवेद्यनाथ ने। अवेद्यनाथ जी रामविलास वेदांती के यहां रहते थे। उनका व्यक्तित्व जोड़ने वाला था। ज्ञानदास व सिंघल जी के बीच मुलाकात की नींव मैंने बनाई थी। उन दिनों स्वर्गीय अशोक सिंघल, अवेद्यनाथ और परमहंस आंदोलनकर्ताओं के प्रेरणा स्रोत हुआ करते थे। धीरे-धीरे लगभग सभी एक साथ आ गए।

विपक्ष ने सीएए को गलत स्वरूप देने की कोशिश की...

सवाल: आप और तमाम हिन्दू नेता राम मंदिर आंदोलन के दौरान अपने भाषणों में अयोध्या के साथ काशी और मथुरा के मंदिरों के उद्धार की बात करते रहे हैं। क्या आगे उसकी भी तैयारी है?
जवाब:
भाजपा सदैव विधिसम्मत तरीके से कार्य में विश्वास करती है। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 की समस्या का समाधान और सीएए विधिसम्मत तरीके से लागू किया गया। विपक्ष ने सीएए को गलत स्वरूप देने की कोशिश की। यह सरकार की उपलब्धियों से ध्यान बंटाने का हथकंडा है। हर कोई जानता है कि कांग्रेस ने मुस्लिम वोट के लिए शाहबानों प्रकरण में कोर्ट का फैसला पलट दिया था। आम लोग मानते हैं कि यदि राम मंदिर पर फैसले के वक्त कांग्रेस सरकार होती तो वह इस फैसले को लागू न होने देती। कोई न कोई अड़ंगा जरूर लगाती। मोदी सरकार में राम मंदिर का मार्ग विधि सम्मत तरीके से प्रशस्त हुआ। राम मंदिर का फैसला ज्यों का त्यों सौहार्दपूर्ण माहौल में लागू हो सका और आज भव्य मंदिर बन रहा है। उसी तरह काशी व मथुरा को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि बंदूक के बल पर किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। न्यायपालिका को सब मानते हैं। उसके निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

सवाल: इस आंदोलन ने अवध की राजनीति पर क्या विशेष फर्क डाला?
जवाब:
गोंडा अयोध्या से सटा जिला है। जब यह आंदोलन चरम पर था, देश भर के कारसेवक गोंडा, नवाबगंज पहुंच रहे थे। गोंडा के लोगों ने तमाम प्रतिबंधों को धत्ता बताकर कारसेवकों की सेवा की। मल्लाहों ने कारसेवकों को नदी से पार कराया। यही नहीं अपना सर्वोत्तम बलिदान भी दिया। अयोध्या अंदोलन में कोठारी बंधुओं की शहादत सभी को याद है। पर, गोंडा के नवाबगंज के रमेश मिश्रा व रमेश पांडेय को वह महत्व नहीं मिल सका जो मिलना चाहिए। दूसरा, इस आंदोलन के दौरान जो लोग सक्रिय थे, उनमें से ज्यादातर ने राजनीति व समाज में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। विनय कटियार पिछड़े समाज से आते हैं। इस आंदोलन में अग्रणी भूमिका रही है। उन्होंने बजरंग दल के साथ लंबा काम किया। वह कई बार सांसद रहे। मैं गोंडा, बलरामपुर के साथ कैसरगंज मिलाकर छह बार सांसद निर्वाचित हो चुका हूं। अयोध्या में सांसद लल्लू सिंह, पूर्व सांसद राम विलास दास वेदांती, पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद सहित तमाम लोग इसी आंदोलन से आगे बढ़े। यही नहीं जिन लोगों ने उस समय अपने विधानसभा में शिलापूजन, अस्थिकलश पूजन या विहिप व संघ परिवार से जुड़े राम मंदिर अंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रियता निभाई उनमें तमाम विधायक, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य बने। रामकाज का फल किसी न किसी रूप में हर किस को मिला है।

सवाल: आपकी सरकार हर चुनाव के पहले राम मंदिर को एक मुद्दे के रूप में क्यों ले आती है? क्या विकास के काम पर जीत के भरोसे की उम्मीद नहीं बन पाती?
जवाब:
भाजपा की केंद्र की मोदी व प्रदेश की योगी सरकार की उपलब्धियां सैकड़ों में हैं। डबल इंजन की सरकार के काम को जनता अच्छी तरह से जान रही है। जनता खुद ही बता रही है। उपलब्धियों के बलबूते मोदी सरकार दुबारा सत्ता में आई है और योगी सरकार भी अपने काम के बल पर सत्ता में दुबारा आएगी। पर, राम मंदिर भाजपा के घोषणापत्र का हिस्सा रहता आया है। जब मंदिर नहीं बन पा रहा था। पार्टी व परिवार अपने-अपने तरीके से इसके लिए प्रयासरत थे, तब विपक्ष के लोग कटाक्ष करते थे, कि मंदिर वहीं बनाएंगे, लेकिन तारीख नहीं बताएंगे। आज जब हम अपने घोषणा पत्र का किया वादा पूरे उल्लास के साथ पूरा कर रहे हैं, तो उसे बताने पर एतराज क्यों? लोगों को तकलीफ क्यों होती है? राम मंदिर ने लोगों को जोड़ने का काम किया है। जो लोग कल तक राम मंदिर के नाम पर कटाक्ष करते थे, आज वे भी अपने चुनाव का श्रीगणेश अयोध्या से रामलला का दर्शन कर कर रहे हैं। यह हमारी बड़ी उपलब्धि है।

क्या योगी सरकार वापसी कर पाएगी...

सवाल: इस विधानसभा चुनाव में क्या योगी सरकार वापसी कर पाएगी? क्या राम मंदिर निर्माण का फायदा मिलने की उम्मीद है?
जवाब:
  कोविड काल में संसाधन नहीं थे। मलेरिया तक की दवा नहीं थी। मोदी सरकार ने अभूतपूर्व काम किया। न सिर्फ अपने देश के लोगों के जीवन रक्षा के लिए जांच से इलाज और टीके तक की व्यवस्था की बल्कि, विदेशों में भी मदद की। न सिर्फ चीन की चुनौती का सामना किया बल्कि विश्व मंच पर अलग-थलग किया। जब कोविडकाल में दिल्ली, राजस्थान आदि सरकारों ने लोगों को भगा दिया, तब योगी जी ने सभी को सुरक्षित पहुंचाने के साथ उनके जांच, इलाज व राशन, भत्ते की व्यवस्था की। योगी व उनकी टीम ने कोविड संक्रमित होते हुए भी प्रतिदिन हालात की समीक्षा की और लोगों तक मदद पहुंचाई। ऐसे समय में भी अखिलेश यादव ने टीका न लगवाने की बात कर लोगों को भड़काया। राहुल गांधी ने निगेटिव बात की। इसके अलावा योगी व मोदी सरकार ने सड़क, मुफ्त बिजली कनेक्शन, उज्ज्वला कनेक्शन, आवास, आयुष्मान योजना से इलाज की व्यवस्था के साथ मुफ्त राशन वितरण का काम लगातार किया है। लोगों को लाभ सीधे उनके खाते में पहुंचा है। पहले सिर्फ वीआईपी जिलों को बिजली मिलती थी। आज हर जिला बराबर है। पूर्व की सरकारों और आज की सरकार का फर्क लोग महसूस कर रहे हैं। आम आदमी सरकार के पक्ष में है। ऐसे में योगी सरकार की वापसी तय है।

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