मुलायम के गढ़ में अखिलेश की परीक्षा, भाजपा-बसपा को मिल सकता है मौका
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दूसरे चरण का मतदान शुरू होते ही तीसरे चरण की चुनावी जंग चरम पर पहुंच गई है। मुलायम सिंह यादव के गढ़ में होने वाली इस जंग में असली परीक्षा उनके बेटे अखिलेश यादव की होगी।
2012 में सपा की सरकार बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले इस इलाके में परिवार की तकरार के साथ ही बागियों के तेवर भी असर दिखाएंगे। सवाल यह भी उठ रहा है कि मुलायम, जसवंतनगर से बाहर कहीं चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे या नहीं?
विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में दो बड़े महानगरों कानपुर, लखनऊ, मुलायम सिंह के गृह जनपद इटावा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्र रहे मैनपुरी समेत 12 जिलों में 19 फरवरी को वोट पड़ेंगे।
इटावा, मैनपुरी वही क्षेत्र हैं जहां से राजनीति की शुरुआत करके मुलायम ने मुख्यमंत्री प्रदेश और देश की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया। वे तीन बार मुख्यमंत्री बने, केंद्र सरकार में रक्षामंत्री की कुर्सी तक पहुंचे।
'पहला मौका जब मुलायम सक्रिय नहीं'
लगभग 50 साल के सियासी जीवन में यह पहला चुनाव है जिसमें मुलायम सिंह ज्यादा सक्रिय नहीं हैं। पिछले 25 सालों में यह पहला मौका है जब वह सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं हैं। अभी तक उन्होंने जसवंतनगर क्षेत्र में ही दो चुनावी सभाएं की हैं।
इस सीट से मुलायम 7 बार विधायक रह चुके हैं, चार बार से शिवपाल सिंह यादव इस हल्के की नुमाइंदगी कर रहे हैं। यादव परिवार का गांव सैफई भी इसी विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है।
मुलायम परिवार के संग्राम के बाद सबकी नजर इटावा और आसपास के जिलों पर टिकी हुई हैं। इसलिए भी कि मुलायम के कई करीबियों के टिकट कट चुके हैं तो कई सपा छोड़ चुके हैं और कुछ बगावत की राह पर हैं।
सपा को मिली थी एक तरफा कामयाबी
जिन 12 जिलों में 19 फरवरी को मतदान होना है, उनमें पांच साल पहले सपा को इकतरफा कामयाबी मिली थी। 69 सीटों में भी दूसरा कोई भी दल दहाई का आंकड़ा नहीं छू सका था।
सपा को 55, बसपा को 6, भाजपा को 5 और कांग्रेस को मात्र 2 सीट मिली थीं। फर्रुखाबाद से निर्दलीय विजय सिंह विजयी रहे थे। इस बार वे सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा को कानपुर में 4 और लखनऊ में एक सीट मिली थी। सपा को कानपुर में 5 और लखनऊ में 7 सीटें मिली थीं।
10 जिलों में भाजपा का खाता नहीं खुल सका था। यही हाल बसपा का रहा था। उसे हरदोई व सीतापुर में दो-दो तथा उन्नाव व कानपुर देहात में एक-एक सीट मिली थी। 8 जिलों में बसपा का खाता भी नहीं खुल पाया था। कांग्रेस को लखनऊ और कानपुर में एक-एक सीट मिली थी।
यादव पट्टी पर पड़ेगा घर के झगड़े का असर?
राजनीतिक हल्कों में माना जा रहा है कि तीसरे चरण की कुछ सीटों पर परिवार के झगड़े का असर पड़ेगा। मध्य यूपी के यादव बहुल क्षेत्रों में कई सीटों पर उलटफेर भी हो सकती है।
इटावा जिले में पहले तीनों सीट सपा के पास थीं, लेकिन इटावा से रघुराज सिंह शाक्य और भरथना से सुखदेवी वर्मा का टिकट कट गया है। शाक्य सपा छोड़ चुके हैं लेकिन शिवपाल सिंह को जसवंतनगर से चुनाव लड़ा रहे हैं। सुखदेवी भी उनके चुनाव में लगी हैं।
इटावा में ‘मुलायम के लोग’ नाम से सपा के समानांतर सियासी गतिविधियां चल रही हैं। शाक्य और सुखदेवी का आरोप है कि मुलायम के नजदीकी होने के कारण उनका टिकट कटा है। सीतापुर की बिसवां सीट से विधायक रामपाल यादव टिकट कट जाने पर लोकदल के सिंबल पर चुनाव लड़ रहे हैं।
इसी तरह औरैया में प्रमोद कुमार गुप्ता का टिकट कट गया है। वह मुलायम परिवार के नजदीकी रिश्तेदार हैं। मुलायम पहले दो चरणों में चुनाव प्रचार के लिए नहीं गए। तीसरे चरण में उनकी सभाएं अभी तक केवल जसवंतनगर तक सीमित हैं। मध्य यूपी की यादव पट्टी में नही गए तो सपा उम्मीदवारों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सपा के अंतर्विरोधों के चलते भाजपा व बसपा को मिल सकता है मौका
सपा के अंतर्विरोधों के चलते अपने दलों के लिए बेहतर चुनावी संभावनाओं को देखते हुए बसपा और भाजपा ने मध्य यूपी में ताकत झोंक दी है। दोनों दलों के बड़े नेताओं की सभाएं हो चुकी हैं।
मायावती तो अपने भाषणों में शिवपाल के साथ नाइंसाफी का जिक्र भी करती हैं। उनकी रणनीति परिवार के झगड़े में अखिलेश से नाराज और शिवपाल समर्थकों को अपने पक्ष में लामबंद करने की है। भाजपा भी अब परिवार के विवाद पर मुखर होने लगी है।
पांच जिलों में सपा ने जीती थीं सभी सीट
दूसरे चरण में मतदान वाले पांच जिले ऐसे हैं, जिनमें सभी सीटें सपा ने जीती थीं। इनमें कन्नौज, मैनपुरी, इटावा, औरैया और बाराबंकी जिले शामिल हैं। फर्रुखाबाद, कानपुर देहात, उन्नाव में सपा केवल एक-एक सीट पर चुनाव हारी थी।
इस बार इन सीटों को बरकरार रखना सपा के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। इस चुनाव में जहां मुलायम-शिवपाल पार्टी में अलग-थलग हैं वहीं, बाराबंकी में बेनी प्रसाद वर्मा हाशिये पर आ गए हैं। रामनगर से उनके बेटे राकेश वर्मा को टिकट नहीं मिल सका।
राजधानी में ही शारदा प्रताप शुक्ला सपा से बागी होकर चुनाव लड़ रहे हैं। सपा केसामने हाथ के साथ से साइकिल की रफ्तार बढ़ाने की चुनौती है।
विधानसभा 2012 का रिजल्ट
कुल सीट--69
सपा--55
बसपा--06
भाजपा--05
कांग्रेस--02
निर्दलीय--01