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यूपी में तैयार हो रहा तीसरा मोर्चा: तीन सितंबर को लखनऊ से बजेगा बिगुल, फिर हर जिले में सम्मेलन

Thu, 24 Aug 2023 10:19 AM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 24 Aug 2023 10:19 AM IST
सार

एनडीए और विपक्षी गठबंधन इंडिया से इतर एक ही मंच पर यूपी के सियासी दल आएंगे। इसमें पिछड़ों, दलितों एवं अल्पसंख्यकों की समस्याओं पर मंथन होगा।

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Third front is taking shape in Uttar Pradesh for Loksabha Election 2024.
विश्वात्मा व डीपी यादव। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश की सियासत में तीसरा मोर्चा तैयार हो रहा है। यह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और भारतीय राष्ट्रीय विकासशील समावेशी गठबंधन (इंडिया) से अलग होगा। इसमें प्रदेश के तमाम छोटे-छोटे दल शामिल होंगे। ये मिलकर पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की समस्याओं को लेकर आंदोलन शुरू करेंगे। इसका पहला सम्मेलन तीन सितंबर को लखनऊ के रविंद्रालय में होगा। इसके बाद हर जिले में सम्मेलन के जरिये दलों को जोड़ने का अभियान शुरू होगा।

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एनडीए में 38 तो इंडिया में 26 दल शामिल हैं। ऐसे में अन्य दलों का तीसरा मोर्चा बनाने का प्रयास शुरू हो गया है। इसकी अगुवाई राष्ट्रीय परिवर्तन दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मंत्री डीपी यादव और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के नीति निर्देशक विश्वात्मा कर रहे हैं। आयोजन का उद्देश्य भले ही अभी सामाजिक बताया जा रहा है, लेकिन इसका भविष्य सियासी है। गठबंधन बनाने में जुटे लोगों का कहना है कि प्रदेश के अन्य कई छोटे-छोटे दलों के नेता भी इसमें हिस्सा लेंगे। खासतौर से उन नेताओं को भी मंच दिया जाएगा, जो किसी न किसी रूप में सपा और भाजपा की नीतियों से खिन्न हैं अथवा वहां से उपेक्षित चल रहे हैं।
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कार्यक्रम के सह संयोजक विश्वात्मा ने बताया कि प्रदेश की सियासत में जनाधिकार को लेकर कोई भी दल बात नहीं कर रहा है। कोई संविधान का डर दिखा रहा है तो कोई अगड़े-पिछड़े के रूप में समाज को बांटने की कोशिश में लगा हुआ है। प्रदेश के करीब दो दर्जन से ज्यादा दल संपर्क में हैं। इन सभी को मिलाकर तीसरा मोर्चा गठित किया जाएगा। जहां तक लोकसभा चुनाव की बात है तो अभी इस मुद्दे पर विमर्श होना बाकी है।

प्रदेश की सियासत पर असर
तीसरे मोर्चे में शामिल हो रहे दल अलग-अलग जिलों में सियासी ताकत रखते हैं। इस टीम में शामिल पूर्व मंत्री डीपी यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामकुमार यादव, इटावा के पूर्व विधायक शिव प्रसाद यादव सहित अन्य नेता अपने क्षेत्र में वोटबैंक में सेंधमारी कर भाजपा व सपा से अलग सियासी संघर्ष को त्रिकोणीय बना सकते हैं। ऐसे में लोकसभा क्षेत्रवार तीसरा मोर्चा बड़े दलों के लिए चुनौती बन सकता है।

सामाजिक कार्यक्रम से हो रही शुरुआत
लखनऊ के रविंद्रालय में तीन सितंबर को होने वाले कार्यक्रम का नाम ‘तीसरा मोर्चा विमर्श’ रखा गया है। कार्यक्रम को पूर्व मंत्री डीपी यादव, विश्वात्मा के अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह यादव, उन्नाव जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष रामकुमार यादव, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. रतन लाल संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के आयोजन से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति-जनजाति और अल्पसंख्यक महासंघ (एनयूबीसी), राष्ट्रीय परिवर्तन दल और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल जुड़े हैं।

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