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चोरों ने खोद डाली ऐतिहासिक इमारत की 150 किलो की तिजोरी

Sat, 30 Apr 2016 02:04 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Sat, 30 Apr 2016 02:04 PM IST
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thieves dig chhatar manzil heavy locker
‌तिजोरी - फोटो : amar ujala

सुरक्षा के अभाव में छतर मंजिल के कीमती दरवाजों, खिड़कियों व भारी-भरकम लोहे पर चोरों की निगाहे टिकी हुई हैं। ताजा मामला इमारत में जड़ी करीब 150 किलो की लोहे की तिजोरी का है, जिसे चोरों ने दोनों ओर से खोद डाला है।

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जिसकी जानकारी मिलने पर पुरातत्व विभाग सकते में आ गया है और आनन-फानन में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश दे दिए हैं। उल्लेखनीय है कि करीब ढाई साल पहले छतर मंजिल सीडीआरआई ने राज्य पुरातत्व विभाग को सौंपी थी।
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जिसके बाद से इमारत का संरक्षण कार्य पेंडिंग पड़ा था। हाल ही में यह कार्य उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम(यूपीआरएनएन) को सौंपा गया है, जिसके बाद से इमारत को मूल स्वरूप में लाने के प्रयास शुरू हुए हैं। 
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इस दौरान कीमती लकड़ियों से बने दरवाजे, खिड़कियां व भारी-भरकम लोहा निकला है, वह परिसर में पड़ा रहता है, जिस पर चोरों की नजरें हैं। चूंकि, सुरक्षा गार्ड नहीं है, इसलिए सामान चोरी हो रहा है।

दरअसल, इमारत की सिक्योरिटी केलिए महज एक गार्ड है, वह भी रात में ड्यूटी करता है। दिन में धरोहर की देखरेख को लेकर पुरातत्व विभाग केअधिकारी संजीदा नहीं हैं। इसलिए गुरुवार को जब इमारत में गोदरेज की करीब 150 किलो की तिजोरी के खोदे जाने का प्रकरण संज्ञान में आया तो सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के दावे अधिकारियों ने कर दिए। 

स्टूडेंट्स पिकनिक मनाने व पार्टी के लिए आते हैं छतर मंजिल

thieves dig chhatar manzil heavy locker
डेमो

उन्होंने चोरी की आशंका जताई है। यूपीआरएनएन के स्थानीय अभियंता(आरई) आरके गुप्ता ने बताया कि अलमारी इमारत की दीवार में जड़ी हुई है, इसलिए हमारे कर्मचारियों ने उसे नहीं खोदा है। यह खोदी गई है तो चोरी का प्रयास है।

पुरातत्व विभाग ने अभी तक इमारत पूरी तरह से हैण्डओवर नहीं की है। इमारत को मूल स्वरूप में लाने के लिए लिफ्ट व अनावश्यक निर्माण तोड़े जा रहे हैं, जिसके मलवे से लोहे की मोटी रॉडें व अन्य सामान निकला है। 

उसे डिस्पोज करने के लिए पुरातत्व विभाग को दो महीने पहले चिट्टी लिखी थी, जिसकी रिसीविंग भी है। पर, उस सामान के डिस्पोजल को लेकर विभाग संजीदा नहीं है। नतीजतन कीमती सामान जस का तस पड़ा हुआ है।

छतर मंजिल के तहखाने में मरम्मत कार्य इन दिनों बंद है, जिससे वहां लाइटिंग वगैरह नहीं है। दोपहर में स्कूली छात्र-छात्राएं पिकनिक मनाने व पार्टी करने के लिए छतर मंजिल आते हैं।

घुप अंधेरे में तहखाने के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। चूंकि, इमारत जर्जर भी है, ऐसे में छात्रों द्वारा वहां आना व घूमना खतरे से कम भी नहीं है। 

यह जुआरियों व स्मैकियों का बन रहा है अड्डा

thieves dig chhatar manzil heavy locker
डेमो

इतना ही नहीं जुआरियों व स्मैकियों का अड्डा भी बन रहा है, जो नदी की ओर से दीवार कूदकर बिल्डिंग में आ जाते हैं। दोस्ती की मिसाल मानी जाने वाली ऐतिहासिक बिल्डिंग बटलर पैलेस में भी कीमती सामान चोरी होने की बात सामने आई है।

टूरिस्ट गाइडों ने बताया कि पर्यटकों को इमारत घुमाने के दौरान वहां लगे कीमती दरवाजे व खिड़कियां गायब मिलीं, जिसकी जानकारी पुरातत्व, पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन को दी गई। यहां भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के दावे किए गए, पर उन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया गया।

राज्य पुरातत्व विभाग के सचिव तुलसीराम का कहना है ‘छतर मंजिल से कीमती दरवाजे, खिड़कियां व तिजोरी खोदी जा रही है तो इसके लिए संरक्षण में लगी एजेंसी यूपीआरएनएन जिम्मेदार है। 

संरक्षण के दौरान निकले सामान का पूरा ब्यौरा लिया जाएगा। दूसरे, सुरक्षा व्यवस्था यूपीआरएनएन की जिम्मेदारी है। सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए उनसे कहा गया है। गार्ड लगाए जाएंगे।’

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