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इन स्टूडेंट्स को इस बार नहीं मिलेगी स्कॉलरशिप

Wed, 03 Dec 2014 11:31 AM IST
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 03 Dec 2014 11:31 AM IST
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these student does not got scholarship this year.

छात्रवृत्ति और शुल्क की भरपाई की बाट जोह रहे विद्यार्थियों के लिए हकीकत निराश करने वाली है। आवेदन करने वाले पिछड़े वर्ग के दो-तिहाई और सामान्य वर्ग के आधे छात्रों को यह सहूलियत नहीं मिल पाएगी। मांग और उपलब्ध बजट के आधार पर समाज कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अधिकारी इस नतीजे पर पहुंचे हैं।

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इस बारे में गहन विचार-विमर्श के लिए बुधवार को मुख्य सचिव ने अपने कार्यालय में अफसरों की बैठक बुलाई है। दशमोत्तर कक्षाओं (पोस्ट मैट्रिक) के उन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और शुल्क की प्रतिपूर्ति करने का प्रावधान है, जिनके अभिभावकों की सालाना आमदनी दो लाख रुपये तक है।
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सत्र 2014-15 में अनुसूचित जाति व जनजाति, पिछड़े और सामान्य वर्ग के करीब 61 लाख विद्यार्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। अनुसूचित जाति और जनजाति के सभी छात्रों को वजीफा और शुल्क की भरपाई केंद्र सरकार करती है।
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अनुसूचित जाति के लिए सालाना राज्य का अंश 661.30 करोड़ रुपये तय है। यानी इन दोनों वर्गों के सभी छात्रों को इस योजना का लाभ मिल जाएगा। दिक्कत पिछड़े और सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए है।

सामान्य वर्ग के करीब 12 लाख छात्र दशमोत्तर कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे हैं। इनके लिए 1560 करोड़ रुपये की जरूरत है, जबकि समाज कल्याण विभाग को इस मद में महज 700 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

आवेदन करने वाले कुछ हजार छात्र एनआईसी की स्क्रूटनी (जांच) में अयोग्य भी ठहराए जाएंगे। इसलिए विभागीय अफसरों का कहना है कि उपलब्ध राशि से ज्यादा से ज्यादा छह लाख छात्रों को ही छात्रवृत्ति और शुल्क की भरपाई की जा सकेगी।

पिछड़े वर्ग से आए 30 लाख आवेदन

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इसी तरह से पिछड़े वर्ग के करीब 30 लाख विद्यार्थियों ने आवेदन किया है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के एक अफसर ने नाम न छापने के अनुरोध पर बताया कि एनआईसी की स्क्रूटनी में उनके यहां के 7-8 लाख आवेदनकर्ता बाहर हो जाएंगे।

22-23 लाख आवेदनकर्ताओं के लिए 2600 करोड़ रुपये की जरूरत होगी, जबकि विभाग को सिर्फ 862 करोड़ रुपये ही इस मद में मिले हैं। इसमें केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि भी शामिल है। यानी सत्र 2014-15 में पिछड़े वर्ग के दो-तिहाई छात्रों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।

इस स्थिति को देखते हुए मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बुधवार को बैठक बुलाई है। पिछले वर्षों में देखने में आया है कि शुल्क प्रतिपूर्ति में घपले के कारण तमाम सही छात्रों को इस योजना का फायदा नहीं मिल पाया था। शासन की मंशा है कि ऐसा इस बार किसी भी हालत में नहीं हो पाए।

समाज कल्याण के प्रमुख सचिव सुनील कुमार कहते हैं कि इस बार किसी भी छात्र को 50 हजार रुपये से ज्यादा शुल्क की भरपाई नहीं की जाएगी। लेकिन यह कार्य भी उपलब्ध बजट के अंदर ही हो पाएगा। अभी इतना ही कह सकता हूं कि पिछले साल की तुलना में इस बार ज्यादा विद्यार्थी इस योजना में कवर हो जाएंगे। फाइनल डिमांड निकालने में वक्त लगेगा।

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