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Lucknow News: पैरों की थिरकन के साथ गूंजा घुंघरुओं का राग
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कथक की प्रस्तुति का आनंद लेते दर्शक। -संवाद
लखनऊ। पैरों की थिरकन के साथ मिलकर घुंघरुओं ने जब ताल से ताल मिलाई तो गोलागंज स्थित कालका बिंदादीन ड्योढ़ी झूम उठी और अपने गुरु पं. बिरजू महाराज की स्मृतियों का ताजा कर दिया। मौका था पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज की पुण्यतिथि पर रविवार को ड्योढ़ी पर आयोजित कार्यक्रम ‘सदा रहत ब्रज श्याम’ का। राग प्रभात की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कथक के विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों से कथा सम्राट को श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद पं. बिरजू महाराज के चचेरे भाई और कालिका बिंदादीन घराने के वरिष्ठ कथक नर्तक पं. राममोहन महाराज ने कहा कि पं. बिरजू महाराज की इच्छा थी कि कालका बिंदादीन ड्योढ़ी पर संगीत और नृत्य हमेशा जीवित रहे। इसीलिए हर शनिवार और रविवार को इस स्थान पर मैं कथक का निशुल्क प्रशिक्षण देता हूं। इस दौरान विशिष्ट अतिथि कालिका बिंदादीन ड्योढ़ी स्थित कथक संग्रहालय के प्रभारी धनंजय राय भी मौजूद रहे। राग प्रभात की निदेशक रिनी भारद्वाज ने गुरु वंदना गुरु चरनन में शीश नवाऊं... पर प्रस्तुति देकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस प्रस्तुति के बाद राग प्रभात के बच्चों ने पं. बिरजू महाराज की कंपोजिंग थुंगा थुंगा... पर विशेष प्रस्तुति दी।
रिनी ने पारंपरिक कथक में तीन ताल में गत, उठान, परन और नटवारी के टुकड़े आदि की प्रस्तुति के साथ ही बिंदादीन महाराज की ठुमरी मेरी सुनो श्याम... पर प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में भातखंडे संस्कृति विवि के विद्यार्थियों ने पं. राम मोहन महाराज के निर्देशन में कथक की प्रस्तुति दी। ठुमरी डगर चलत देखो श्याम कर गहियां... पर भी शानदार प्रस्तुति हुई।
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कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद पं. बिरजू महाराज के चचेरे भाई और कालिका बिंदादीन घराने के वरिष्ठ कथक नर्तक पं. राममोहन महाराज ने कहा कि पं. बिरजू महाराज की इच्छा थी कि कालका बिंदादीन ड्योढ़ी पर संगीत और नृत्य हमेशा जीवित रहे। इसीलिए हर शनिवार और रविवार को इस स्थान पर मैं कथक का निशुल्क प्रशिक्षण देता हूं। इस दौरान विशिष्ट अतिथि कालिका बिंदादीन ड्योढ़ी स्थित कथक संग्रहालय के प्रभारी धनंजय राय भी मौजूद रहे। राग प्रभात की निदेशक रिनी भारद्वाज ने गुरु वंदना गुरु चरनन में शीश नवाऊं... पर प्रस्तुति देकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस प्रस्तुति के बाद राग प्रभात के बच्चों ने पं. बिरजू महाराज की कंपोजिंग थुंगा थुंगा... पर विशेष प्रस्तुति दी।
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रिनी ने पारंपरिक कथक में तीन ताल में गत, उठान, परन और नटवारी के टुकड़े आदि की प्रस्तुति के साथ ही बिंदादीन महाराज की ठुमरी मेरी सुनो श्याम... पर प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में भातखंडे संस्कृति विवि के विद्यार्थियों ने पं. राम मोहन महाराज के निर्देशन में कथक की प्रस्तुति दी। ठुमरी डगर चलत देखो श्याम कर गहियां... पर भी शानदार प्रस्तुति हुई।

कथक की प्रस्तुति का आनंद लेते दर्शक। -संवाद

कथक की प्रस्तुति का आनंद लेते दर्शक। -संवाद

कथक की प्रस्तुति का आनंद लेते दर्शक। -संवाद

कथक की प्रस्तुति का आनंद लेते दर्शक। -संवाद

कथक की प्रस्तुति का आनंद लेते दर्शक। -संवाद
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