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Lucknow News: हाईकोर्ट ने ला मार्टिनियर काॅलेज की जमीन पर निर्माण पर 16 तक लगाई रोक
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हाईकोर्ट।
लखनऊ। हाईकोर्ट ने ग्रीन काॅरिडोर निर्माण मामले में ला मार्टिनियर काॅलेज की जमीन पर निर्माण पर रोक का आदेश 16 मार्च तक बढ़ा दिया है। पहले यह 13 मार्च तक था। कोर्ट ने जमीन का चिह्नीकरण न कर पर डीएम के ''''जिद्दी रुख'''' पर नाराजगी जताकर कड़ी फटकार लगाई है और उन्हें 16 मार्च को सुबह सवा दस बजे पेश होने का निर्देश दिया है। एलडीए से भी जमीन पर प्रस्तावित निर्माण को लेकर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह आदेश ला मार्टिनियर कॉलेज की याचिका पर दिया। याचिका में बताया गया है कि कोठी मार्टिन साहब, गणेशगंज स्टेशन स्थित कॉलेज की जमीनें पर ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत सड़क और फ्लाईओवर का निर्माण करने की सरकारी योजना है। कॉलेज ने आरोप लगाया कि यह निर्माण संस्थान के मालिकाना हक वाली जमीन पर किया जा रहा है, जबकि एलडीए, जिला प्रशासन या राज्य सरकार ने न तो संस्थान की सहमति ली है और न ही कोई अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की है।
हाईकोर्ट ने 27 फरवरी को संबंधित जमीनों की पैमाइश का आदेश दिया था। कहा था कि राज्य सरकार के अधिकारियों और संस्थान के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में उप जिलाधिकारी, सदर पैमाइश कर रिपोर्ट न्यायालय को सौंपेंगे।
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पिछली सुनवाई में डीएम ने कहा था कि जमीन के चिह्नीकरण (डीमार्केशन) तीन दिन में पूरा कर लिया जाएगा। इसकी रिपोर्ट भी कोर्ट के समक्ष पेश करने की बात कही थी। 13 मार्च को सुनवाई के समय जो रिपोर्ट पेश की गई, उससे कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ। कहा कि इसे कैसे ''''चिन्हीकरण'''' कहा जा सकता है। अदालत ने कहा कि डीएम ने जानबूझकर 13 मार्च को कोर्ट में न पेश होने का रास्ता चुना। दरअसल, डीएम सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश नहीं हुए। उनकी तरफ से 13 मार्च को कई केंद्रीय और राज्य मंत्रियों के कार्यक्रमों के होने का हवाला देकर हाजिरी माफी अर्जी दी गई थी।
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न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह आदेश ला मार्टिनियर कॉलेज की याचिका पर दिया। याचिका में बताया गया है कि कोठी मार्टिन साहब, गणेशगंज स्टेशन स्थित कॉलेज की जमीनें पर ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत सड़क और फ्लाईओवर का निर्माण करने की सरकारी योजना है। कॉलेज ने आरोप लगाया कि यह निर्माण संस्थान के मालिकाना हक वाली जमीन पर किया जा रहा है, जबकि एलडीए, जिला प्रशासन या राज्य सरकार ने न तो संस्थान की सहमति ली है और न ही कोई अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की है।
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हाईकोर्ट ने 27 फरवरी को संबंधित जमीनों की पैमाइश का आदेश दिया था। कहा था कि राज्य सरकार के अधिकारियों और संस्थान के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में उप जिलाधिकारी, सदर पैमाइश कर रिपोर्ट न्यायालय को सौंपेंगे।
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पिछली सुनवाई में डीएम ने कहा था कि जमीन के चिह्नीकरण (डीमार्केशन) तीन दिन में पूरा कर लिया जाएगा। इसकी रिपोर्ट भी कोर्ट के समक्ष पेश करने की बात कही थी। 13 मार्च को सुनवाई के समय जो रिपोर्ट पेश की गई, उससे कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ। कहा कि इसे कैसे ''''चिन्हीकरण'''' कहा जा सकता है। अदालत ने कहा कि डीएम ने जानबूझकर 13 मार्च को कोर्ट में न पेश होने का रास्ता चुना। दरअसल, डीएम सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश नहीं हुए। उनकी तरफ से 13 मार्च को कई केंद्रीय और राज्य मंत्रियों के कार्यक्रमों के होने का हवाला देकर हाजिरी माफी अर्जी दी गई थी।