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Lucknow News: फेस्टिवल में पारंपरिक और आधुनिक शिल्पकला का संगम

Tue, 03 Feb 2026 02:30 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 02:30 AM IST
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The festival is a confluence of traditional and modern craftsmanship.
सनतकदा फेस्टिवल के तहत हुए कार्यक्रम।
लखनऊ। कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी, राजाराम पार्क और अमीरुद्दौला लाइब्रेरी में चल रहे सनतकदा फेस्टिवल के चौथे दिन की शुरुआत रेजीडेंसी वॉक से सुबह हुई। डीप डाइव इंडिया की ओर से आयोजित वॉर क्रॉनिकल्स-रेजिडेंसी वॉक से हुई। इस दौरान अतिथियों के लिए 1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश रेजिडेंसी पर 148 दिनों की घेराबंदी की कहानियों को पिरोया गया। सफेद बारादरी में सजे हस्तशिल्प बाजार में पारंपरिक कौशल और आधुनिक शिल्पकला का संगम देखने को मिला।
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ईशान शर्मा ने उमराव जान कार टूर के जरिये सिनेमा को ऐतिहासिक लेंस बनाकर 19वीं सदी के अवध की पड़ताल की। कैसरबाग, ब्रिटिश रेजिडेंसी, चौक और अमीनाबाद होते हुए यह दौरा तवायफों की सांस्कृतिक दुनिया, वाजिद अली शाह के दरबारी संरक्षण, 1857 के प्रभाव और लखनऊ की अर्थव्यवस्था व शिल्पों मसलन चिकनकारी व इत्र के बदलाव पर केंद्रित रहा। नूर खान और नीरा कठुरिया की ओर से हुस्न-ए-कारीगरी-ए-अवध शिल्प भ्रमण ने चौक की गलियों में मास्टर कारीगरों और जीवंत शिल्प प्रक्रियाओं से रूबरू कराया, जो पुराने लखनऊ की पहचान हैं। मुक्ता चटर्जी, दीपाली बनर्जी, मोनालिसा चौधरी और दिव्या भट्टाचार्य के साथ बंगाली गोल्पो ने लखनऊ में बंगाली जीवन के निजी किस्से, गीत और संस्मरणों को खुली कहानीबाजी में बांधा। सभी महिलाएं पारंपरिक लाल पार साड़ियों में थीं और बंगाली उलू गान व शंखनाद से शुरुआत की। दिव्या भट्टाचार्य ने कहा कि जहां भी बंगाली जाते हैं, अपने साथ थोड़ा बंगाल ले जाते हैं। अफसाना हुई शाम कार्यक्रम में बेगम मसरूरजहां की लघु कथाओं का तारिक्की हामीद, सुनीता सिंह और सायरा मुज्तबा ने पाठ किया। कफील जफरी ने दास्तान-ए-समुर में फरीदुद्दीन अत्तार की मंतिक-उत-तैयर का दास्तानगोई रूपांतरण पेश किया। समापन रागेश्री दास की सुर सरिता: ए म्यूजिकल ओडिसी से हुआ। इसमें पूर्वांचल और बंगाली ध्वनियों का मिश्रण था।

सनतकदा फेस्टिवल के तहत हुए कार्यक्रम।

सनतकदा फेस्टिवल के तहत हुए कार्यक्रम।

सनतकदा फेस्टिवल के तहत हुए कार्यक्रम।

सनतकदा फेस्टिवल के तहत हुए कार्यक्रम।

सनतकदा फेस्टिवल के तहत हुए कार्यक्रम।

सनतकदा फेस्टिवल के तहत हुए कार्यक्रम।

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