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पठानकोट के बाद यूपी में भी सेना की वर्दी में घुस सकते हैं आतंकी!

Sun, 10 Jan 2016 10:20 AM IST
Updated Sun, 10 Jan 2016 10:20 AM IST
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terrorist can easily purchase army dress in kanpur

पठानकोट की तरह कानपुर में भी आतंकी सेना की वर्दी पहनकर खुले आम घूम सकते हैं। सार्वजनिक क्षेत्रों के अलावा यहां के प्रमुख रक्षा प्रतिष्ठानों और एयरफोर्स स्टेशन को भी निशाना बना सकते हैं। दरअसल सेना की वर्दी और अन्य साज-ओ-सामान की बिक्री यहां बिना किसी प्रतिबंध के खुलेआम हो रही है।

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ऐसे में सेना ने ताजा गाइडलाइन जारी करते हुए आम नागरिकों से ऐसे कपड़े न पहनने और दुकानदारों से बिक्री रोकने की अपील भी जारी की है। सेना ने दुकानों में सैन्य वर्दी की खरीदी-बिक्री के लिए डीएम से लाइसेंस जरूरी कर दिया है।
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दरअसल सेना ही अपनी वर्दी, बूट, टोपी, बैग, स्वेटर, तिरपाल के अलावा अन्य साज-ओ-सामान की नीलामी कर उन्हें पब्लिक के लिए उपलब्ध करवा रही है। इसी नीलामी के बूते शहर में सेना के पुराने कपड़ों व वर्दी का बड़ा कारोबार पनप चुका है।
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यहां सेना की वर्दी के कपड़े का डेढ़ सौ करोड़ का कारोबार है। मेस्टन रोड में नए, परेड में पुराने कपड़ों का बाजारः सेना की वर्दी जैसे नए और पुराने कपड़ों, जूतों और अन्य तरह के सामान का कानपुर हब बनता जा रहा है।

सेना की वर्दी और सामान का 50 करोड़ का कारोबार

terrorist can easily purchase army dress in kanpur

शहर के मेस्टन रोड में सेना की वर्दी और वर्दी जैसे दिखने वाले कपड़े का बड़ा बाजार है। यहां 10 से अधिक थोक और इतने ही फुटकर विक्रेता हैं। इसी तरह परेड में सेना के डिस्पोजल कपड़ों की 15 से अधिक दुकानें हैं।

कुछेक दुकानें जनरलगंज में भी हैं। सेना की वर्दी के कपड़े का शहर में करीब सौ करोड़ रुपये का कारोबार है। यहां के थोक दुकानों से आसपास के जिलों में भी माल सप्लाई होता है।

परेड की दुकानों से पुरानी वर्दी और जूतों की सप्लाई पीडब्ल्यूडी, नेशनल हाईवे, प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनियों और चौकीदारों के अलावा आम लोगों को की जाती है। यह कारोबार भी 50 करोड़ से अधिक का है।

ये कहते हैं मामले के जानकार...

terrorist can easily purchase army dress in kanpur

जम्मू, पठानकोट और अंबाला छावनी इलाकों में प्रशासन को तीन दिन पहले सेना मुख्यालय से दुकानों पर वर्दी और इसका कपड़ा खरीदने वालों का रिकॉर्ड रखने के निर्देश मिले हैं। खरीद-फरोख्त करने वालों का नंबर, नाम, पता एक अलग रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। लिखा पढ़ी में रक्षा मंत्रालय का कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलते ही आम पब्लिक के लिए सेना की वर्दी की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
अविनाश सिंह, एडीएम सिटी

सेना पुराने कपड़ों की बिक्री रोकने पर विचार कर रही है। अभी गाइड लाइन की जानकारी नहीं है। सेना की वर्दी जैसे नए कपड़ों की बिक्री के बारे में भी अभी स्पष्ट नहीं है।
स्टेशन कमांडर का ऑफिस, कैंट

अभी तक ऐसा कोई नियम कानून नहीं था कि पब्लिक सेना की वर्दी जैसे कपड़े नहीं पहनेगी। नई गाइड लाइन आएगी तो उसका पालन करवाया जाएगा।
संचालक, न्यू मिलेट्री स्टोर, मेस्टन रोड, कानपुर

सेना पुराने कपड़ों, जूतों व अन्य सामान की बिक्री के लिए टेंडर निकालती है। हम सेना की अनुमति से कपड़े बेचते हैं।
समीर, सेना के पुराने कपड़ों के विक्रेता, परेड

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