फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   terrorist attack on peshawar.

सुरक्षा पर सवाल: कहीं पेशावर न बन जाए लखनऊ!

Wed, 17 Dec 2014 01:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 17 Dec 2014 01:01 PM IST
विज्ञापन
terrorist attack on peshawar.
पाकिस्तान के पेशावर में जिस तरह स्कूल में आतंकियों ने हमला किया उससे स्कूलों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे सवाल उठने इसलिए भी लाजिमी हैं क्योंकि आतंकियों का मकसद आसान निशाना और ज्यादा नुकसान पहुंचाकर दहशत फैलाना होता है। पेशावर में वे इस मंसूबे में कामयाब भी रहे। लिहाजा इस दिशा में गंभीरता से सोचना होगा ताकि कोई बच्चों को सॉफ्ट टारगेट न बना सके।
विज्ञापन


राजधानी के स्कूलों की बात करें तो सुरक्षा तो दूर एंट्री करते पूछताछ की फार्मेलिटी भी ज्यादातर स्कूलों में नहीं होती। सुरक्षा की बात करें तो चाहे सरकारी स्कूल हों या सहायता प्राप्त या फिर प्राइवेट, कहीं भी कोई खास इंतजाम नहीं हैं।
विज्ञापन


गर्ल्सस्कूलों के बाहर तो फिर भी कुछ जगह एक-दो सुरक्षा कर्मी नजर आते हैं लेकिन ब्वॉयज में तो वो भी नजर नहीं आते। स्कूलों-कॉलेजों में अक्सर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है लेकिन ऐसे मौकों पर भी कोई रोक-टोक नहीं होती।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति

terrorist attack on peshawar.

न तो अभिभावकों से न ही मेहमानों से कोई एंट्री कराई जाती है और न ही उनकी पहचान जांची जाती है। कुछ कॉलेजों में तो किसी कर्मचारी को इसके लिए लगा तो दिया जाता है लेकिन वह केवल खानापूर्ति करता है।

आने वाले शख्स का पहचान पत्र भी नहीं मांगा जाता। वह कुछ भी नाम पता लिखकर कॉलेज में चला जाए कोई पूछने वाला नहीं। राजधानी की गलियों व नुक्कड़ों पर खुले कई प्राइवेट स्कूल तो ऐसे हैं जिनकी छात्र संख्या 500 या इससे भी अधिक है लेकिन वहां भी सुरक्षा का इंतजाम नहीं।

मोटी फीस वसूलने वाले कॉन्वेंट स्कूलों के बाहर भी कोई सुरक्षा कर्मी नजर नहीं आता।

ये नया परसेप्शन सामने आया है। निश्चित रूप से सुरक्षा की दृष्टि से ये हमारे सामने नया चैलेंज है। सिर्फ स्कूल ही नहीं बल्कि सभी पब्लिक प्लेस जहां अधिक लोग एक जगह जुटते हैं वहां सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता कराए जाएंगे।

प्रभारी जिलाधिकारी, योगेश कुमार ने बताया, जहां तक परिवहन आयुक्त के निर्देशों की बात है तो जिला प्रशासन की ओर से स्कूलों या कॉलेज प्रबंधन के साथ इस संदर्भ में कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई। जल्द ही बैठक करके उनको इसके लिए दिशा निर्देश दिए जाएंगे।

कुछ स्कूलों में लगे हैं सीसीटीवी कैमरे

terrorist attack on peshawar.

स्कूलों की छुट्टी के समय राजधानी के कई बड़े व नामी स्कूलों के बाहर जाम लगता है। उस समय एक ही जगह बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के साथ उनके अभिभावक व आम नागरिकों का जमावड़ा होता है।

लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं। गत 26 अक्तूबर को परिवहन आयुक्त के रविंद्र नायक ने निर्देश जारी किए थे कि सभी स्कूल अपने यहां किसी शिक्षक के नेतृत्व में कक्षाएं लगने और छूटने के समय ट्रैफिक कंट्रोल करेंगे, जिससे वहां जाम न लगे।

लेकिन इसका पालन आज तक शुरू नहीं हुआ। सीसीटीवी कैमरों की भी नहीं व्यवस्था सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाने केनिर्देश दिए।

पर 12वीं तक के कॉलेजों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई। शासन-प्रशासन की ओर से इसे अनिवार्य नहीं किया गया। लिहाजा कुछ बड़े व नामी स्कूलों ने खुद ही सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed