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Lucknow News: फर्जी कॉल सेंटर का तकनीकी नेटवर्क उजागर
Thu, 23 Jul 2026 02:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 23 Jul 2026 02:19 AM IST
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लखनऊ। समिट बिल्डिंग में पकड़े गए अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर की जांच में पुलिस ने उसकी तकनीकी कार्यप्रणाली का खुलासा किया है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच में पता चला कि गिरोह पारंपरिक पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क (पीएसटीएन) के बजाय वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) आधारित इंटरनेट टेलीफोनी इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करता था।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि आरोपी इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) नेटवर्क के जरिये अमेरिका के नागरिकों को कॉल करते थे। पूरी कॉलिंग व्यवस्था सेशन इनिशिएशन प्रोटोकॉल (एसआईपी) पर आधारित थी। कॉल करने के लिए आईबीएम/एक्स-लाइट सॉफ्टफोन को एसआईपी क्लाइंट और अभियान संचालन के लिए आईडीआईएम डायलर का उपयोग किया जाता था।
जांच में सामने आया कि एसआईपी कॉन्फिगरेशन, सर्वर विवरण और अन्य तकनीकी संसाधन विदेश में बैठे संचालकों की ओर से उपलब्ध कराए जाते थे। भारत में मौजूद ऑपरेटर इन्हीं पूर्व-कॉन्फिगर संसाधनों के जरिये वीओआईपी नेटवर्क से अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे। अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग के लिए वीओआईपी सेवा प्रदाताओं से कॉल टर्मिनेशन सुविधा और कॉलिंग क्रेडिट भी लिया जाता था। पुलिस अब बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कॉल फ्लो, तकनीकी संरचना, इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल ट्रेल की गहन जांच कर रही है, ताकि पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
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एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि आरोपी इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) नेटवर्क के जरिये अमेरिका के नागरिकों को कॉल करते थे। पूरी कॉलिंग व्यवस्था सेशन इनिशिएशन प्रोटोकॉल (एसआईपी) पर आधारित थी। कॉल करने के लिए आईबीएम/एक्स-लाइट सॉफ्टफोन को एसआईपी क्लाइंट और अभियान संचालन के लिए आईडीआईएम डायलर का उपयोग किया जाता था।
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जांच में सामने आया कि एसआईपी कॉन्फिगरेशन, सर्वर विवरण और अन्य तकनीकी संसाधन विदेश में बैठे संचालकों की ओर से उपलब्ध कराए जाते थे। भारत में मौजूद ऑपरेटर इन्हीं पूर्व-कॉन्फिगर संसाधनों के जरिये वीओआईपी नेटवर्क से अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे। अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग के लिए वीओआईपी सेवा प्रदाताओं से कॉल टर्मिनेशन सुविधा और कॉलिंग क्रेडिट भी लिया जाता था। पुलिस अब बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कॉल फ्लो, तकनीकी संरचना, इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल ट्रेल की गहन जांच कर रही है, ताकि पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
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