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डोरेमान समझा रहा जोड़-घटाना, नोबिता पढ़ा रही जीके, कार्टून के प्रति बच्चों की दीवानगी को पढ़ाई के प्रति रुझान में बदला

Thu, 06 Aug 2020 02:58 AM IST
ishwar ashish रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 06 Aug 2020 02:58 AM IST
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teacher teaches through cartoons in a primary schools.
शिक्षक नेहा सिंह। - फोटो : amar ujala

जब डोरेमान जोड़-घटाना समझाए और नोबिता जीके तो बच्चे भी मन लगाकर पढ़ते हैं। कार्टून के प्रति बच्चों की दीवानगी को पढ़ाई के प्रति रुझान में बदला है पूर्व माध्यमिक विद्यालय टिकरी की टीचर नेहा सिंह ने।

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नेहा बताती हैं कि ग्रामीण बच्चों को क्लास में रोके रखने और पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करने के लिए पिछले साल एक प्रयोग शुरू किया था, जिसमें वे कार्टून कैरेक्टर की मदद से गणित के कठिन पाठ को आसानी से पढ़ाने लगीं।

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लॉकडाउन में जब पढ़ाई ऑनलाइन हुई तो उनकी ये शुरुआत बहुत काम आई। अब तक 30 के करीब कार्टून फिल्म और कॉमिक्स बुक वे तैयार कर चुकी हैं। इसके अलावा 250 शिक्षकों को वे इसकी ट्रेनिंग दे चुकी हैं। आइए जानते हैं उनकी इस कोशिश के बारे में।

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बेटे के कार्टून देखने से थीं परेशान, यहीं से लगे कोशिशों को पंख
नेहा बताती हैं कि मेरा बेटा खुद कार्टून को लेकर पागल है। उसकी इस आदत को कम करना और पढ़ाई की आदत डालना चाहता थीं। स्कूल में रहकर जानने की कोशिश कि की गांव के बच्चों में ये आदत है या नहीं। मोबाइल के जरिए उन्हें कार्टून शो दिखाया तो बच्चे पसंद करने लगे। साथ ही मीना की दुनिया में बच्चों की रुचि देखी तो लगा कि ये आइडिया काम कर जाएगा। एप डाउनलोड किया और कार्टून वीडियो बनाना सीखा। इसके बाद कैरेक्टर के हिसाब से सेलेबस की स्क्रिप्ट तैयार की। इसके बाद एप पर ही कैरेक्टर में वायस ओवर किया।

सम-विषम संख्याओं से लेकर पाइथागोरस प्रमेय तक

नेहा ने गणित के लगभग सभी पाठों को कार्टून फिल्मों और कॉमिक्स के जरिए तैयार किया है। इनमें सम-विषम और प्राकृतिक संख्याएं, चतुर्भुज, समानांतर रेखाएं, परिमेय संख्या, वर्गमूल, घनमूल, पाइथागोरस प्रमेय, सांख्यिकी, वृत्त की प्रमेय, रेखाएं, प्रतिशत, कोटिपूरण कोण व अन्य शामिल हैं। इसी तरह कॉमिक्स के जरिए वे सामान्य अध्ययन पढ़ाती हैं। नेहा बताती हैं कि एक स्क्रिप्ट तैयार करने से लेकर उसे फिल्म बनाने या कॉमिक्स बनाने तक में कम से कम सात दिन का समय लग जाता है।

खुद को भी बना दिया कार्टून, पिंकी की भी ली मदद
नेहा के अनुसार, डोरेमान, नोबिता और सिनचेन बच्चों में ज्यादा लोकप्रिय हैं। यही वजह है कि एप पर भी इन्हीं के कैरेक्टर ज्यादा हैं। इसके अलावा एक लेडी कैरेक्टर को मैंने खुद के रूप में पेश किया है यानी नेहा मैम। एक और कैरेक्टर है जिसका नाम पिंकी है।

सालभर पहले शुरू किया प्रयास लॉकडाउन में बहुत काम आया
नेहा 2015 से टिकरी में टीचर हैं। कहती हैं कि 2019 में ये प्रयोग शुरू किया था। लॉकडाउन में जब ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम विकसित हुआ तो यह प्रयास काम आया। इन्हीं वीडियो फिल्म के जरिए बच्चों को पढ़ाया। स्कूल में पांच-पांच स्टूडेंट्स का ग्रुप बनाया था। पहले एक ग्रुप को मोबाइल से पढ़ाती, फिर उन्हें नोट्स तैयार करने को कहती और दूसरे ग्रुप को पढ़ातीं। इस तरह एक मोबाइल से पढ़ाना संभव हो सका। इन दिनों यही फिल्में काम आ रही हैं।

250 टीचरों को किया प्रशिक्षित

नेहा के पढ़ाई के इस तरीके को इतना पसंद किया गया कि बेसिक शिक्षा के सभी टीचरों के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया, इसके जरिए करीब 250 टीचरों को कार्टून कैरेक्टर पर आधारित पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण दिया गया।

खास बात है कि नेहा बच्चों को पढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाती रहती हैं। हाल ही में उन्होंने ग्रहण क्या होता है समझाने के लिए एक गीत तैयार किया है। कहती हैं कि पहले बच्चे कम उपस्थित होते थे, लेकिन अब उन्हें अच्छा लगने लगा है। साइंस पढ़ाने के लिए वे 10 गीत भी लिख चुकी हैं।

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