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Lucknow News: बोगस फर्म बनाकर 1.77 करोड़ की टैक्स चोरी
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लखनऊ। बोगस जीएसटी फर्म बना आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) बेचकर 1.77 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी करने के दो आरोपियों को माल पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से लैपटॉप और तीन मोबाइल फोन बरामद हुए।
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि आरोपितयों में सीतापुर के बिसवां का निवासी चुंगा खां और बांस मंडी का सलमान रहमानी है। बीते वर्ष 28 अगस्त को सहायक आयुक्त राज्य कर खंड-18 नरेश वर्मा ने माल थाने में रामकली के खिलाफ बोगस जीएसटी फर्म बनाकर टैक्स चोरी करने की एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि रामकली ने माल के इब्राहिमपुर में रामकली इंटरप्राइजेज नाम से फर्म का संचालन दिखाया था। पंजीकरण के वक्त जाली बिजली बिल लगाया था। इंस्पेक्टर माल नवाब अहमद ने बताया कि गहनता से जांच करने पर पता चला कि फर्जीवाड़ा चुंगा और सलमान ने किया था। रामकली को इसका पता भी नहीं था।
आदिल ने बनाई थी फर्जीवाड़े की योजना
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कर चोरी की योजना गिरोह के मास्टरमाइंड आदिल ने बनाई थी। तीनों
जरूरतमंदों को 10 से 15 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज ले लेते थे। फिर इन्हीं के आधार पर जीएसटी कार्यालय में पंजीकरण कराते थे। फिर व्यापारियों को आईटीसी बेचकर टैक्स चोरी करते थे। मिली रकम गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। इंस्पेक्टर का कहना है कि मास्टर मांइड और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में चार टीमें जुटी हैं।
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डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि आरोपितयों में सीतापुर के बिसवां का निवासी चुंगा खां और बांस मंडी का सलमान रहमानी है। बीते वर्ष 28 अगस्त को सहायक आयुक्त राज्य कर खंड-18 नरेश वर्मा ने माल थाने में रामकली के खिलाफ बोगस जीएसटी फर्म बनाकर टैक्स चोरी करने की एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि रामकली ने माल के इब्राहिमपुर में रामकली इंटरप्राइजेज नाम से फर्म का संचालन दिखाया था। पंजीकरण के वक्त जाली बिजली बिल लगाया था। इंस्पेक्टर माल नवाब अहमद ने बताया कि गहनता से जांच करने पर पता चला कि फर्जीवाड़ा चुंगा और सलमान ने किया था। रामकली को इसका पता भी नहीं था।
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आदिल ने बनाई थी फर्जीवाड़े की योजना
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कर चोरी की योजना गिरोह के मास्टरमाइंड आदिल ने बनाई थी। तीनों
जरूरतमंदों को 10 से 15 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज ले लेते थे। फिर इन्हीं के आधार पर जीएसटी कार्यालय में पंजीकरण कराते थे। फिर व्यापारियों को आईटीसी बेचकर टैक्स चोरी करते थे। मिली रकम गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। इंस्पेक्टर का कहना है कि मास्टर मांइड और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में चार टीमें जुटी हैं।
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