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Lucknow News: मेधा को मिला सम्मान तो खिल उठे चेहरे
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लखनऊ। नेशनल पीजी कॉलेज में शनिवार को महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती वर्ष पर मेधा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इसमें पहली बार विभागीय स्तर पर सर्वाधिक अंक लाने वाले 89 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मेधावियों को पदक, स्मृति चिह्न दिए।
राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को विष्णु पुराण के श्लोक के अंश ''सा विद्या या विमुक्तये'' से प्रेरणा लेने की सीख दी। कहा, विद्या वही है जो बंधन से मुक्त करे। विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ अनुशासन होना जरूरी व्यक्तित्व है, जो उनके जीवन को नई दिशा देता है।
आरिफ मोहम्मद खान ने बताया कि भारत की संस्कृति ज्ञान की संस्कृति है। 11वीं सदी में जब बगदाद दुनिया में बौद्धिक गतिविधि का केंद्र था तो वहां के इतिहासकारों ने दुनिया की पांच सबसे बड़ी सभ्यताओं का उल्लेख किया। इसमें भारतीय सभ्यता को ज्ञान व उसके संवर्धन के लिए उल्लेखित किया गया।
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राज्यपाल ने महिलाओं और जन सामान्य को शिक्षा से जोड़ने की वकालत करते हुए कहा कि बिना इसके समाज, देश प्रगति नहीं कर सकता। केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बड़ा उद्योग या व्यावसायिक केंद्र नहीं है, लेकिन उसने अपनी शैक्षिक प्रणाली से पूरे विश्व में अलग छाप छोड़ी है।
प्रबंधक कुंवर उज्जवल रमण सिंह ने सम्मानित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। अवसर पर प्राचार्य प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह, पूर्व सांसद अशोक बाजपेई, मोतीलाल मेमोरियल सोसायटी के महामंत्री राजेश सिंह, लविवि के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह, पूर्व कुलपति प्रो. गोरखपुर विवि प्रो. राजेश सिंह आदि थे।
89 मेधावियों को किया गया पुरस्कृत
प्राचार्य प्रो. देवेंद्र सिंह ने बताया कि मेधा सम्मान समारोह में सभी विभागों के 89 मेधावियों को पुरस्कृत किया गया। इन्हें स्वर्ण पदक व पांच हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। इनमें बड़ी संख्या में छात्राएं शामिल रहीं।
राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को विष्णु पुराण के श्लोक के अंश ''सा विद्या या विमुक्तये'' से प्रेरणा लेने की सीख दी। कहा, विद्या वही है जो बंधन से मुक्त करे। विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ अनुशासन होना जरूरी व्यक्तित्व है, जो उनके जीवन को नई दिशा देता है।
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आरिफ मोहम्मद खान ने बताया कि भारत की संस्कृति ज्ञान की संस्कृति है। 11वीं सदी में जब बगदाद दुनिया में बौद्धिक गतिविधि का केंद्र था तो वहां के इतिहासकारों ने दुनिया की पांच सबसे बड़ी सभ्यताओं का उल्लेख किया। इसमें भारतीय सभ्यता को ज्ञान व उसके संवर्धन के लिए उल्लेखित किया गया।
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राज्यपाल ने महिलाओं और जन सामान्य को शिक्षा से जोड़ने की वकालत करते हुए कहा कि बिना इसके समाज, देश प्रगति नहीं कर सकता। केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बड़ा उद्योग या व्यावसायिक केंद्र नहीं है, लेकिन उसने अपनी शैक्षिक प्रणाली से पूरे विश्व में अलग छाप छोड़ी है।
प्रबंधक कुंवर उज्जवल रमण सिंह ने सम्मानित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। अवसर पर प्राचार्य प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह, पूर्व सांसद अशोक बाजपेई, मोतीलाल मेमोरियल सोसायटी के महामंत्री राजेश सिंह, लविवि के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह, पूर्व कुलपति प्रो. गोरखपुर विवि प्रो. राजेश सिंह आदि थे।
89 मेधावियों को किया गया पुरस्कृत
प्राचार्य प्रो. देवेंद्र सिंह ने बताया कि मेधा सम्मान समारोह में सभी विभागों के 89 मेधावियों को पुरस्कृत किया गया। इन्हें स्वर्ण पदक व पांच हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। इनमें बड़ी संख्या में छात्राएं शामिल रहीं।