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Lucknow News: बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रही तपोस्थली
Mon, 23 Sep 2024 09:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 23 Sep 2024 09:20 PM IST
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार अनुयायियों से गुलजार रही। श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो के नेतृत्व में पूजा किया। इस दौरान अनुयायियों ने महामंकोल बुद्ध विहार की परिक्रमा कर ध्यान भी किया।
इस दौरान बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो ने कहा कि एक महिला अपने मृत बच्चे को लेकर बुद्ध के पास पहुंची। जिसने रोते हुए कहा कि मेरा बेटा मेरे जीवन का एकमात्र आधार है, कृपा करें, इसे किसी तरह फिर से जीवित कर दीजिए। बुद्ध ने कहा कि ठीक है, लेकिन तुम इससे पहले गांव के किसी ऐसे घर से मुट्ठी भर अनाज ले आओ, जहां कभी भी किसी की मृत्यु न हुई हो। महिला गांव के एक-एक घर जाकर कहने लगी कि अगर तुम्हारे घर में किसी की मृत्यु न हुई हो तो मुझे एक मुट्ठी अनाज दे दो। सुबह से शाम हो गई, लेकिन उसे गांव में ऐसा एक भी घर नहीं मिला, जहां कभी किसी की मृत्यु न हुई हो।
वह बुद्ध के पास लौट आई। बुद्ध ने महिला से कहा कि मैंने तुम्हें घर-घर इसलिए भेजा था, ताकि तुम्हें मृत्यु की सच्चाई मालूम हो सके। जिसने जन्म लिया है, उसे एक दिन अवश्य मरना है। महिला को बुद्ध की बातें समझ आ गईं और उसने बुद्ध से दीक्षा ले ली और उसके जीवन में शांति आ गई। इस मौके पर कई अन्य बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।
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इस दौरान बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो ने कहा कि एक महिला अपने मृत बच्चे को लेकर बुद्ध के पास पहुंची। जिसने रोते हुए कहा कि मेरा बेटा मेरे जीवन का एकमात्र आधार है, कृपा करें, इसे किसी तरह फिर से जीवित कर दीजिए। बुद्ध ने कहा कि ठीक है, लेकिन तुम इससे पहले गांव के किसी ऐसे घर से मुट्ठी भर अनाज ले आओ, जहां कभी भी किसी की मृत्यु न हुई हो। महिला गांव के एक-एक घर जाकर कहने लगी कि अगर तुम्हारे घर में किसी की मृत्यु न हुई हो तो मुझे एक मुट्ठी अनाज दे दो। सुबह से शाम हो गई, लेकिन उसे गांव में ऐसा एक भी घर नहीं मिला, जहां कभी किसी की मृत्यु न हुई हो।
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वह बुद्ध के पास लौट आई। बुद्ध ने महिला से कहा कि मैंने तुम्हें घर-घर इसलिए भेजा था, ताकि तुम्हें मृत्यु की सच्चाई मालूम हो सके। जिसने जन्म लिया है, उसे एक दिन अवश्य मरना है। महिला को बुद्ध की बातें समझ आ गईं और उसने बुद्ध से दीक्षा ले ली और उसके जीवन में शांति आ गई। इस मौके पर कई अन्य बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।
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