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दर्जी के बेटे ने अपनी रिसर्च से पूरी दुनिया को चौंकाया

Wed, 16 Mar 2016 02:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 16 Mar 2016 02:57 PM IST
सार

  • दुनिया के किसी देश ने पहले इस विषय पर नहीं किया रिसर्च
  • डॉ. धीरज ने ऑप्टिकल फाइबर पर किया बड़ा रिसर्च
  • फ्रांस जाकर रिसर्च को आगे बढ़ाएंगे डॉ. धीरज
  • रिसर्च के लिए हर महीने मिलेंगे दो लाख रुपए

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tailor's son do a big research in meta material fiber
डॉ. धीरज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुल्तानपुर जिले के जासा पारा गांव में दर्जी का काम करने वाले सुकदेव के बेटे डॉ. धीरज प्रताप ने आईआईटी कानपुर की मदद से ऑप्टिकल फाइबर पर रिसर्च करके दुनिया को चौंका दिया है।

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मेटा मैटेरियल फाइबर का रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हुआ है। इसके दो पेटेंट भी करा लिए गए हैं। आईआईटी का दावा है कि ऑप्टिकल फाइबर के इस क्षेत्र में दुनिया के किसी देश ने रिसर्च नहीं कराया है।
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अच्छे रिसर्च का ही नतीजा है कि फ्रांस की यूनिवर्सिटी ऑफ राइम्स ने डॉ. धीरज को पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप दी है। धीरज जल्द ही फ्रांस जाकर यूनिवर्सिटी से जुड़ेंगे और अपने रिसर्च को आगे बढ़ाएंगे।
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गरीब परिवार के धीरज ने वर्ष 2008 में सीएसआईआर नेट की फेलोशिप हासिल की और 2009 में आईआईटी कानपुर के पीएचडी पाठ्यक्रम में एडमिशन ले लिया। एक साल तक प्रशिक्षण प्राप्त किया, फिर फिजिक्स के प्रो. अनंत राम कृष्ण की देखरेख में थीसिस पर काम करने लगे।

धीरज की रिसर्च देखकर विज्ञानी भी चौंक गए

tailor's son do a big research in meta material fiber
रिसर्च - फोटो : demo pic

यह काम 2015 में पूरा हुआ और थीसिस जमा हो गई। इसका वायवा मंगलवार (15 मार्च) को आईआईटी कानपुर में कराया गया।

नए टाइप के रिसर्च से वायवा लेने वाले विज्ञानी चौंके और सबने धीरज की तारीफ भी की। प्रोफेसर डा. अनंत राम कृष्ण ने कहा कि गरीब और पिछड़े परिवार से संबंधित धीरज ने मिसाल कायम की है।

संदेश दिया है कि कठिन परिस्थितियों में भी आसमां छुआ जा सकता है। धीरज ने जिस टॉपिक पर रिसर्च किया, वह एकदम नया है। दुनिया के किसी देश में इस पर काम नहीं हुआ। इसके लिए निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने भी धीरज को बधाई दी है।

कैंसर का इलाज व डिटेक्शन हो जाएगा आसान

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कैंसर - फोटो : getty images

फिजिक्स के प्रो. अनंत राम कृष्ण ने बताया कि मेटा मैटेरियल फाइबर की मदद से कैंसर का इलाज और डिटेक्शन आसान हो जाएगा। लेजर सेंसर, हीट ट्रांसफर अप्लीकेशन, माइक्रो स्कोपी, केमिकल और बायो सेंसर, सेटेलाइट और दूर संचार के क्षेत्र में भी क्रांति संभव है। आईआईटी कानपुर में इस सब्जेक्ट पर रिसर्च जारी रहेगी।

अब मिलेंगे दो लाख रुपये महीना

 

गरीब परिवार से जुड़े डॉ. धीरज को अब प्रतिमाह 2300-2900 यूरो (करीब डेढ़ से दो लाख रुपये) वेतन मिलेगा। वह रिसर्च करेंगे और फ्रांस की यूनिवर्सिटी में पढ़ाएंगे भी।

गरीब परिवार से जुड़े धीरज ने यूपी बोर्ड और हिंदी मीडियम से पढ़ाई की। इसलिए इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीएससी की पढ़ाई में दिक्कत हुई। मार्क्स भी कम मिले। इसके बावजूद हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत, लगन से अंग्रेजी सीखी, फिर आईआईटी दिल्ली से एमएससी और अब आईआईटी कानपुर से पीएचडी की पढ़ाई की।

आईआईटी दिल्ली से एमएससी और कानपुर से पीएचडी करने वाले धीरज अब भी सोशल मीडिया से दूर हैं। उनका व्हाट्स एप, ट्विटर और फेसबुक एकाउंट नहीं है। फोटोग्राफी या फिर सेल्फी लेने के शौक से दूर हैं। धीरज कहते हैं कि रिसर्च और पढ़ाई से फुर्सत नहीं मिल सकी। आगे भी रिसर्च वर्क करना है। सारा काम ई-मेल से होता है।

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