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Lucknow : टीम ने किया दारुल उलूम नदवा का सर्वे, देश के सबसे बड़े मदरसों में है शामिल

Fri, 16 Sep 2022 01:39 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 16 Sep 2022 01:39 AM IST
सार

यूपी में मदरसों का सर्वे किया जा रहा है। इस कड़ी में सर्वे टीम लखनऊ के नदवा कॉलेज पहुंची और 11 बिंदुओं पर जानकारी ली। सर्वे की रिपोर्ट 25 अक्तूबर को शासन को सौंपी जाएगी। 

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Survey team reached in Nadwa college in Lucknow.
सर्वे के लिए कॉलेज में मौजूद टीम। - फोटो : amar ujala

विस्तार

मदरसा सर्वे की टीम ने बृहस्पतिवार को दारुल उलूम नदवा पहुंचकर इसका सर्वे किया। टीम में एसडीएम नवीन कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सोन कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय राजेश सिंह शामिल थे। प्रदेश में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे करने के लिए सरकार ने 11 बिंदु तय किए हैं। 

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सर्वे टीम ने नदवा प्रबंध कमेटी के सदस्य मौलाना इस्माइल भोला, डॉ. शुएब कुरैशी, नदवा के उप प्रधानाचार्य मौलाना अब्दुल अजीज भटकली और नदवा सचिव के सलाहकार मौलाना कमाल अख्तर नदवी से सभी 11 बिंदुओं पर जानकारी ली और कागजात एकत्र किए। इसके बाद सर्वे टीम ने कक्षाओं का निरीक्षण और लाइब्रेरी का भी दौरा किया। एसडीएम और डीएमओ ने बताया कि सभी बिंदुओं पर जिम्मेदारों ने जानकारी देने के साथ ही कागजात भी मुहैया करा दिए हैं। सोन कुमार ने बताया कि यहां क्लासरूम काफी बड़े हैं और छात्रों की संख्या भी ठीक है। 
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आलिम स्तर तक एनसीईआरटी के मुताबिक शिक्षा 
नदवा के सलाहकार मौलाना कमाल अख्तर नदवी ने टीम को बताया कि करीब 124 साल पुराना दारुल उलूम नदवतुल उलमा कौम के चंदे से संचालित होता है। यहां इस्लामी शिक्षा के साथ आलिम स्तर तक एनसीईआरटी के मुताबिक शिक्षा दी जा रही है। कंप्यूटर और अंग्रेजी पर खास जोर दिया जाता है। 


2410 छात्रों को 81 शिक्षक देते हैं तालीम
मौलाना ने बताया कि नदवा को लखनऊ विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया इंटर तक की मान्यता देता है। जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय स्नातक की मान्यता देता है। उन्होंने बताया कि यहां 11 छात्रावास और 40 क्लासरूम बने हैं। वर्तमान समय में नदवा में 2410 छात्रों को 81 शिक्षक तालीम दे रहे हैं। इसका संचालन कौम के चंदे से किया जा रहा है। यहां मुख्य रूप से इस्लामी शिक्षा दी जाती है।

मदरसा बोर्ड के चेयरमैन बोले- सर्वे को जांच न समझा जाए
गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे को लेकर बन रही भ्रम की स्थिति पर मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे को किसी भी रूप में जांच न समझा जाए। सर्वे का का मकसद मदरसों सही संख्या का पता लगाना है, जिससे जरूरत पड़ने पर उनको सुविधाएं दी जा सकें। डॉ. जावेद ने कहा कि प्रदेश में अधिकांश मदरसे चंदे व जकात के पैसे से चल रहे हैं। ये मदरसे गरीब, लाचार और यतीम बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मदरसों के बच्चों के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा साफ है। वे चाहते हैं कि इन बच्चों के एक हाथ में कुरान और दूसरे में कंप्यूटर होना चाहिए।

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