{"_id":"60d5584d0b77290cdb26bac4","slug":"students-of-madrasa-board-will-study-on-mobile-app-from-new-session-training-to-one-thousand-teachers","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी सरकार का एक और बड़ा कदम: नए सत्र से मोबाइल एप पर पढ़ेंगे मदरसा बोर्ड के छात्र, एक हजार शिक्षकों को प्रशिक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी सरकार का एक और बड़ा कदम: नए सत्र से मोबाइल एप पर पढ़ेंगे मदरसा बोर्ड के छात्र, एक हजार शिक्षकों को प्रशिक्षण
Fri, 25 Jun 2021 09:45 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 25 Jun 2021 09:45 AM IST
सार
यूपी मदरसा बोर्ड के सदस्य जिरगामुददीन ने बताया कि प्रदेश में 558 अनुदानित मदरसे और करीब 17 हजार निजी मदरसे संचालित हो रहे हैं। इसमें करीब ढाई लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं।
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रदेश सरकार यूपी के मदरसे में पढ़ने वाले ढाई लाख से ज्यादा छात्र भी मोबाइल एप के जरिए पढ़ाई कर सकेंगे। मदरसा बोर्ड के सदस्य जिरगामुददीन ने बताया कि मोबाइल एप तैयार करने का प्रस्ताव बोर्ड को भेज दिया गया है। बोर्ड परीक्षाफल घोषित होने के बाद मोबाइल एप तैयार कराने का काम किया जाएगा।
बोर्ड पूरी कोशिश करेगा कि नए सत्र से छात्र मोबाइल एप पर अपनी पढ़ाई कर सके। यूपी मदरसा बोर्ड के सदस्य जिरगामुददीन ने बताया कि प्रदेश में 558 अनुदानित मदरसे और करीब 17 हजार निजी मदरसे संचालित हो रहे हैं। इसमें करीब ढाई लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं।
इस सत्र में मदरसों में ऑनलाइन शिक्षा दिए जाने का काम शुरू किया गया है। मदरसा शिक्षकों को ऑनलाइन ही मदरसा बोर्ड की निगरानी में प्रशिक्षित कराया जा रहा है। ट्रेनिंग प्रोग्राम में कई एक्सपर्ट भी शामिल किए गए हैं। शिक्षकों को ऑनलाइन शिक्षा को प्रभावी कैसे बनाया जाए, इन बातों को बताया जा रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि मोबाइल एप को बनवाकर इसी सत्र से बच्चों की पढ़ाई करानी थी लेकिन कोविड संक्रमण के चलते अब छात्र नए सत्र से मोबाइल एप पर पढ़ाई कर सकेंगे।
विज्ञापन
बोर्ड पूरी कोशिश करेगा कि नए सत्र से छात्र मोबाइल एप पर अपनी पढ़ाई कर सके। यूपी मदरसा बोर्ड के सदस्य जिरगामुददीन ने बताया कि प्रदेश में 558 अनुदानित मदरसे और करीब 17 हजार निजी मदरसे संचालित हो रहे हैं। इसमें करीब ढाई लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं।
विज्ञापन
इस सत्र में मदरसों में ऑनलाइन शिक्षा दिए जाने का काम शुरू किया गया है। मदरसा शिक्षकों को ऑनलाइन ही मदरसा बोर्ड की निगरानी में प्रशिक्षित कराया जा रहा है। ट्रेनिंग प्रोग्राम में कई एक्सपर्ट भी शामिल किए गए हैं। शिक्षकों को ऑनलाइन शिक्षा को प्रभावी कैसे बनाया जाए, इन बातों को बताया जा रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि मोबाइल एप को बनवाकर इसी सत्र से बच्चों की पढ़ाई करानी थी लेकिन कोविड संक्रमण के चलते अब छात्र नए सत्र से मोबाइल एप पर पढ़ाई कर सकेंगे।
15 दिन में एक हजार शिक्षकों को प्रशिक्षण
उतर प्रदेश राज्य भाषा समिति के सदस्य दानिश आजाद बताते हैं कि मदरसा बोर्ड के सहयोग से शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। पहले चरण में 15 दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया गया था। इसमें आईआईटी, आईआईएम व विभिन्न विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने एक हजार से अधिक मदरसा शिक्षकों को ऑनलाइन पढ़ाई कैसे कराई जाए, इसकी ट्रेनिंग दी गई है। दूसरे चरण मे शेष शिक्षकों को ट्रेनिंग देने का काम किया जाएगा।
चार साल में बदली मदरसों की तस्वीर
चार सालों में प्रदेश सरकार ने मदरसों की तस्वीर बदलने का काम किया है। मदरसा छात्रों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए एनसीईआरटी के सिलेबस को लागू किया गया। मदरसा छात्र दीनी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा हासिल कर समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें। चार सालों में मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं को नियमित किया गया।
सरकार ने नई व्यवस्था के तहत जमीन पर बैठ कर परीक्षा देने वाले छात्रों को कुर्सी मेज मुहैया कराई। मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए इस वित्तीय बजट में 479 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा गया है। जो पिछली सरकारों से कई गुना अधिक है।
सिलेबस हुआ कम
यूपी भाषा समिति के सदस्य दानिश आजाद बताते हैं कि मदरसा छात्रों का राहत देने के लिए उनका सिलेबस कम किया गया। पहले छात्रों को 12 से 15 किताबों से पढ़ाई करना पड़ती थी लेकिन सिलेबस कम हो गया है। सिर्फ 07 से 08 किताबों को लागू किया गया। जो पेपर लंबे-लंबे आते थे, उनको सेक्शन में बांट कर छोटा किया गया। इससे छात्रों को काफी सहूलियत हुई है।
चार साल में बदली मदरसों की तस्वीर
चार सालों में प्रदेश सरकार ने मदरसों की तस्वीर बदलने का काम किया है। मदरसा छात्रों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए एनसीईआरटी के सिलेबस को लागू किया गया। मदरसा छात्र दीनी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा हासिल कर समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें। चार सालों में मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं को नियमित किया गया।
सरकार ने नई व्यवस्था के तहत जमीन पर बैठ कर परीक्षा देने वाले छात्रों को कुर्सी मेज मुहैया कराई। मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए इस वित्तीय बजट में 479 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा गया है। जो पिछली सरकारों से कई गुना अधिक है।
सिलेबस हुआ कम
यूपी भाषा समिति के सदस्य दानिश आजाद बताते हैं कि मदरसा छात्रों का राहत देने के लिए उनका सिलेबस कम किया गया। पहले छात्रों को 12 से 15 किताबों से पढ़ाई करना पड़ती थी लेकिन सिलेबस कम हो गया है। सिर्फ 07 से 08 किताबों को लागू किया गया। जो पेपर लंबे-लंबे आते थे, उनको सेक्शन में बांट कर छोटा किया गया। इससे छात्रों को काफी सहूलियत हुई है।