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50 साल पहले जिस टीचर से कहा था डॉक्टर बनूंगा, उन्हीं का किया इलाज
Wed, 10 Apr 2019 03:26 PM IST
manoj tiwari
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: manoj tiwari
Updated Wed, 10 Apr 2019 03:26 PM IST
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लखनऊ। पचास साल पहले चौथी कक्षा के एक छात्र ने अपनी टीचर से कहा था कि वह तो डॉक्टर बनेगा। मासूम आंखों का वह सपना कुछ यूं सच हुआ कि वह स्टूडेंट केजीएमयू के कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री विभाग का मुखिया बन चुका है। पचास साल बाद मंगलवार को वह सुखद संयोग का पल आया कि वही छात्र और टीचर आमने सामने थे। खास बात है कि टीचर अपने उसी स्टूडेंट से इलाज कराने पहुंची थीं। टीचर हैं प्रेमलता मिश्रा (80 वर्ष) छात्र है डॉ. एपी टिक्कू, जिन्हें वह प्यार से असीम बुलाया करती थीं। इलाज कराने आई बुजुर्ग महिला का परिचय जानने के बाद डॉ. टिक्कू को न मोबाइल याद रहा, न कुर्सी, न चैंबर और न ही विभागाध्यक्ष। वे बन गए वही चौथी कक्षा के छात्र।
डॉ. एपी टिक्कूने बताया कि 60 के आखिरी दशक में वे कॉल्विन ताल्लुकेदर्स में पढ़ते थे। चौथी क्लास में उनकी टीचर थीं प्रेमलता मिश्रा जो बायोलॉजी पढ़ाती थीं। पढ़ने में तेज होने के कारण व टीचर के लाडले थे। डॉ. टिक्कू 50 साल पुरानी यादों में खोते हुए कहते हैं कि वे मेरी गलती पर यही कहा करती थीं कि ‘पढ़ोगे नहीं तो डॉक्टर कैसे बनोगे।’
आज लगा कि डॉक्टर बनना सफल हो गया
डॉ. टिक्कू बोले, आज उनके दांतों का इलाज करने के बाद लगा कि मेरा डॉक्टर बनना सफल हो गया। इस पूरे वाकये को उन्होंने सोशल मीडिया पर साथियों से साथ साझा किया है।
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कुर्सी छोड़ खड़े हो गए और उस पर बैठाया
प्रेमलता मिश्रा उनके केबिन में पहुंची और अपना परिचय दिया। डॉ. टिक्कू के मुताबिक, उनके सामने भला कैसे बैठा रहता। उन्होंने टीचर को अपनी कुर्सी पर बैठाया। करीब एक घंटे तक वे साथ बैठे रहे। डॉ. टिक्कू ने उन्हें अपने साथी चिकित्सकों से भी मिलवाया, पूरा वाकया बताया।
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डॉ. एपी टिक्कूने बताया कि 60 के आखिरी दशक में वे कॉल्विन ताल्लुकेदर्स में पढ़ते थे। चौथी क्लास में उनकी टीचर थीं प्रेमलता मिश्रा जो बायोलॉजी पढ़ाती थीं। पढ़ने में तेज होने के कारण व टीचर के लाडले थे। डॉ. टिक्कू 50 साल पुरानी यादों में खोते हुए कहते हैं कि वे मेरी गलती पर यही कहा करती थीं कि ‘पढ़ोगे नहीं तो डॉक्टर कैसे बनोगे।’
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आज लगा कि डॉक्टर बनना सफल हो गया
डॉ. टिक्कू बोले, आज उनके दांतों का इलाज करने के बाद लगा कि मेरा डॉक्टर बनना सफल हो गया। इस पूरे वाकये को उन्होंने सोशल मीडिया पर साथियों से साथ साझा किया है।
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कुर्सी छोड़ खड़े हो गए और उस पर बैठाया
प्रेमलता मिश्रा उनके केबिन में पहुंची और अपना परिचय दिया। डॉ. टिक्कू के मुताबिक, उनके सामने भला कैसे बैठा रहता। उन्होंने टीचर को अपनी कुर्सी पर बैठाया। करीब एक घंटे तक वे साथ बैठे रहे। डॉ. टिक्कू ने उन्हें अपने साथी चिकित्सकों से भी मिलवाया, पूरा वाकया बताया।