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देश भर के बिजली कर्मचारी 8 और 9 जनवरी को करेंगे हड़ताल, ये है वजह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 01 Oct 2018 12:49 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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नेशनल को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज एंड इंजीनियर्स (एनसीसीओईईई) ने इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2014 और केंद्र व राज्य स्तर पर बिजली के निजीकरण की चल रही कार्यवाही के विरोध में 8-9 जनवरी 2019 को देशव्यापी हड़ताल का एलान किया है। लगभग 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फैडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे की अध्यक्षता में शनिवार को नई दिल्ली में देश की सभी ट्रेड यूनियनों की बैठक में यह निर्णय किया गया। एनसीसीओईईई ने एलान किया है कि यदि संसद के शीतकालीन सत्र में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल पारित कराने की कोशिश हुई तो बिना नोटिस दिए देश भर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर लाइटनिंग हड़ताल पर चले जाएंगे।
दुबे ने बताया कि बिजली उत्पादन क्षेत्र में निजी घरानों के घोटाले से बैंकों का ढाई लाख करोड़ रुपये पहले ही फंसा हुआ है। निजी घरानों पर कठोर कार्रवाई के बजाय केंद्र सरकार नए बिल के जरिये बिजली आपूर्ति निजी घरानों को सौंपकर और बड़े घोटाले की तैयारी कर रही है।
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शैलेंद्र दुबे ने बताया कि एनसीसीओईईई के साथ हुई वार्ता में तत्कालीन विद्युत मंत्री पीयूष गोयल ने बिल के कई प्रावधानों में बदलाव या उन्हें हटाने पर सहमति जताई थी। इसके बावजूद केंद्र सरकार की ओर से जारी संशोधित ड्राफ्ट में बिजली कर्मियों के साथ सहमति के बिंदुओं का उल्लेख नहीं किया गया है।
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ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फैडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे की अध्यक्षता में शनिवार को नई दिल्ली में देश की सभी ट्रेड यूनियनों की बैठक में यह निर्णय किया गया। एनसीसीओईईई ने एलान किया है कि यदि संसद के शीतकालीन सत्र में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल पारित कराने की कोशिश हुई तो बिना नोटिस दिए देश भर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर लाइटनिंग हड़ताल पर चले जाएंगे।
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दुबे ने बताया कि बिजली उत्पादन क्षेत्र में निजी घरानों के घोटाले से बैंकों का ढाई लाख करोड़ रुपये पहले ही फंसा हुआ है। निजी घरानों पर कठोर कार्रवाई के बजाय केंद्र सरकार नए बिल के जरिये बिजली आपूर्ति निजी घरानों को सौंपकर और बड़े घोटाले की तैयारी कर रही है।
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शैलेंद्र दुबे ने बताया कि एनसीसीओईईई के साथ हुई वार्ता में तत्कालीन विद्युत मंत्री पीयूष गोयल ने बिल के कई प्रावधानों में बदलाव या उन्हें हटाने पर सहमति जताई थी। इसके बावजूद केंद्र सरकार की ओर से जारी संशोधित ड्राफ्ट में बिजली कर्मियों के साथ सहमति के बिंदुओं का उल्लेख नहीं किया गया है।