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नखलऊवा पंचः लॉन देख जब पूर्व राज्यपाल ने छात्रों को लगाया गले और उनकी पीठ ठोंकी
Wed, 11 Mar 2020 02:29 PM IST
ishwar ashish
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 11 Mar 2020 02:29 PM IST
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विश्वनाथ दास
- फोटो : अमर उजाला
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आज भले ही कई संवैधानिक संस्थाओं की तरह राज्यपाल का पद भी कड़े सुरक्षा घेरे में आ गया है, पर आजादी के बाद के शुरुआती दिनों में ऐसा नहीं था। राज्यपाल या मुख्यमंत्री से मिलना आज जैसा मुश्किल नहीं था। विश्वनाथ दास प्रदेश के राज्यपाल थे।
इस नाते वह लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी थे। विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रो. पं. हरिकृष्ण अवस्थी ने उनसे जुड़ा एक दिलचस्प संस्मरण लिखा है, एक बार उत्तर प्रदेश के राज्यपाल विश्वनाथ दास को छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने जलपान पर आमंत्रित किया।
जलपान और भाषण के बाद विद्यार्थियों ने उनसे अपने साथ फोटो खिंचवाने का आग्रह किया। उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। विद्यार्थी उन्हें लॉन के बीच लेकर जाने लगे। जैसे ही वे लॉन में पहुंचे तो वे बीच में अचानक खड़े हो गए।
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इस नाते वह लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी थे। विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रो. पं. हरिकृष्ण अवस्थी ने उनसे जुड़ा एक दिलचस्प संस्मरण लिखा है, एक बार उत्तर प्रदेश के राज्यपाल विश्वनाथ दास को छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने जलपान पर आमंत्रित किया।
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जलपान और भाषण के बाद विद्यार्थियों ने उनसे अपने साथ फोटो खिंचवाने का आग्रह किया। उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। विद्यार्थी उन्हें लॉन के बीच लेकर जाने लगे। जैसे ही वे लॉन में पहुंचे तो वे बीच में अचानक खड़े हो गए।
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प्रत्येक रविवार को सभी विद्यार्थी लॉन को दुरुस्त करते
उन्होंने मुझसे पूछा, छात्रावास का माली कौन है?' मैंने माली रामस्नेही को पुकारा। माली आया तो राज्यपाल ने कहा, 'यह लो अपना इनाम। यह इनाम मैं अपने पास से दे रहा हूं। आपने छात्रावास के लॉन को 'म्योर गार्डन' से ज्यादा खूबसूरत बना रखा है।'
मेरे और छात्रावास के विद्यार्थियों के लिए इससे ज्यादा खुशी की बात कुछ हो नहीं सकती थी। पर मैंने उनसे निवेदन किया, एक माली इसका रखरखाव नहीं कर सकता। इसका श्रेय छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को है, जो कभी जूता पहनकर लॉन में नहीं आते।
इतना ही नहीं प्रत्येक रविवार को सभी विद्यार्थी खुरपी लेकर इस लाॅन को दुरुस्त करते हैं।' यह सुनते ही राज्यपाल ने एक-एक विद्यार्थी को सीने से लगाकर उनकी पीठ ठोंकी।
मेरे और छात्रावास के विद्यार्थियों के लिए इससे ज्यादा खुशी की बात कुछ हो नहीं सकती थी। पर मैंने उनसे निवेदन किया, एक माली इसका रखरखाव नहीं कर सकता। इसका श्रेय छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को है, जो कभी जूता पहनकर लॉन में नहीं आते।
इतना ही नहीं प्रत्येक रविवार को सभी विद्यार्थी खुरपी लेकर इस लाॅन को दुरुस्त करते हैं।' यह सुनते ही राज्यपाल ने एक-एक विद्यार्थी को सीने से लगाकर उनकी पीठ ठोंकी।