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जब अशफाक उल्ला ने आनंदमठ पढ़कर कहा- मैं भी क्रांतिकारी बनूंगा, पढ़ें पूरा मामला
Thu, 02 May 2019 06:17 PM IST
ishwar ashish
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 02 May 2019 06:17 PM IST
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अशफ़ाक़उल्ला ख़ां
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लोगों को ताज्जुब होगा कि अशफाक उल्ला को शुरू में क्रांति के बारे में कुछ भी नहीं पता था। जब वह शाहजहांपुर के मिशन स्कूल में कक्षा 7 में पढ़ रहे थे तो मैनपुरी षड्यंत्र केस चल रहा था। एक दिन उनके स्कूल में ही कक्षा 10 में पढ़ने वाले राजाराम भारतीय की गिरफ्तारी हो गई।
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गिरफ्तारी के समय अशफाक चुपचाप अपनी कक्षा में बैठे थे। पर, पता नहीं उनके दिल में इस घटना से कैसी हलचल मच गई। तभी बंगाल में कन्हाई लाल दत्त और खुदीराम बोस की कुर्बानी ने अशफाक को और हिला दिया। इसी बीच उनके नगर के रामप्रसाद बिस्मिल की भी पुलिस को तलाश होने की जानकारी उन्हें लगी।
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इन घटनाओं ने अशफाक को सोच में डाल दिया। वह हर वक्त सोचा करते कि ये थोड़े से युवक टोपीदार बंदूक या गोलों से भला ब्रिटिश हुकूमत को कैसे हटा सकते हैं। कई बार उन्हें लगता कि नौजवानों का गरम खून है। जोश है पर, सच्चाई से वाकिफ नहीं हैं।‘अशफाक उल्ला और उनका युग’ किताब के एक संस्मरण से पता चलता है, ‘अशफाक को बचपन से ही तैरने, खेलने और निशानेबाजी का शौक था।
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ज्यादातर वक्त सिर्फ देश के बारे में सोचा करते
मैनपुरी षड्यंत्र केस में अशफाक के स्कूल के ही विद्यार्थी राजाराम भारतीय की गिरफ्तारी के बाद वह ज्यादातर वक्त सिर्फ देश के बारे में सोचा करते। आठवां दर्जा पास करके जब वह कक्षा नौ में आए तो उन्होंने कोर्स में सर वाल्टर स्कॉट का लिखा गीत ‘लव ऑफ कंट्री’ पढ़ा।
रोम के बहादुर सैनिक होरेशस की कहानी भी पढ़ी, जिसमें होरेशस ने अपने दो अन्य साथियों के साथ नदी के उस पार जाकर दुश्मन की सेना से मोर्चा लिया और तब तक रोम के सैनिकों ने नदी पर बने लकड़ी के पुल को तोड़ दिया तथा रोम बच गया।
उनके अध्यापक ने उन्हें देशभक्तों की वीरतापूर्ण कहानियों की किताब दी। तभी किसी ने उन्हें ‘आनंद मठ’ पढ़ने को कहा। अशफाक हिंदी कम जानते थे, इसलिए उन्होंने अपने एक साथी से पढ़वाकर ‘आनंद मठ’ सुना। इसी के बाद घोषणा कर दी, ‘मैं भी क्रांतिकारी बनूंगा।’
रोम के बहादुर सैनिक होरेशस की कहानी भी पढ़ी, जिसमें होरेशस ने अपने दो अन्य साथियों के साथ नदी के उस पार जाकर दुश्मन की सेना से मोर्चा लिया और तब तक रोम के सैनिकों ने नदी पर बने लकड़ी के पुल को तोड़ दिया तथा रोम बच गया।
उनके अध्यापक ने उन्हें देशभक्तों की वीरतापूर्ण कहानियों की किताब दी। तभी किसी ने उन्हें ‘आनंद मठ’ पढ़ने को कहा। अशफाक हिंदी कम जानते थे, इसलिए उन्होंने अपने एक साथी से पढ़वाकर ‘आनंद मठ’ सुना। इसी के बाद घोषणा कर दी, ‘मैं भी क्रांतिकारी बनूंगा।’