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मेहनत पर फिरा पानी
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Tue, 17 Dec 2013 11:01 AM IST
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अपने बलिया वाले चौधरी साहब ‘सरकार’ की ‘गुडबुक’ में जगह पाने के लिए बेकरार हैं।
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विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान एक बार फिर उन्होंने गजब की सक्रियता दिखाई। अब ‘सरकार’ की नजर में सीधे तो चढ़ नहीं सकते, सो खां साहब की चापलूसी में लग गए।
स्टिंग ऑपरेशन से लेकर राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया तक आगे-आगे रहकर यह साबित करने की कोशिश की कि पार्टी के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं।
स्टिंग मामले पर विधानसभा में जिस ‘विद्वतापूर्ण’ ढंग से अपनी बात रखते हुए खां साहब का बचाव किया, उसके बाद उन्हें उम्मीद थी कि ‘सरकार’ और पार्टी के लोग उन्हें हाथोंहाथ लेंगे लेकिन बेचारे को मायूस होना पड़ा।
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काफी देर तक इस उम्मीद में सदन से लेकर कॉरिडोर तक चक्कर काटते रहे कि शायद कोई उनकी मेहनत पर दो शब्द बोल दे, पर किसी ने नोटिस ही नहीं लिया।
चौधरी साहब को लग रहा है कि खां साहब भूले-भटके पैरवी कर दें तो पुराना रुतबा लौट आए लेकिन उम्मीद कम ही दिखती है।
क्योंकि जो लोग ठीक से जानते हैं उन्हें पता है कि खां साहब फिलहाल ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे किसी और को ‘सरकार’ के करीब पहुंचने का मौका मिले।