फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Stock of firecrackers poses a big challenge in the barred districts, traders forced to sell at a quarter to one

रोक वाले जिलों में पटाखों का स्टॉक बना बड़ी चुनौती, व्यापारी औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर

Thu, 12 Nov 2020 08:34 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 12 Nov 2020 08:34 PM IST
विज्ञापन
Stock of firecrackers poses a big challenge in the barred districts, traders forced to sell at a quarter to one
एनजीटी के निर्देश के बाद प्रदेश के 12 जिलों में पटाखों पर लगे प्रतिबंध के बाद पटाखा व्यापारियों को भारी चपत लगी है। तीन महीने पहले से दीपावली की तैयारी करने वाले व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। थोक में पटाखे का कारोबार करने वाले व्यापारियों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर दीपावली पर बिक्री के लिए मंगाए गए पटाखों क्या किया जाए? सरकार कह रही है कि व्यापारी उन जिलों में पटाखे ले जाकर बेचें जहां पाबंदी नहीं है। लेकिन उक्त जिलों में भी पहले से कारोबारी पटाखा मंगवा चुके हैं। अब प्रतिबंधित जिलों के पटाखा व्यापारी अपना माल औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। रोक वाले जिलों में पटाखों का स्टॉक शासन-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है क्योंकि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के  कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
विज्ञापन


एनजीटी की रोक के बाद शासन और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीन महीने पहले से आ चुके पटाखों के  स्टॉक को खपाने की है। व्यापारियों का भी करोड़ों रुपये फंस गया है। पुलिस अफसरों का कहना है कि एनजीटी और राज्य सरकार की गाइडलाइन का पालन कड़ाई से कराया जाएगा। प्रतिबंध वाले जिलों के व्यापारियों को अपना माल उन जिलों में खपाने की सलाह दी गई है जहां पाबंदी नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि ऐसा करने में उन्हें कोई फायदा नहीं है। क्योंकि उन जिलों के लिए भी स्थानीय व्यापारियों ने पहले से पटाखों का भंडारण कर रखा है। जो पटाखे लखनऊ में बिक्री के लिए आए हैं वे आसपास के जिलों जैसे बाराबंकी, रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर, हरदोई में औने-पौने दाम पर ही बिक  सकेंगे।
विज्ञापन


राजधानी के बाहर बने हैं पटाखों के लिए 38 गोदाम
लखनऊ में पटाखों का थोक में काम करने वाले 46 व्यापारी हैं। इनके कुल 38 गोदाम पटाखों को स्टोर करने के लिए हैं। यह सभी गोदाम काकोरी में हैं। वहीं पुलिस ने थोक कारोबार करने के लिए 35 लाइसेंस इस वर्ष जारी किए थे, जिसे स्थगित कर दिया गया है। इसके अलावा 120 आवेदन और किए गए थे, जिस पर अभी निर्णय नहीं किया गया था। लाइसेंसधारी को गोदाम के बारे में पहले से बताना होता है। ऐसे में पुलिस अफसरों का कहना है कि शहर के अंदर पटाखों का कोई कारोबार नहीं होता। पटाखों की बिक्री भी पिछले चार साल से राजधानी के बाहर काकोरी के अमेठी सलेमपुर गांव में स्थाई दुकानों पर हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रतिबंधित जिलों में 500 करोड़ से अधिक का बिजनेस

सूत्रों का कहना है कि जिन जिलों में पाबंदी लगाई गई है वहां लगभ 500 करोड़ रुपये से अधिक के  पटाखों का व्यवसाय प्रति वर्ष होता था। इस वर्ष भी यही अनुमान था। अकेले लखनऊ में 50 करोड़ के  पटाखों का व्यापार पिछले वर्ष हुआ था। ऐसे में इस प्रतिबंध से पटाखा कारोबारियों को तगड़ी चपत लगना तय है।

2007 से गोदाम बाहर और 2016 से बाजार भी बाहर
व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ का कहना है कि राजधानी में 2007 से ही पटाखा स्टोर करने पर पाबंदी है। इसके लिए शहर से बाहर गोदाम बनाए गए हैं। हालांकि 2016 में लखनऊ के जिलाधिकारी रहे राजशेखर ने पटाखों का बाजार भी शहर से बाहर लगाने का आदेश दिया था लेकिन इस पर पूरी तरह अमल नहीं हो सका। हर साल दीपावली के कुछ दिन पहले से शहर के भीतर अलग-अलग हिस्सों में अस्थायी दुकानों को पटाखा बिक्री की अनुमति दी जाती रही है।

सरकार की कोशिशें नाकाफी
उत्तर प्रदेश पटाखा व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश गुप्ता बताते हैं कि पटाखों को लेकर जो निर्देश सरकार की ओर से जारी किए गए हैं उससे व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। हमें दूसरे जिलों में जाकर पटाखे बेचने को कहा जा रहा है। दूसरे शहरों के लिए न तो लाइसेंस हैं और न ही जगह। जिनको जगह मिल भी रही है उन लोगों को पटाखों का सही दाम नहीं मिल पा रहा है।

करना होगा एनजीटी के आदेशों का पालन
उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि हम नहीं चाहते थे कि पटाखों पर प्रतिबंध लगे। लेकिन एनजीटी ने लखनऊ सहित कुछ अन्य जिलों को प्रदूषण के दृष्टि से अतिगंभीर और खतरनाक मानते हुए पटाखों पर रोक लगाई है। लखनऊ के व्यापारियों केआग्रह पर मैंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मुख्य सचिव आरके तिवारी से इस संबंध में बात भी की। लेकिन एनजीटी का आदेश बाध्यकारी है और उसका पालन करना ही होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed