ऑन द स्पॉटः 5000 रुपये में अबॉर्शन, 5 घंटे में डिस्चार्ज!
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राजधानी के कुछ निजी अस्पताल और उसके डॉक्टर कमाई के लालच में कानून को ताक पर रखकर अबॉर्शन (गर्भपात) करने को तैयार हैं। केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक की दरिंदगी के चलते गर्भवती हुई नाबालिग छात्रा के साथ भी ऐसा ही हुआ।
सीतापुर रोड के जिस विजय नर्सिंग होम में उसका अबॉर्शन कराया गया था, उस अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं था और न ही वहां की दोनों डॉक्टरों के पास गर्भपात कराने के लिए जरूरी लाइसेंस नहीं था।
नाबालिग का अबॉर्शन करने वाली दोनों डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद अमर उजाला की टीम ने जब पड़ताल की तो सामने आया कि इस घटना के बाद भी शहर के अधिकतर निजी अस्पतालों के डॉक्टर पांच से सात हजार रुपये में नियमों को ताक पर रखकर गर्भपात के लिए तैयार हो जाते हैं।
यहां तक कि वे गुपचुप तरीके से महज पांच घंटे में डिस्चार्ज का दावा करते हैं। पेश है कॉलेज स्टूडेंट्स बनकर मंगलवार को अलग-अलग इलाकों में 4 निजी अस्पतालों में पड़ताल करने पहुंची टीम की डॉक्टरों से गर्भपात के लिए हुई बातचीत पर एक खास रिपोर्ट...
5 हजार रुपये दो, हो जाएगा काम
टीम ने लेडी डॉक्टर के बारे में पूछा तो पता चला कि वह 12:00 बजे तक आती हैं। वहां मौजूद एक अन्य डॉक्टर को सारी प्रॉब्लम बताई। इस पर डॉक्टर ने कहा कि लेडी डॉक्टर तैयार नहीं होगी तो वह अबॉर्शन के लिए किसी दूसरी लेडी डॉक्टर का नंबर दे देगा।
इस डॉक्टर ने कहा कि 5 से 8 हजार रुपये में सारा काम हो जाएगा। इस बीच हॉस्पिटल के किसी कर्मचारी या खुद उस डॉक्टर ने ये जाहिर नहीं किया कि वे कोई गैरकानूनी काम करने की बात कह रहे हैं।
गांव की लड़की होती तो कर देती
लेडी डॉक्टर करीब 01:15 बजे आई। वॉर्ड ब्वॉय और डॉक्टर उन्हें को सब कुछ बता चुके थे। हमारे पहुंचते ही सब मुस्कुराने लगे। लेडी डॉक्टर ने प्रॉब्लम न पूछकर सीधे पूछा, एज क्या है? रिपोर्टर ने कहा- 25 साल। .. मैरीड हो? रिपोर्टर ने न में जवाब दिया। ...परेशानी क्या है? अबॉर्शन कराना है...।
डॉक्टर जोर से हंसी, फिर बोली, आज अखबार में इतना कुछ छप गया है। इसके बाद तो मैं सपने में भी नहीं सोच सकती। कौन बवाल में फंसना चाहेगा। हमारी दो-तीन डॉक्टर इसी चक्कर में अंदर हो गईं। रिपोर्टर्स ने मिन्नतें की तो बोलीं- मैं टच ही नहीं कर सकती। कुछ हो गया तो तुम्हारे मां-बाप हमें अंदर करवा देंगे।
अगर ये गांव की होती तो कर भी देती। आप शहर की हैं कल को आपको कुछ होगा तो आपके मां-बाप मुझे अंदर करवा देंगे। आप अल्ट्रासाउंड करा लीजिए, मैं दवाइयां बता दे रही हूं, पर लिखित रूप से कुछ नहीं दूंगी। इनको मेडिसिन खिलाओ फिर वैसे 70 फीसदी लोगों की नैया पार हो जाती है इसमें। बाकी देखा जाएगा, कुछ रह जाएगा तो देखेंगे। बातों-बातों में डॉक्टर ने कहा, अब तो मुझे भी एमटीपी एक्ट पढ़ना पड़ेगा।
रेट कम नहीं होगा, पर काम की गारंटी
दोपहर दो बजे जब अमर उजाला टीम विकासनगर, कुर्सी रोड से गुजरी तो उसकी नजर एक जच्चा-बच्चा केंद्र पर टिकी। गेट के पास ही नर्स एक मरीज का ब्ल्ड प्रेशर माप रही थी। पूछने पर बताया गया कि डॉक्टर अंदर बैठे हैं।
पर्सनल बात करने की बात पर इंतजार करने के लिए कहा। थोड़ी देर बाद मरीज वहां से गए तो हमारी बात शुरू हुई। महिला डॉक्टर के बारे में पूछा गया तो बताया कि दिखाना है तो अभी बुला दूंगा। फोन पर केस की जानकारी भी दी और महिला डॉक्टर ने केस करने के लिए हामी भी भर दी।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि घबराने से कुछ नहीं होगा। अल्ट्रासाउंड करवा लो। अबॉर्शन के लिए पूरे पांच हजार देने होंगे, लेकिन काम पूरा होने की गारंटी है। डॉक्टर के बारे में बताते हुए उन्होंने बताया कि महिला डॉक्टर एमडी एमएस हैं और शहर की जानी मानी डॉक्टर हैं। कोई खतरा नहीं होगा।
हमारे यहां ये नहीं होता, आप कहीं और जाइए
गर्भपात के गैरकानूनी धंधे से कुछ डॉक्टर अभी भी कोसों दूर हैं। अमर उजाला टीम गौराबाग कॉलोनी स्थित एक अस्पताल में पहुंची और सीधे लेडी डॉक्टर के कमरे में दाखिल हुई। परेशानी बताई गई। पूरी जानकारी लेने के बाद उन्होंने कहा कि हमारे अस्पताल में ऐसा मुमकिन नहीं है।
आप अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी से बात कर सकते हैं। अस्पताल के एक डॉक्टर, जो मालिक भी हैं उनसे फोन पर बात हुई। फोन पर अकेले में बात करने पर उन्होंने कहा- देखिए मिस्टर, ये सब काम हमारे यहां नहीं होता है। आप कहीं और जाइए। इसके बाद टीम वापस लौट गई।
थोड़ी देर बाद टीम दोबारा उस महिला डॉक्टर के पास पहुंची, जिससे सबसे पहले बात हुई थी। अभी कुछ बात हो पाती इसी बीच रिसेप्सनिस्ट आ धमकी और बोला कि सर आपको बुला रहे हैं। कमरें में गए तो डॉक्टर ने सख्त अंदाज और समझाते हुए कहा कि प्लीज आप हमारी किसी डॉक्टर से बात न करें और यहां से चले जाएं।
जांच के बाद बता दूंगी पूरा खर्च
गुडंबा रोड स्थित इतरी गांव के पास खाली मैदान के बीच एक अस्पताल है। रिसेप्शन पर बैठी दो लड़कियों से महिला रोग विशेषज्ञ के बारे में पूछा गया तो वो मामला समझ गईं। कुछ देर तक हम लोग वहां बैठे रहे। अस्पताल के इंचार्ज को मामले की जानकारी दी गई तो उन्होंने थोड़ा इंतजार करने के लिए कहा।
करीब 4:30 बजे एक 30 वर्ष की महिला डॉक्टर अस्पताल पहुंची। थोड़ी देर बाद उनसे हमारा सामना हुआ। गर्भपात कराने की बात सुनी तो कहने लगीं कि गैरकानूनी है। अखबार पढ़ा होगा तो आप दोनों लोगों को इसकी जानकारी होगी।
मम्मी-पापा या परिवार का कोई दूसरा होगा तभी संभव है। बहुत गुजारिश करने के बाद वे तैयार हो गईं और कहा फॉर्म पर सिग्नेचर कौन करेगा। बाद में मामला फंस जाता है। जांच करवा लीजिए, फिर खर्च बता दूंगी।
उन्होंने कहा कि अबॉशर्न के बाद लड़की को दिक्कत महसूस होती है तो कुछ खर्च बढ़ सकता है। अगले दिन अबॉशर्न कराने की बात पर कहा कि कल नहीं मैं आज ही जांच कर लेती हूं। ऐसे केस में देर नहीं करनी चाहिए। बाद में जांच के लिए आने की बात कहने पर उन्होंने कहा- कभी भी आइए मैं ऑनकॉल हर समय रहती हूं।
बस पैसा और कुछ नहीं
अस्पताल के एक कर्मचारी से गर्भपात के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि देखो खाली पैसा दो बाकी कुछ नहीं करना है। आए दिन इस तरह के मामले आते रहते हैं। दवा से लेकर खून तक की व्यवस्था अस्पताल में हो जाती है। अस्पताल में कई बड़े डॉक्टर हमारे यहां पहुंचते हैं। रोजाना बड़े-बड़े ऑपरेशन और डिलेवरी कराई जा रही है।
सांठगांठ के दम पर निजी अस्पतालों में ऑनकॉल का धंधा खूब फल फूल रहा है। चार अस्पतालों में गर्भपात के लिए टीम पहुंची तो महिला डॉक्टर कहीं नहीं मिली। हर जगह महिला डॉक्टर से सलाह लेने के लिए आधे से एक घंटे तक का इंतजार करना पड़ा। लेकिन किसी अस्पताल ने ये नहीं कहा कि उनके पास डॉक्टर या गर्भपात की सुविधा नहीं है।
एमटीपी एक्ट में सिर्फ 96 का पंजीकरण
सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव ने बताया कि राजधानी के नर्सिंग होम में एबॉर्शन का गोरखधंधा बहुत शर्मनाक है। ऐसे अस्पतालों और नर्सिंग होम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एबॉर्शन) के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय से 23 और सीएमओ कार्यालय से 73 अस्पतालों का पंजीकरण है।
अन्य कहीं भी गर्भपात कराया जा रहा है तो वो गैरकानूनी है। 12 से बीस हफ्ते के बाद गर्भपात अपराध है और इस तरह की शिकायत मिलने पर डॉक्टर और अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का नियम है। लोग सहयोग करें तो ऐसे डॉक्टरों और अस्पतालों पर सख्ती की जा सकती है।