टेंशन में मुलायम, अपने ही दुर्ग में कड़ा इम्तिहान!
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लोकसभा की मैनपुरी और विधानसभा की 11 सीटों पर उपचुनाव का शोर थमने के साथ ही मतदान की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। मैनपुरी के गढ़ में जहां मुलायम सिंह यादव का इम्तिहान है वहीं विधानसभा सीटों पर सपा के सामने खोई प्रतिष्ठा वापस पाने की चुनौती है।
लोकसभा चुनाव में इकतरफा जीत हासिल करने वाली भाजपा के लिए भी यह उपचुनाव किसी परीक्षा से कम नहीं हैं। हालांकि, अधिकतर सीटों पर मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच माना जा रहा है लेकिन कांग्रेस भी अपना वजूद बचाने में जुटी है। इन सीटों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी में शनिवार को वोट पड़ेंगे।
बसपा प्रत्याशियों की गैर मौजूदगी में हो रहे इन उपचुनावों पर सभी की नजरें टिकी हैं। बसपा का वोट बैंक किस तरफ शिफ्ट होगा और इसका चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ेगा? क्या बसपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशियों को दलित वोट मिलेंगे? इस पर चुनावी पंडित आंखें गड़ाए हैं।
चूंकि विधानसभा की सभी 11 सीटें पहले भाजपा या उसकी सहयोगी अपना दल के पास थी, इसलिए सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा उसी की दांव पर है। मैनपुरी में मुलायम सिंह यादव के इस्तीफे के बाद चुनाव हो रहा है, इसलिए इस परंपरागत सीट को न सिर्फ बचाए रखना बल्कि बड़े अंतर से जीत दर्ज करना सपा के लिए चुनौती है।
मैनपुरी: तेज प्रताप और शाक्य में सीधी टक्कर
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मैनपुरी के अलावा प्रदेश के किसी अन्य क्षेत्र में प्रचार के लिए नहीं गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां का उपचुनाव सपा के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
मुलायम का घर सैफई और शिवपाल सिंह यादव का जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र इसी लोकसभा सीट में आता है। जाहिर है, यहां के नतीजे को सीधे तौर पर मुलायम सिंह से जोड़कर देखा जाएगा। इसलिए सपा ने यहां जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी।
इसकी एक वजह यह भी रही कि उसे भाजपा से सीधी चुनौती मिलती दिख रही है। मैनपुरी में मुलायम सिंह के पौत्र तेज प्रताप सिंह यादव के मुकाबले यहां भाजपा ने भी पिछड़ा कार्ड खेला है।
उसने प्रेम सिंह शाक्य को उम्मीदवार बनाया है। मैनपुरी सीट पर यादवों के बाद शाक्य की तादाद दूसरे नंबर पर है। बसपा ने निर्दलीय रामसरन पाल को समर्थन दिया है।
भाजपा को ध्रुवीकरण से उम्मीद
यूं तो मैनपुरी सीट पर 21 उम्मीदवार मैदान में हैं लेकिन मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा के बीच है। सपा को जहां अपने परंपरागत गढ़ को बरकरार रखने का भरोसा है वहीं भाजपा को सपा विरोधी मतों के ध्रुवीकरण की उम्मीद है। हर मतदान केंद्र पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती से भी भाजपाई उत्साहित हैं।
लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद मुलायम सिंह यादव को मैनपुरी सीट पर 3.64 लाख वोटों से जीत मिली थी। अकेले जसवंत नगर विधानसभा क्षेत्र से 1.87 लाख वोटों की बढ़त मिली थी। उन्हें कुल मतदान के 60 फीसदी वोट मिले थे। सपा ने इस सीट पर मुलायम परिवार की तीसरी पीढ़ी के युवा नेता तेज प्रताप सिंह उर्फ तेजू यादव को उतारा है।
वह मुलायम सिंह के बड़े भाई स्व. रतन सिंह के पौत्र और स्व. रणबीर सिंह के पुत्र हैं। वह सैफई के ब्लाक प्रमुख भी हैं। उन्हें प्रत्याशी बनाने का कुछ जगह विरोध भी है। शायद इसीलिए सपा को ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है।
यहां चुनाव की कमान वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव संभाले हुए हैं। वह सपा की जीत के प्रति आश्वस्त हैं। सपा के इस गढ़ को तोड़ने के लिए भाजपा ने आधा दर्जन सांसद और कई वरिष्ठ नेताओं को भेजा है।
सहारनपुर: सीधे मुकाबले के आसार
सहारनपुर नगर में यूं तो 10 प्रत्याशी मैदान में हैं लेकिन मुकाबला भाजपा के राजीव गुंबर, सपा के संजय गर्ग और कांग्रेस के मुकेश कुमार के बीच माना जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक सांप्रदायिक हिंसा से प्रभावित रही इस सीट पर वोटरों के ध्रुवीकरण के चलते आखिरी दौर में कड़े मुकाबले की संभावना जता रहे हैं। बसपा ने निर्दलीय अनिल शर्मा को समर्थन दिया है लेकिन वह मुकाबले को बहुकोणीय बनाते नहीं दिख रहे।
बिजनौर: निर्णायक हुए दलित वोट
पश्चिमी यूपी की बिजनौर विधानसभा सीट पर बसपा की गैरहाजिरी में दलित वोट निर्णायक हो गए हैं। यूं तो बसपा ने निर्दलीय मोहनलाल को समर्थन देने का ऐलान किया है लेकिन दलित वोटों पर भाजपा की उम्मीदें भी काफी हद तक टिकी हैं। सपा, कांग्रेस भी दलित वोट हथियाने में जुटे हैं।
इस सीट पर भाजपा ने हेमेन्द्र पाल सिंह और सपा ने रुचिवीरा को प्रत्याशी बनाया है। दोनों ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। इन्हीं के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। कांग्रेस-रालोद के हुमायूं बेग तीसरा कोण बनने की कोशिश में हैं। पीस पार्टी के जमील अहमद और एक-दो निर्दलीय भी मजबूती से ताल ठोंक रहे हैं।
ठाकुरद्वारा: सांसद के तेवर से भाजपा बेचैन
मुरादाबाद जिले की ठाकुरद्वारा सीट पर भाजपा को अपने सांसद सर्वेश कुमार सिंह के बागी तेवरों से दो-चार होना पड़ रहा है। इससे भाजपा को कुछ नुकसान हो सकता है। बावजूद इसके मुख्य मुकाबला भाजपा के राजपाल सिंह और सपा के नवाब जान के बीच माना जा रहा है।
कांग्रेस के मोहम्मद उल्ला खान भी मजबूती से ताल ठोंक रहे हैं। कांठ और आसपास के क्षेत्र में बने सांप्रदायिक माहौल से प्रभावित इस सीट पर सपा और भाजपा ने पूरी ताकत झोंक रखी है।
नोएडा: सीधे मुकाबले की उम्मीद
नोएडा सीट पर भाजपा और सपा के बीच मुख्य मुकाबले में कांग्रेस तीसरा कोण बनने की कोशिश में हैं। सपा ने विधायक श्री भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित की पत्नी काजल शर्मा को, भाजपा ने विमला बाथम और कांग्रेस ने राजेंद्र अवाना को उम्मीदवार बनाया है। सपा और भाजपा ने चुनावी जंग जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रखी है।
निघासन: टक्कर भाजपा व सपा में
लखीमपुर खीरी जिले की निघासन सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा के रामकुमार वर्मा और सपा के कृष्ण गोपाल पटेल केबीच है। दोनों ही राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। वर्मा पूर्व मंत्री हैं तो पटेल पूर्व विधायक। कांग्रेस से शिव भगवान चुनाव लड़ रहे हैं। वर्मा की उम्मीदवारी पर भाजपा में मामूली उठापटक है लेकिन सपा एकजुट दिख रही है।
लखनऊ पूरब: होगा त्रिकोणीय मुकाबला
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र की इस सीट पर भाजपा, सपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है। बसपा समर्थित निर्दलीय एसपी सिंह भी मुख्य मुकाबले में आने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र के इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर भाजपा ने पूर्व सांसद लालजी टंडन के बेटे आशुतोष टंडन (गोपालजी) को प्रत्याशी बनाया है। उनका मुकाबला सपा की जूही सिंह और कांग्रेस के रमेश श्रीवास्तव से है। ये दोनों ही पिछला विधानसभा चुनाव इसी सीट से लड़े थे। पूर्व एमएलसी शिवपाल सिंह (एसपी सिंह) भी मजबूती से डटे हैं।
हमीरपुर: त्रिकोणीय भिड़ंत के आसार
सिराथू: सपा-बसपा के बीच मुकाबला
कौशांबी जिले की इस सीट पर सपा के वाचस्पति पासी और भाजपा के संतोष सिंह पटेल के बीच मुख्य मुकाबला है। वाचस्पति बसपा के पूर्व विधायक हैं। बसपा ने इस सीट पर निर्दलीय पुनीत कुमार मौर्या को समर्थन दिया है। कांग्रेस ने लालचंद्र कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है।
बलहा: लड़ाई सपा और भाजपा में
बहराइच जिले की इस सीट पर मुख्य मुकाबला सपा के वंशीधर बौद्ध और भाजपा के अक्षयवर लाल के बीच माना जा रहा है। इस सीट पर केवल पांच प्रत्याशी हैं। कांग्रेस ने पूर्व जिलाध्यक्ष श्यामता प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है।
रोहनिया: कृष्णा पटेल की प्रतिष्ठा दांव पर
वाराणसी जिले की रोहनिया सीट पर अपना दल ने कृष्णा पटेल को प्रत्याशी बनाया है। वह मिर्जापुर से सांसद चुनी गई अनुप्रिया पटेल की मां हैं। अनुप्रिया के इस्तीफे के बाद ही इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है।
सपा ने महेंद्र सिंह पटेल और कांग्रेस ने डॉ. भावना पटेल को मैदान में उतारा है। मुख्य मुकाबला सपा और अपना दल के बीच माना जा रहा है। बसपा समर्थित निर्दलीय रमाकांत भी मजबूती से लड़ रहे हैं।
चरखारी: कप्तान और गीता के बीच टक्कर
महोबा जिले की इस सीट पर कुल छह प्रत्याशी मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला सपा के कप्तान सिंह राजपूत और भाजपा की गीता सिंह के बीच माना जा रहा है। कांग्रेस ने रामजीवन को उम्मीदवार बनाया है। उमा भारती के इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।