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सपा के गुंडे हैं मुलायम की चिंता की वजह

Sat, 14 Mar 2015 02:18 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 14 Mar 2015 02:18 PM IST
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SP leaders become anarchist in last three years.

‘विजय जुलूस न निकाले जाएं। मंत्री विजय जुलूसों में भाग न लें। विजय जुलूसों में फायरिंग हुई तो मंत्रियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बर्खास्त भी किया जा सकता है। इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’। -मुलायम सिंह यादव, सपा सुप्रीमो (19 मार्च 2012 को पत्रकार वार्ता में)

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‘मंत्री ऐसे काम करें जो जमीन पर दिखाई दें। साथ ही जनता को लगे कि सूबे में वास्तव में बदलाव हो चुका है। कार्यकर्ताओं की बात सुनी जाए और जनता की समस्याओं के समाधान में तत्परता लाई जाए। ज्यादातर मंत्री अभी पार्टी की कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं। न सुधरे तो लालबत्ती वापस हो सकती है’। -मुलायम सिंह यादव (31 जुलाई 2012 को विधायकों की बैठक में)
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‘सावधान रहना अखिलेश! सरकार की छवि अच्छी होनी चाहिए। अखिलेश, तुम्हारी छवि तो ठीक है लेकिन सहयोगियों (मंत्रियों) की भी छवि ठीक होनी चाहिए। बात तब बनेगी जब विधायकों और मंत्रियों के आचरण पर कोई अंगुली नहीं उठा पाए। प्रदेश की जनता को सरकार से निराश न होने दें। जनता बहुत समझदार हो गई है, वह निराश होगी तो बहुत गलत होगा’। -मुलायम सिंह यादव (2013 में राजनारायण की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में)
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अखिलेश ने किया समर्थन पर सपाइयों की गुंडई रही हावी

SP leaders become anarchist in last three years.

मुख्यमंत्री अखिलेश ने भी मुलायम के बयान पर हामी भरते हुए 1 अगस्त 2012 को कहा था कि नेताजी हम सबके नेता हैं। उन्हें नाराज होने का अधिकार है। अगर वे नाराज हैं तो हम लोगों की कुछ न कुछ गलती होगी। उनकी नाराजगी दूर की जाएगी। इसके लिए उनकी इच्छानुसार काम करने की कोशिश की जाएगी। जहां कहीं अभी तक गलती हुई होगी, उसे भी दुरुस्त किया जाएगा।
-अखिलेश यादव, मुख्यमंत्री (1 अगस्त 2012 को एक कार्यक्रम में पत्रकारों के सवाल पर)

सपाइयों का हाल
आगरा में बाईपास स्थित मॉल में पार्किंग शुल्क को लेकर सपाइयों ने जमकर गुंडई दिखाई। सफेद स्कॉर्पियो से पहुंचे युवकों ने पार्किंग का पैसा मांगने पर एक गार्ड के सिर पर तमंचे की बट मारकर घायल कर दिया। उसे बचाने आए गार्ड को गाड़ी से कुचलने की कोशिश की। इसके बाद फायरिंग कर दहशत भी फैलाई। (8 जनवरी 2015)

झांसी के कस्बा गुरसराय में दो लोगों में विवाद हुआ। दोनों ही सत्ताधारी दल सपा से जुड़े थे। मामला थाने पहुंचा। थाने में भी दोनों पक्षों के लोग आपस में भिड़ गए। पुलिस मूकदर्शक बनी रही।

बवाल इतना बढ़ गया कि थाने के बाहर खड़ी एक स्कॉर्पियो और करीब छह मोटरसाइकिलें आग के हवाले कर दी गईं। घटना को कवर करने पहुंचे एक मीडियाकर्मी की भी सत्ताधारी लोगों ने पिटाई कर दी। (8 फरवरी 2015)

इन बयानो ने बढ़ाईं 'सरकार' की मुश्किलें

SP leaders become anarchist in last three years.

नेताजी (मुलायम सिंह यादव) की ये चिंताएं तीन साल बाद भी चुनौती के रूप में अखिलेश सरकार के सामने खड़ी नजर आ रही हैं। सपा मुखिया को मंत्रियों व विधायकों को अब भी नसीहतें देनी पड़ रही हैं।

पिछले दिनों यहां हुई बैठक में मुलायम ने जिस तरह मंत्रियों को नसीहत दी, उससे यह सच सार्वजनिक हो गया कि 2012 में अखिलेश के सत्ता में आने के कुछ ही दिन बाद नेताजी के दिल व दिमाग में उत्पन्न हुई चिंताएं और सरकार की छवि व साख की फिक्र अब भी दूर नहीं हो पाई है।

तभी तो पिछले वर्ष राजधानी में हुए सपा के अधिवेशन में सपा मुखिया की जुबां से यह पीड़ा फिर फूट ही पड़ी, ‘जनता ने मेरे कहने पर भरोसा करके समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत सरकार बनवाई, पर उसके विश्वास पर खरा उतरने का काम अब भी बाकी है। कार्यकर्ता जनता के बीच जाएं और उनके दुख-दर्द में शरीक हों। मंत्री, विधायक और अन्य नेता अपना आचरण मर्यादित रखें’।

हालांकि सपाइयों के कामकाज और आचरण पर नजर दौड़ाएं तो न उनकी दबंगई कम होती दिखी और न अखिलेश के नेतृत्व वाली सरकार टीम के रूप में काम करती नजर आई। मंत्रियों की छवि व साख 2012-13 में भी सरकार की छवि के लिए चुनौती थी, जो आज भी बरकरार है।

फर्क सिर्फ चेहरों का आया है। पहले राज्य मंत्री विनोद सिंह उर्फ पंडित के गोंडा के सीएमओ को धमकाने का मामला था तो अब कैबिनेट मंत्री महबूब अली और गायत्री प्रसाद प्रजापति जैसे लोकायुक्त की जांच में फंसे चेहरे हैं।

खुलेआम धमकी दे रहे मंत्री, विधायक

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सपाइयों की दबंगई की समस्या सरकार के गले में पहले ही दिन पड़ गई थी। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही क्षण बाद सपाइयों ने शपथ ग्रहण मंच पर हुल्लड़ मचाकर और उसे तोड़कर सपा सरकार के सामने छवि सुधारने की चुनौती रख दी थी।

रही-सही चिंता बढ़ गई थी शपथ ग्रहण समारोह वाले दिन ही सपा कार्यकर्ताओं की दबंगई से जुड़े एक मामले के इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचने से। कन्नौज के कनकपुर गांव के कल्याण सिंह ने हाईकोर्ट की शरण लेते हुए कहा था कि सपा कार्यकताओं ने उसके घर में घुसकर लड़कियों से छेड़छाड़ की व दुराचार का प्रयास किया। वे कन्नौज में उसके पैतृक निवास का मकान व जमीन हड़पने के लिए दबंगई कर रहे हैं।

एक के बाद एक कई घटनाएं : पिछले तीन साल के दौरान एक के बाद एक कई घटनाएं हुईं, जो बताती हैं कि सपाइयों की छवि बदलने की चुनौती न सिर्फ संगठन के सामने, बल्कि सरकार की साख के लिए आज भी चिंता का सबब बनी हुई है। इसमें सिर्फ सामान्य कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि पार्टी के बड़े नेता, मंत्री व विधायक भी शामिल रहे हैं।

विधायक शाकिर अली का रेलवे स्टेशन पर घोड़ा दौड़ाना हो या मंत्री महबूब अली का अमरोहा में यह ऐलान कि 70 रुपये प्रतिकिलो से ऊपर किसी ने गोश्त बेचा तो उसकी खैरियत नहीं। इस पर सरकार को सफाई तक देनी पड़ी।

कानपुर में सपाइयों ने मुख्यमंत्री के सामने ही इतना हंगामा कर दिया कि उन्हें कहना पड़ा, ‘जब मेरे सामने ही इस तरह की हरकत हो रही है तो पीठ पीछे क्या करते होंगे।’ इसके बावजूद किरकिरी कराने वाली घटनाओं पर रोक नहीं लगी।

खुद शिवपाल ने भी कराई सरकार की किरकिरी

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दूसरों की कौन कहे, मुख्यमंत्री के चाचा व वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव के जेल में बंद आईएएस अधिकारी प्रदीप शुक्ला से मिलने की घटना ने भी सरकार की खासी किरकिरी कराई।

कैबिनेट मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव व लोक निर्माण राज्य मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल के बीच हुए विवाद पर सरकार को सफाई देनी पड़ी। रजिस्ट्रारों के तबादलों में राय न लेने से तत्कालीन स्टांप व न्यायालय शुल्क पंजीयन मंत्री दुर्गाप्रसाद यादव नाराज हो उठे। विभाग के सचिव से हुआ विवाद चर्चा का विषय बना।

मंत्री ने कहा कि तबादला करना उनका अधिकार है। हालांकि बाद में सरकार ने यादव का विभाग बदल दिया। आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन प्रकरण ने भी सरकार की काफी किरकिरी कराई।

आरोप लगा कि सत्तारूढ़ दल के नरेंद्र भाटी के अवैध खनन का विरोध करने के कारण दुर्गा शक्ति को हटना पड़ा। सरकार ने सफाई में मस्जिद की दीवार ढहाने का आरोप दुर्गा शक्ति पर लगाया तो और किरकिरी हुई। राजेंद्र सिंह राणा के पिता की कार पर लालबत्ती विवाद ने भी सरकार की कम बदनामी नहीं कराई।

ये घटनाएं भी बनीं मुसीबत

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अंबिका चौधरी का बुलडोजर का विवाद और मंत्री शिवप्रताप यादव के ठेकेदारी में सरकार की साख दांव पर लगी। बलरामपुर में समाज कल्याण विभाग के एक टेंडर को लेकर जंतु उद्यान राज्यमंत्री शिवप्रताप यादव भी उलझ गए।

बसपा के पूर्व विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धीरू सिंह के  साथ उनका तनाव इतना बढ़ा कि मामला सदन में उठ गया। सरकार को सफाई देनी पड़ी।

कुंडा (प्रतापगढ़) के बलीपुर गांव में एक ग्राम प्रधान की रंजिश में गोली मारकर हत्या की घटना ने इतना तूल पकड़ लिया कि पुलिस और गांव वालों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। स्थिति को संभालने गए कुंडा के सीओ जियाउल की हत्या हो गई।

आरोप खाद्य-रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर भी लगा। उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। यह बात दीगर है कि नार्को टेस्ट में राजा भैया पर आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।

वाराणसी में डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या ने भी सरकार की छवि को खरोंच लगाई। मुजफ्फरनगर, झांसी, गोरखपुर, बुलंदशहर और सुल्तानपुर में पुलिस पर हमले हुए। अंबेडकरनगर में क्षेत्राधिकारी पर हमला हुआ।

कभी टोल टैक्स मांगने पर पीटा तो मामूली बातों पर

SP leaders become anarchist in last three years.

मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव की नसीहतों के बाद भी सपाइयों की गुंडागर्दी पर अंकुश नहीं लग पाया। हर साल कई घटनाएं सपा सरकार के लिए चिंता का सबब बनीं। सरकार को सफाई देनी पड़ी।

ज्यादा पीछे न जाएं तो 2014 में कभी फैजाबाद मार्ग पर तो कभी कानपुर रोड पर टोल प्लाजा पर सपाइयों व टोल कर्मचारियों के बीच मारपीट की घटनाएं सुर्खियों में रहीं।

बाराबंकी में 5 जनवरी को रास्ते से बाइक हटाने के विवाद में सपाइयों ने लखनऊ में तैनात सिपाही गौरव श्रीवास्तव को भरे बाजार दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।

दबंगई का आलम यह रहा कि लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी नहीं थमी। लोकसभा की श्रावस्ती सीट से सपा प्रत्याशी अतीक अहमद की मौजूदगी में सपाइयों ने अपने चुनाव कार्यालय को विस्तार देने के लिए बीएसए कार्यालय परिसर की निर्माणाधीन चारदीवारी को ही ढहा दिया।

इससे पहले 21 जनवरी 2014 को नैनी (इलाहाबाद) सब्जी मंडी चौराहे पर कार में ट्रैक्टर की टक्कर लग जाने से भड़के सपाइयों ने ट्रैक्टर सवार ग्रामीणों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।

दिसंबर 2014 में मथुरा जिले में एक सपा नेता ने थाने में बैठकर एक व्यक्ति से उठक-बैठक कराई। साथ ही उसे अपने ही जूते अपने सिर पर मारने को भी मजबूर किया।

इन घटनाओं ने भी सरकार को किया शर्मसार

SP leaders become anarchist in last three years.

सरकार बनने के बाद से आज तक की घटनाओं पर नजर दौड़ाएं तो हर तरह की दबंगई सपाइयों के खाते में नजर आएगी। राजधानी में अलीगंज निवासी महिला ने आलमबाग में रहने वाले सपा से जुड़े एक नेता पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप लगाया। उसने यह भी कहा कि 17 सितंबर 2013 को नेता ने उससे दुष्कर्म किया था।

विरोध करने पर 14 फरवरी 2014 को उससे सगाई करने की बात कही थी। सहारनपुर में गांव भवनपुर के ग्राम प्रधान व उत्तराखंड सपा पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष पदम सिंह गुर्जर पर विद्युत निगम के अधिशासी अभियंता से मारपीट का आरोप लगा।

आगरा के सिकंदरा क्षेत्र से अगवा बाह की किशोरी के साथ दो लोगों के दुष्कर्म की घटना सुर्खियां बनी। आरोप लगा कि किशोरी को सपा के एक विधायक के बंगले पर रखा गया।

मुजफ्फरनगर में चेकिंग के दौरान सपा युवजन सभा के कोषाध्यक्ष सौरभ सिंह पुंडीर की बाइक रोकने को लेकर सीओ से कहासुनी हुई। कुछ ही घंटों में सीओ का तबादला बलरामपुर कर दिया गया।

अलीगढ़ में एक अस्पताल के प्रबंधक ने सपा के एक विधायक पर धमकाने का आरोप लगाया। किस्से और भी बहुत हैं। एक वाक्य में कहा जाए तो तीन साल बाद भी सपा सरकार व संगठन के सामने छवि बदलने की चुनौती ज्यों की त्यों खड़ी है।

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