'दलितों को कंगाल बनाने की साजिश रच रही सरकार'
विधान परिषद में शुक्रवार को बसपा ने दलितों की भूमि की किसी भी जाति में खरीद-फरोख्त की छूट का विरोध किया। बसपा के सदस्यों ने तर्क दिया कि सपा सरकार दलितों को कंगाल बनाने की साजिश के तहत कानून बना रही है।
इससे कोई भी दलितों की जमीन जबरिया ले लेगा। इस पर नेता सदन अहमद हसन ने कहा कि सरकार के फैसले से दलितों की जिस जमीन के दो लाख रुपये कीमत नहीं लगती थी, उसके 20 लाख रुपये मिलेंगे।
बसपा के आरएस. कुशवाहा ने कहा कि सरकार ने निर्णय किया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की कृषि भूमि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के बेंची व खरीदी जा सकेगी। यह फैसला जमींदारी विनाश व भूमि व्यवस्था अधिनियम-1950, लैंड रेवन्यू एक्ट 1901 सहित कई कानूनों का उल्लंघन है।
सूचना की ग्राह्यता पर सुनील कुमार चित्तौड़ ने तर्क रखे। आरोप लगाया कि जब से सरकार बनी है, तब से कानून तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, सरकार का फैसला संविधान के अनुच्छेद 201 का उल्लंघन है।
सामने वाले को मूर्ख न समझिए
नेता सदन अहमद हसन ने कहा कि दलित वर्ग के जो लोग पैसे की कमी के कारण बेटी की बढ़िया शादी नहीं कर पाते थे। बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पाते थे। इस कानून के बाद जमीनों का इतना पैसा मिलेगा कि कायाकल्प हो जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, ‘नेता सदन विद्वान हैं लेकिन उन्हें सामने वाले को मूर्ख न समझना चाहिए। पदोन्नति में आरक्षण रोक रहे हैं और कहते हैं कि भलाई कर रहे हैं।’
इस पर नेता सदन बोले, कहा जा रहा है सरकार ने बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के जमीन की खरीद-फरोख्त का कानून बनाने की पहल कर उन्हें और गरीब बनाने की साजिश की है।
मालूम हो कि इसमें डीएम से अनुमति लेनी ही होगी। सभापति गणेश शंकर पांडेय ने कार्यस्थगन सूचना अस्वीकार कर दी।