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अयोध्या मसला का हल बातचीत से ही संभव, आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम में बोले वक्ता
Sun, 03 Mar 2019 04:41 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sun, 03 Mar 2019 04:41 AM IST
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अयोध्या
- फोटो : amar ujala
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अयोध्या मसला बातचीत से ही सुलझ सकता है। मामले में न्यायालय से आने वाला फैसला दोनों पक्षों के दिलों को साथ नहीं ला सकेगा। आर्ट ऑफ लिविंग और मुस्लिम इंटेलेक्चुअल फोरम की ओर से शनिवार को प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह बात कही।
बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब ने भी मंच साझा किया। फोरम की ओर से श्रीश्री रविशंकर के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद राबे हसन नदवी और जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी को पत्र भेजे गए।
बाबरी मस्जिद के मुख्य पक्षकार हाजी महबूब ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अयोध्या मसले का हल होना देश के विकास के लिए बेहद जरूरी है। बातचीत के जरिये ही यह मसला सुलझ सकता है। कोई भी अदालत इस मसले का हल नहीं कर सकती।
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हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग अपनी दुकानें चलाने के लिए इस मसले का हल नहीं होने देना चाहते हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के राष्ट्रीय निदेशक गौतम विज ने कहा कि न्यायालय का फैसला दोनों पक्षों के दिलों को साथ नहीं ला सकता है। इसके लिए बातचीत के माध्यम से प्रयास करने होंगे।
मुस्लिम इंटेलेक्चुअल फोरम के अध्यक्ष सैयद रफत ने कहा कि मुस्लिम समुदाय इस मसले पर कुछ शर्तों के साथ समझौता करना चाहता है। इस मामले में हम क्या कर सकते हैं, इसके सारे विकल्प तलाशने होंगे। इसके लिए बातचीत की शुरुआत जरूरी है।
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बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब ने भी मंच साझा किया। फोरम की ओर से श्रीश्री रविशंकर के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद राबे हसन नदवी और जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी को पत्र भेजे गए।
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बाबरी मस्जिद के मुख्य पक्षकार हाजी महबूब ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अयोध्या मसले का हल होना देश के विकास के लिए बेहद जरूरी है। बातचीत के जरिये ही यह मसला सुलझ सकता है। कोई भी अदालत इस मसले का हल नहीं कर सकती।
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हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग अपनी दुकानें चलाने के लिए इस मसले का हल नहीं होने देना चाहते हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के राष्ट्रीय निदेशक गौतम विज ने कहा कि न्यायालय का फैसला दोनों पक्षों के दिलों को साथ नहीं ला सकता है। इसके लिए बातचीत के माध्यम से प्रयास करने होंगे।
मुस्लिम इंटेलेक्चुअल फोरम के अध्यक्ष सैयद रफत ने कहा कि मुस्लिम समुदाय इस मसले पर कुछ शर्तों के साथ समझौता करना चाहता है। इस मामले में हम क्या कर सकते हैं, इसके सारे विकल्प तलाशने होंगे। इसके लिए बातचीत की शुरुआत जरूरी है।