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Lucknow News: पटाखों के धुएं से बढ़ सकती है सांस की तकलीफ
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डॉ. सूर्यकांत।
लखनऊ। दिवाली पर पटाखों का धुआं सांस के मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। केजीएमयू के प्रोफेसर डॉ. सूर्यकांत ने देश के करीब चार करोड़ अस्थमा और छह करोड़ सीओपीडी मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
उन्होंने बताया कि पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं और सूक्ष्म कणों से फेफड़ों में सूजन, एलर्जी, खांसी, सीने में जकड़न और दमे का दौरा पड़ सकता है। आतिशबाजी से आंखों और त्वचा को नुकसान पहुंचने के साथ ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है। घरों की सफाई और पेंटिंग से उड़ने वाली धूल भी सांस के मरीजों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित दिवाली मनाने की अपील की।
घर में रहने और एन-95 मास्क लगाने की दी सलाह
डॉ. सूर्यकांत ने सलाह दी कि सांस के मरीज दिवाली के दौरान घर के अंदर रहें। बाहर निकलने पर अच्छी गुणवत्ता वाला एन-95 मास्क पहनें। नियमित रूप से इनहेलर का इस्तेमाल करें और लक्षण बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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उन्होंने बताया कि पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं और सूक्ष्म कणों से फेफड़ों में सूजन, एलर्जी, खांसी, सीने में जकड़न और दमे का दौरा पड़ सकता है। आतिशबाजी से आंखों और त्वचा को नुकसान पहुंचने के साथ ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है। घरों की सफाई और पेंटिंग से उड़ने वाली धूल भी सांस के मरीजों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित दिवाली मनाने की अपील की।
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घर में रहने और एन-95 मास्क लगाने की दी सलाह
डॉ. सूर्यकांत ने सलाह दी कि सांस के मरीज दिवाली के दौरान घर के अंदर रहें। बाहर निकलने पर अच्छी गुणवत्ता वाला एन-95 मास्क पहनें। नियमित रूप से इनहेलर का इस्तेमाल करें और लक्षण बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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