कहीं आपको भुलक्कड़ तो नहीं बना रहा आपका स्मार्टफोन?
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अरे फोन घर पर रह गया और अब घर का नंबर याद नहीं आ रहा। मैंने अपनी फाइल कहां रखी थी? ओह! मुझे तो कल बैंक जाना था। भूलने की यह समस्या आपके सामने आती होगी।
स्मार्टफोन और इंटरनेट को आप भी अपना करीबी दोस्त समझते होंगें? लेकिन आपके ये दोस्त आपको भुलक्कड़ बना रहे हैं। अगर आपको अपनी याददाश्त को सही रखना है,तो जरूरत के हिसाब से ही इनका उपयोग कीजिए, नहीं तो इन पर ज्यादा निर्भर होने से आपकी मैमोरी कमजोर हो जाएगी।
डिजिटल डिवाइसेज का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, हर समय इंटरनेट,सोशल वेबसाइट्स और स्मार्टफोन को देखते रहने से भूलने की गंभीर बीमारी हो सकती है,जिसे डिजिटल एम्नेशिया कहा जाता है।
कई रिसर्च बताती हैं कि छोटी-छोटी जानकारी पाने या कुछ याद करने के लिए अब लोग दिमाग पर जोर डालने की बजाए इंटरनेट और स्मार्टफोन की मदद लेते हैं। डिजिटल डिवाइस पर बढ़ती निर्भरता के कारण डिजिटल एम्नेशिया बीमारी होती है। इसके चलते हम छोटी-छोटी बातें भी भूलने लगते हैं।
ये कहती है रिसर्च
डिजिटल डिवाइसेज की मदद से हम बातों को याद रखने की बजाय इंटरनेट पर निर्भर हो जाते हैं। इस वजह से कुछ याद करने के लिए दिमाग पर जोर डालने,ध्यान केंद्रित करने की हमारी आदत बहुत कम हो जाती है।
अमेरिका में ‘केस्पर स्काई लैब द्वारा किया गया एक शोध कहता है कि चीजों को याद करने के लिए हम गूगल या डिजिटल डिवाइस पर निर्भर होते जा रहे हैं,इससे याददाश्त कम होना,दिमाग का कमजोर होना ओर बार-बार भूलने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
′यूसीएल इंस्टीटयूट ऑफ काग्निटिव न्यूरोसाइंस′ लंदन के शोधकर्ता डॉ. कैथरेन मिल्स कहते हैं कि डिजिटल डिवाइस से लोग खुद को जुड़ा हुआ समझते हैं और कुछ भी याद रखने, जानकारी प्राप्त करने के लिए अपनी याददाश्त पर निर्भर नहीं रहते।
उन्हें लगता है डिवाइस और इंटरनेट है ना। इस आदत से याददाश्त और दिमाग की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है। यूके की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता मारिया बिमवर के अनुसार इंटरनेट और डिजिटल डिवाइस का ज्यादा प्रयोग हमें भूलने का आदी बना देता है।
मल्टी टास्किंग से कमजोर याददाश्त
ऑफिस,घर या काम के समय डिजिटल डिवाइस और इंटरनेट का इस्तेमाल करने से एक समय में आपका दिमाग एक साथ कई दिशाओं में चलता है। आपकी याददाश्त पर इसका भी प्रतिकूल असर पड़ता है। ऐसे में जरूरी बातें भूलने की संभावना रहती है,इसलिए बेहतर होगा कि एक समय में एक ही काम पर फोकस करें।
हाल ही में हुए शोध कहते हैं कि यह एक नई तरह की बीमारी है,जो डिजिटल डिवाइस और इंटरनेट के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल से पिछले कुछ वर्षों में तेजी से समाने आई है। इस बीमारी में मरीज सुनी,देखी और पढ़ी हुई सूचनाओं को भी याद नहीं रख पाते।
इस बीमारी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
इंटरनेट,मोबाइल ओर डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल उतना ही करें,जितनी जरूरत हैं। हर समय सोशल वेबसाइट्स या इंटरनेट से न जुड़े रहें। सुनी हुई बातों या किए गए कार्य को मन ही मन दोहराएं।
अगर कुछ याद नहीं आता,तो तुरंत डिजिटल डिवाइस का सहारा न लें। दिमाग पर जोर डालकर उसे याद करने की कोशिश करें।
अपने दोस्त,परिवार या ऑफिस के लोगों के फोन नंबर, उनके बर्थडे,एटीम पिन या अन्य जानकारी को समय-समयपर मन ही मन में दोहराएं। डिजिटल डिवाइस पर व्यस्त रहने के बजाय लोगों से मिलें। योग और व्यायाम करें।
सीनियर कंसल्टेंट डॉ. संजीव कुमार कहते हैं कि लैपटॉप और स्मार्टफोन पर इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल करना दिमाग की कार्यक्षमता कमजोर करने के साथ-साथ मैमोरी लॉस का भी कारण बनता है।
हम छूकर,देखकर और महसूस करके भी चीजें आसानी से याद कर सकते हैं,लेकिन डिजिटल डिवाइसेज पर अधिक निर्भर रहने से अब हम दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं देते। इससे भूलने के साथ-साथ डिप्रेशन की भी समस्या हो जाती है।
मेडिकल भाषा में इसे डिजिटल एम्नेशिया कहते हैं। यह आदत हमारे काम,पर्सनैलिटी और परफॉर्मेंस को भी प्रभावित करती है। सभी चीजें हमें डिजिटली सर्च नहीं करनी चाहिए बल्कि दिमाग से ही सोचनी चाहिए।
नियमित व्यायाम, मेडिटेशन करें और हेल्दी डाइट लें। इसके अलावा पजल गेम, बुक रीडिंग, कैलकुलेशन करें, म्यूजिक आदि भी सुनें।