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स्वास्थ्य विभाग ने जिन अवैध अस्पतालों को कराया बंद वे फिर से खुल गए, बस किया है सिर्फ ये काम

Wed, 11 Sep 2019 03:31 PM IST
ishwar ashish हिमांशु अवस्थी/अमर उजाला, लखनऊ
हिमांशु अवस्थी/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 11 Sep 2019 03:31 PM IST
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six illegal hospitals that the Health Department closed, now they reopen on different places
प्रतीकात्मक तस्वीर

अवैध तरीके से चल रहे जिन छह अस्पतालों को पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग ने बंद कराया था वे फिर से चलने लगे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि या तो उनका नाम बदल गया है या फिर जगह बदल गई। स्वास्थ्य महकमे की कार्रवाई ठंडी पड़ी कि इनकी ‘दुकानें’ फिर जम गईं।

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सब कुछ वैसे ही चलने लगा है। यही नहीं स्वास्थ्य महकमे को ये सब कुछ मालूम है। पर, कार्रवाई के बजाय हीलाहवाली जारी है। आए दिन निजी अस्पतालों में मरीजों को बंधक बनाने की खबरें आती हैं। सरकारी अस्पतालों के मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने की खबरें आती हैं।
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इन अस्पतालों पर भी ऐसे ही आरोप थे। इन अस्पतालों में तीन का पंजीकरण भी नहीं था, फिर भी चल रहे थे। इनमें से एक तो वार्ड ब्वॉय चला रहा था। कुछ पर मरीजों की खरीद-फरोख्त, बंधक बनाने जैसे गंभीर आरोप लगे तब इनकी जांच हुई और इन्हें बंद कराया गया।
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सीएमओ ने बंद कराने के बाद फिर से खुले इन छह अस्पतालों को की सूची तैयार करा अफसरों को फिर से अस्पताल बंद कराने के निर्देश दिए थे। पर, हुआ कुछ नहीं।

किसकी शह पर फिर से चलने लगे ऐसे अस्पताल

six illegal hospitals that the Health Department closed, now they reopen on different places
प्रतीकात्मक तस्वीर
मरीज को बंधक बनाया, पंजीकरण तक नहीं था
 त्रिवेणी नगर साठ फिटा रोड स्थित निजी अस्पताल पर बिल भुगतान न करने पर मरीज को बंधक बनाने का आरोप लगा था। स्वास्थ्य मंत्री से लेकर स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों से शिकायत हुई। आननफानन में अस्पताल संचालक ने मरीज को एंबुलेंस में लादकर बलरामपुर अस्पताल भेज दिया। सीएमओ की जांच में अस्पताल का पंजीकरण नहीं मिला था।
अब : तीन माह बाद जगह बदल कर अस्पताल को फिर खोल दिया। अब ये अस्पताल निराला नगर पोस्ट ऑफिस के पास चल रहा है।

ट्रॉमा से मरीज मंगाया, हो गई थी मौत
 मड़ियांव के रैथा रोड स्थित निजी अस्पताल ने एड्स के मरीज की ट्रॉमा से शिफ्टिंग कराई थी। इलाज में लापरवाही से मरीज की मौत हो गई। तीमारदारों ने हंगामा किया और रिपोर्ट दर्ज कराई तो संचालक-स्टाफ अस्पताल छोड़कर फरार हो गए। सीएमओ की टीम ने अस्पताल को बंद करा दिया था।
अब : कुछ माह बाद ही फैजुल्लागंज सीताराम मंदिर पास अस्पताल उसी नाम से शुरू कर दिया। अस्पताल की जगह बदलने की सूचना भी सीएमओ कार्यालय को नहीं दी गई।

वार्ड ब्वॉय चला रहा था अस्पताल

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प्रतीकात्मक तस्वीर
कोचिंग की आड़ में वार्ड ब्वॉय चला रहा था अस्पताल
गुडंबा में कुर्सी रोड स्थित कोचिंग सेंटर की आड़ में वार्ड ब्वॉय अस्पताल चला रहा था। महिला मरीज के गलत ऑपरेशन के बाद मामला सामने आया। सीएमओ की टीम जांच करने पहुंची तो वार्ड ब्वॉय व स्टाफ नहीं मिला। सीएमओ टीम ने अवैध अस्पताल को बंद कराया था।
अब : करीब चार माह बीतने के बाद वार्ड ब्वॉय ने गुडंबा थाने से कुछ ही दूरी पर एक मकान के निचले हिस्से में कमरा किराए पर लेकर फिर से अस्पताल शुरू कर दिया है।

अस्पताल पर ताला लगा तो दूसरे नाम से खोल लिया
 सीतापुर रोड मड़ियांव थाने से भिठौली के बीच सीएमओ की टीम ने निजी अस्पताल के अवैध संचालन पर ताला जड़ा था। अस्पताल के शटर पर अब भी ताला लगा हुआ है।
अब : संचालक ने अस्पताल का दूसरे नाम से पंजीकरण करा लिया और दूसरा अस्पताल खोल लिया।

जल्द बंद कराएंगे अवैध अस्पताल

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प्रतीकात्मक तस्वीर
 वार्ड ब्वॉय खिलाफ तहरीर दी, चार महीने बीते नहीं दर्ज हुआ केस
सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने कोचिंग सेंटर के अंदर अवैध तरीके से चल रहे अवैध अस्पताल संचालक वार्ड ब्वॉय संतोष पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए एसएसपी को पत्र भेजा था। चार माह बीत गए। एसएसपी कार्यालय से मुकदमा दर्ज करने के लिए गुडंबा थाने को तहरीर भेजी गई है। आरोप है कि गुडंबा पुलिस ने संचालक से साठगांठ करके मामले में अभी तक रिपोर्ट नहीं की। वार्ड ब्वॉय ने थाने से चंद कदमों की दूरी पर नया ठिकाना बना लिया। हालांकि अभी उस मकान पर अस्पताल का नाम नहीं लिखा हुआ है। पर, संचालक बाराबंकी से मरीजों की खरीद-फरोख्त करके वहां पर लाकर भर्ती कर रहा है।

क्या जगह बदल लेने भर से ये हो गए वैध?
सीएमओ का कहना है कि जिन अस्पतालों ने अपनी जगह बिना सूचना दिए बदली है, वे  भी अवैध अस्पतालों की सूची में आ जाएंगे। सीएमओ का कहना है कि जिस जगह पर अस्पताल का संचालन हो रहा है, वहां पर फायर, प्रदूषण, कचरा प्रबंधन सभी की एनओसी जरूरी होती है। नई जगह पर अस्पताल शिफ्ट करने पर वहां भी सभी मानक पूरे करना जरूरी होता है। ऐसे में बिना मानक पूरे किए संचालन अवैध होता है।

जो अस्पताल बंद कराए गए थे, उन्होंने मानक पूरा किए बिना ही अस्पताल का संचालन शुरू किया है। उन्हें जल्द ही बंद कराया जाएगा। साथ ही मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा। इसके लिए डॉक्टरों की टीम बना दी गई है। - सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल
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