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बिकरू कांड में एसआईटी ने 24 लोगों के बयान दर्ज कराए, विकास दुबे की एक साल की सीडीआर निकाली जाएगी
Sat, 25 Jul 2020 01:18 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 25 Jul 2020 01:18 PM IST
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विकास दुबे
- फोटो : amar ujala
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विकास दुबे प्रकरण में एसआईटी ने बयान दर्ज करने की कार्रवाई पूरी कर ली है। इस दौरान करीब 24 लोगों ने बयान दर्ज कराए। इनमें 11 पुलिसकर्मी बताए जा रहे हैं। अब 31 जुलाई को एसआईटी प्रदेश सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
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बापू भवन स्थित कार्यालय में एसआईटी ने बयान दर्ज कराने वालों के हस्ताक्षर भी लिए, जिससे बाद में कोई अपने बयान से न मुकरे और असहज स्थिति न उत्पन्न हो। दरअसल, एसआईटी विकास दुबे पर जितने मामले दर्ज थे क्या उस पर सही जांच हुई थी या नहीं, विकास और उसके साथियों को सजा दिलाने के लिए एक्शन ठीक से लिया गया या नहीं, विकास के आपराधिक इतिहास को देखते हुए उसके जमानत को निरस्त करने के लिए कोई एक्शन लिया गया था या नहीं जैसे सवालों की जांच कर रही है। इसके साथ ही एसआईटी विकास दुबे की एक साल की सीडीआर निकलेगी। इससे उसके पुलिस से संपर्कों को तलाशा जाएगा। बता दें कि विकास दुबे मामले ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद विकास दुबे यूपी पुलिस को चकमा देते हुए फरार भी हो गया था। उसकी गिरफ्तारी उज्जैन से हुई।
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विकास दुबे मामले में जांच आयोग को कैबिनेट की मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विकास दुबे मुठभेड़ व कानपुर के बिकरू कांड की जांच के लिए गठित आयोग को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। गृह विभाग ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। आयोग के पुनर्गठन के प्रस्ताव को शुक्रवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन से मंजूरी दी गई। इसके बाद पूर्व में एकल न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित आयोग के लिए जारी अधिसूचना को संशोधित कर हुए दो नाम और जोड़े गए।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुठभेड़ व पुलिस हत्याकांड की जांच आयोग में सरकार के प्रस्तावित नाम पर मंजूरी देते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीएस चौहान व पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता को भी शामिल कर दिया था। जस्टिस चौहान को जांच आयोग का प्रमुख बनाया गया है।