ALERT: अस्पतालों और दुकानों पर खत्म हो गई खास दवाइयां
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राजधानी में सरकारी अस्पतालों से लेकर दवा बाजार तक लोगों को मुश्किल से दवाएं मिल रही हैं। सिविल, बलरामपुर, लोहिया, आरएलबी और लोकबंधु समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों और बाल महिला चिकित्सालयों में जहां कुछ दवाओं का स्टॉक एकदम खत्म हो गया है वहीं कुछ दवाओं की किल्लत हो गई है।
सबसे अधिक परेशानी मानसिक रोगियों को उठानी पड़ रही है और अधिकतर दवाएं और इंजेक्शन फार्मेसी में नहीं है। मौजूदा समय में सभी अस्पतालों की फार्मेसी में दवा का संकट है और एक दूसरे से लेकर काम चलाया जा रहा है।
मरीजों की मुसीबत तब और बढ़ जाती है जब दवा दुकानों पर सस्ती दवा नहीं होने की बात कहकर उन्हें कई गुना महंगी दवाएं दुकानदार थमा देते हैं। उधर, अस्पतालों की फार्मेसी में कुछ लोग नेपाल में भूकंप पीड़ितों के लिए करीब 40 ट्रक दवाएं भेजने को भी किल्लत की एक वजह मानते हैं।
इन दवाओं की किल्लत
अस्पतालों की फार्मेसी में मुख्य रूप से वटामिन-ई फोर, मेट्रोजिल और कैल्शियम दवाओं के साथ पेट दर्द में दी जाने वाली पेट दर्द कैरोपेन और ग्लोबी-300 का भी संकट गहराने लगा है।
गैस्ट्रो मेडिसिन : गैस्ट्रो मरीजों को दी जाने वाली दवा ओमेज, हृदय रोगियों की दवा इकोस्प्रीन और मोनिट्रोजेल दवा नहीं है। दस्त से पीड़ित मरीजों को दी जाने वाली कंपाउंड दवा टिनिडोजोल और ओनिडोजोल दवा की आपूर्ति बंद है।
एंटीबायोटिक्स : इन दवाओं में मॉक्सीसाइक्लिन, सिप्लॉक्स, सिप्रोफ्लॉक्सासिन, ऑक्सोफ्लॉक्सासिन, टीडीलॉन, डॉक्सीसाईक्नील एजीथ्रोमाइसिन, सिट्रिजिन व पेंटाप्रोजोल की आपूर्ति नहीं होने से संकट गहराने लगा है।
मनोरोगियों की दवा : मनोरोगियों को दी जाने वाली एक्जेट्राकैप, इट्रिया, वी-बीटा, ओलॉवे, लोजिपैम, एनटीपी और कोलोनालेंट दवा पूरी तरह नहीं मिल रही है।
पेशाब संबंधी रोग : इस रोग के मरीजों को दी जाने वाली यूरोलॉजी फ्लुकोनैजोल टैबलेट्स फ्लुका-150 की भी कमी हो गई है।
कंपनियां नहीं कर रहीं आपूर्ति
सूत्रों के मुताबिक, दवा आपूर्ति के लिए जिन दवा कंपनियों से रेट कांट्रैक्ट हुआ है वो दवा की आपूर्ति कर नहीं रही हैं। अस्पताल प्रशासन ने दवाओं की लिस्ट तैयार कर इंटेंट भेजा है लेकिन कंपनियों की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है।
सब कमीशन का खेल
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि दवाकंपनी ने कांट्रैक्ट किया है तो हर हाल में उसे दवा उपलब्ध कराना चाहिए। ऐसा न करने वाली कंपनी को ब्लैक लिस्ट करना चाहिए पर ऐसा नहीं होता। सब कमीशन का खेल होता है। ऐसे में अधिकारी कंपनियों पर कार्रवाई करने के बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं।
सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव कहते हैं कि नेपाल में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए अस्पतालों से दवा भेजी गई थी। इसके बावजूद दवा की कमी नहीं हुई थी। कुछ दवाओं के स्टॉक को लेकर सूचना मिली थी लेकिन उसे समय रहते पूरा कर लिया गया है। अस्पतालों को दवा सीएमएसडी करती है। दवा कंपनियों की मनमानी या लापरवाही से दवा आपूर्ति लड़खड़ाई है तो अस्पताल के संबंधित अधिकारियों से इंटेंट की कॉपी मांगकर दवा कंपनियों से जवाब तलब किया जाएगा।
4 हजार की एल्बुमिन 10 हजार में
दवा विक्रेताओं से मिली जानकारी के मुताबिक, ह्यूमन सिरम एल्बुमिन ‘एचएसए प्रोटीन’ इंजेक्शन बाजार से पूरी तरह गायब है। एल्बुमिन इंजेक्शन की कीमत करीब चार हजार है। ब्लैक में एक से दो दिन बाद इंजेक्शन मिलता है जिसके लिए आठ से दस हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
इसके साथ ‘आईवीआईजी’ इंजेक्शन भी बाजार में मिलना मुश्किल है। केमिस्ट से मिली जानकारी के मुताबिक, इस इंजेक्शन के एक बॉयल की कीमत चार हजार रुपये है जो ब्लैक मार्केटिंग में सात से आठ हजार रुपये में बेची जा रही है।
बलरामपुर अस्पताल के गैस्ट्रोसर्जन बताते हैं कि ये दवा लिवर के साथ किडनी मरीजों के लिए बहुत जरूरी है। इंजेक्शन न मिलने के चलते ब्लड कंपोनेंट चढ़ाना मजबूरी है। संक्रमण होने पर पीड़ितों को दिया जाने वाला एंटीबायोटिक इंजेक्शन ‘पेंसिलिन’ भी पर्याप्त मात्रा में बाजार में नहीं है।
गंभीर रोगियों पर कोई दवा जब असर नहीं करती है तो ‘प्रेडिसिलॉन’ दवा दी जाती है जिसके बाद इलाज में इस्तेमाल हो रही दवा असर दिखाने लगती है। सांस के रोगियों को ‘बीटामीथासोन’ दी जाती है। ये दवा भी मेडिकल स्टोर पर मुश्किल से मिल रही है। टीबी और फेफड़े के रोगियों को दी जाने वाली ‘डॉक्सीसाईक्लिन’ दवा की गोली और इंजेक्शन की आपूर्ति कई महीने से बंद है।
दर्द की दवा ‘ट्रॉमडॉल’ भी बाजार से कई महीनों से गायब है। मिर्गी के रोगियों को दी जाने वाली दवा कार्वाजेपीन और ऑक्स कार्वाजेपीन का संकट गहराया हुआ है। इन दवाओं के विकल्प के तौर पर जो दवाएं उपलब्ध हैं वो काफी महंगी हैं और हर उनका हर जगह मिलना मुश्किल हो रहा है। इसी तरह हिचकी की शिकायत से पीड़ित मरीजों को दी जाने वाली सामान्य दवा ‘एम्ब्रामिन’ भी नहीं मिल रही है।